World News: दो हफ्ते का दिया था अल्टीमेटम, फिर 2 दिन बाद ही ईरान पर कर दिया हमला, क्यों बेसब्र हुए ट्रंप? – INA NEWS


ईरान-इजराइल जंग के बीचअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी थी कि उसके पास संभावित सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए दो सप्ताह का समय है, लेकिन इसके ठीक दो दिन बाद रविवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख परमाणु स्थलों पर हमला किया, जिससे देश के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा.
हालांकि, रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप जमीनी सेना भेजने का फैसला करने से पहले अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत के विकल्प पर विचार कर रहे थे.
यह प्रस्ताव तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन का था, जिन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप को फोन किया था, जब अमेरिकी राष्ट्रपति कनाडा में G7 नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे. ट्रंप को कथित तौर पर ईरान से बैक-चैनल वार्ता के लिए “संकेत” भी मिले थे.
इस वजह से अमेरिका-ईरान की नहीं हो सकी बात
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप न केवल वार्ता के लिए उप राष्ट्रपति जेडी वेंस और व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ को तुर्किए भेजने के लिए तैयार थे, बल्कि उन्होंने जरूरत पड़ने पर खुद भी वार्ता में शामिल होने की पेशकश की थी.
वार्ता के इस प्रस्ताव को एर्दोगन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची को बताया. कथित तौर पर दोनों ईरानी अधिकारियों ने प्रस्ताव के साथ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके.
खामेनेई हत्या के प्रयास के डर से एक सुरक्षित भूमिगत बंकर में छिप गए. जब ईरानी अधिकारी उनसे संपर्क करने में विफल रहे, तो उन्होंने तुर्किए को सूचित किया, जिसने फिर अमेरिका को बताया कि वार्ता नहीं होगी.
तुर्किए की मध्यस्थता भी नहीं आया काम
बैठक रद्द होने के कुछ दिनों बाद, एर्दोगन ने कथित तौर पर इस्तांबुल में अराघची से मुलाकात की और उनसे अमेरिका के साथ बातचीत करने का आग्रह किया, यह आश्वासन देते हुए कि तुर्किए इसकी व्यवस्था करने के लिए तैयार है.
उसी दिन अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, जब बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स मिसौरी में अमेरिकी एयरबेस से रवाना हुए और ईरान में तीन प्रमुख परमाणु स्थलों – फोर्डो, नतांज और एस्फाहान पर हमला किया.
बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और बंकर-बस्टर बमों का उपयोग करते हुए, अमेरिका ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ लड़ाई में अपने सहयोगी इजराइल का साथ दिया.
ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका का हमला
13 जून को ईरान-इजराइल संघर्ष शुरू होने के बाद से ही ट्रंप तेहरान को चेतावनी दे रहे थे कि वे पीछे हट जाएं और अपनी परमाणु योजनाओं के बारे में “अपने होश में आएं”. ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियान की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि फोरडो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया, जो ईरान के लिए बहुत महत्वपूर्ण परमाणु स्थल है और जिसे इजराइली बमों से अभेद्य माना जाता है.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, “दुनिया में कोई और सेना नहीं है जो ऐसा कर सकती है. अब शांति का समय है!” ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद “मध्य पूर्व के धमकाने वाले” ईरान से शांति स्थापित करने के लिए कहा, जबकि ईरान ने कहा है कि वह “गंभीर उल्लंघन” के खिलाफ खुद का बचाव करने का अधिकार सुरक्षित रखता है.
दो हफ्ते का दिया था अल्टीमेटम, फिर 2 दिन बाद ही ईरान पर कर दिया हमला, क्यों बेसब्र हुए ट्रंप?
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