World News: शांति का नोबेल नहीं मिलने पर डोनाल्ड ट्रंप क्या-क्या कर सकते हैं? – INA NEWS

World News: शांति का नोबेल नहीं मिलने पर डोनाल्ड ट्रंप क्या-क्या कर सकते हैं? – INA NEWS

चंद घंटों में तय हो जाएगा कि 2025 का नोबेल पीस प्राइज किसे मिला. कुछ के लिए ये जनरल नॉलेज का सवाल है. तो कई के लिए दुनिया में किसकी बदौलत कहां शांति आई, उसे समझने का प्रयास होगा. पर दुनिया के सबसे ताकतवर शख्स में से एक के लिए ये प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान का कुछ मामला हो गया है. बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और उनके नोबेल के लिए जी मचलने की हम कर रहे हैं. क्या ट्रंप नोबेल के इस अंजुमन से खाली हाथ लौटेंगे? जिस शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने ए से लेकर जेड तक, यानी सबकुछ किया, वो न मिलेगा तो क्या करेंगे?

दरअसल, ट्रंप, खुद को शांति-प्रिय योद्धा बताते हैं. उन्होंने कई बार दावा किया है कि वो कम से कम चार-पाँच नोबेल तो डिजर्व करते हैं. जून 2025 में उन्होंने गर्व से कहा था – मुझे अब तक पाँच नोबेल मिल जाने चाहिए थे. लेकिन जो लोग मुझसे डरते हैं, वो मुझे रोकते हैं. अपने दूसरे कार्यकाल में तो वो 8 जंग खत्म करवाने तक का दावा करते हैं. अब, अगर आज भी वो लिस्ट में नहीं आते, तो उनका रिएक्शन क्या हो सकता है? ये देखने वाली बात होगी. उनका जो रवैया रहा है, उससे कुछ इशारे उनके रिएक्शन के मिलते हैं. ऐसे ही कुछ इशारों की बात इस स्टोरी में करेंगे.

1. अमेरिका का अपमान वाला तर्क

डोनाल्ड ट्रंप पहले ही बयान दे चुके हैं कि अगर उन्हें नोबेल नहीं मिला, तो ये उनका नहीं बल्कि अमेरिका का अपमान माना जाएगा. संभावना है कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहें कि उनके नेतृत्व में दुनिया में शांति आई, कई युद्ध रोके गए, लेकिन पक्षपातपूर्ण लोग यह देखना ही नहीं चाहते. जानकारों का मानना है कि ट्रंप इस अस्वीकृति को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी भावनाओं से जोड़कर पेश करेंगे. जैसा वे पहले भी कई मौकों पर कर चुके हैं.

2. अमेरिका-नॉर्वे रिश्तों में ठंडापन

नॉर्वे के मीडिया में पहले से चर्चा है कि अगर ट्रंप को पुरस्कार नहीं मिला, तो अमेरिका और नॉर्वे के रिश्तों में असहजता आ सकती है. The Guardian की एक खबर के मुताबि नॉर्वे की संसद की एक सदस्य, किर्स्टी बर्गस्टो ने कहा है कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं, हमें हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए. अब ट्रंप की ये आदत तो जगजाहिर है कि वो जो भी उन्हें नापसंद हो या उनके खिलाफ कुछ कहे, उस पर वे खुलकर हमला बोल देते हैं. इसी वजह से ओस्लो में कई लोग असहज महसूस कर रहे हैं.

यही नहीं ट्रंप पहले भी अपने सहयोगी देशों को टैरिफ और आर्थिक पाबंदियों की धमकी दे चुके हैं, ऐसे में नोबेल घोषणा के बाद अगर वे भड़क उठे, तो नॉर्वे के लिए यह एक छोटा-सा कूटनीतिक सिरदर्द बन सकता है. भले ही नोबेल प्रक्रिया पर सरकार का कोई नियंत्रण न हो.

3. नोबेल कमिटी के ये 5 जज हो सकते हैं निशाने पर

अगर ट्रंप के नाम नोबेल नहीं हुआ तो नोबेल कमिटी के सदस्यों पर उनका तीखा हमला लगभग तय ही माना जा रहा है. नोबेल शांति समिति के पाँच सदस्य- जॉर्गन फ्रिडनेस, असले टोजे, ऐन एंगर, क्रिस्टिन क्लेमेट, और ग्राय लार्सन, पहले भी ट्रंप के बारे में अपने विचार स्पष्ट कर चुके हैं.

जैसे क्लेमेट ने ट्रंप को अमेरिकी लोकतंत्र को कमजोर करने वाला नेता बताया था, जबकि लार्सन ने महिलाओं और मानवाधिकारों पर उनके बयानों की आलोचना की थी. फ्रिडनेस ने भी संकेत दिया था कि समिति किसी भी राजनीतिक दबाव में निर्णय नहीं लेती. केवल असले टोजे ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने ट्रंप के प्रति कुछ नरम रुख दिखाया है. वे इस साल ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे.

4. नॉर्वे को वामपंथी राष्ट्र करार देना

ट्रंप का राजनीतिक इतिहास बताता है कि वे हार को सीधे तौर पर कभी स्वीकार नहीं करते. अगर उन्हें पुरस्कार नहीं मिला, तो वे संभवतः नोबेल कमिटी को पक्षपाती या राजनीतिक रूप से प्रेरित संस्था कह सकते हैं. वहीं ट्रंप के भाषणों में वैचारिक लेबल लगाना आम बात है. ऐसी स्थिति में यह संभव है कि वे नॉर्वे को लेफ्टिस्ट या लिबरल एजेंडा वाला देश बताएं. वे पहले भी कह चुके हैं कि ये पुरस्कार सिर्फ लिबरल को दिए जाते हैं.

5. साजिश का आरोप और रिग्ड सिस्टम की बात

अगर ट्रंप अपने पुराने पैटर्न पर चलते हैं, तो नोबेल न मिलने की स्थिति में वे साजिश का आरोप भी लगा सकते हैं. 2020 के अमेरिकी चुनावों की तरह वे दावा कर सकते हैं कि सिस्टम रिग्ड है और उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया. ऐसे बयान उनके राजनीतिक आधार को मजबूत रखने की रणनीति के रूप में देखे जाते हैं. जहाँ हर हार को अनुचित व्यवस्था का परिणाम बताया जाता है.

शांति का नोबेल नहीं मिलने पर डोनाल्ड ट्रंप क्या-क्या कर सकते हैं?

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