World News: कतर से ईरान तक मारे जा रहे बहाई समुदाय की कहानी, क्या है इस्लाम से कनेक्शन? – INA NEWS

World News: कतर से ईरान तक मारे जा रहे बहाई समुदाय की कहानी, क्या है इस्लाम से कनेक्शन? – INA NEWS

कतर और ईरान में बहाई धर्म के लोगों पर सरकार का दमन लगातार बढ़ता जा रहा है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इन देशों में बहाई समुदाय के लोगों को बिना किसी ठोस कारण के गिरफ्तार किया जा रहा है, उनकी संपत्तियां जब्त की जा रही हैं और उन्हें लंबी सजा दी जा रही है. यमन, बहरीन और मिस्र में भी बहाई समुदाय के हालात ऐसे ही हैं.

बहाई एक अल्पसंख्यक समुदाय है, जिसकी स्थापना 1860 के दशक में हुई थी. यह सभी धर्मों की एकता और इंसानियत में विश्वास करता है. मुस्लिम देशों में इस धर्म को संदेह की नजर से देखा जाता है, क्योंकि बहाई धर्म के लोग एक फारसी व्यक्ति को अपना पैगंबर मानते हैं, जबकि इस्लाम में पैगंबर मोहम्मद को आखिरी और सबसे बड़े पैगंबर माना जाता है.

कतर में क्या हो रहा है?

कतर सरकार बहाई लोगों को देश से निकाल रही है, उनके कब्रिस्तान को दोबारा बनाने नहीं दे रही और उनके शादी के प्रमाणपत्र को मान्यता नहीं दे रही. इसके अलावा बहाई नेताओं को उनके धर्म का पालन करने पर सजा दी जा रही है.

एक बड़ा मामला रेमी रोहानी का है, जो कतर में बहाई समुदाय के प्रमुख हैं. 71 साल के रोहानी को सोशल मीडिया पर बहाई त्योहारों की बधाई देने और बहाई विचारों के प्रचार के लिए 5 साल जेल की सजा दी गई है. कोर्ट का कहना है कि उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं पर सवाल खड़े किए.

रोहानी पर यह भी आरोप है कि उन्होंने बिना इजाजत पैसे इकट्ठे कर विदेश भेजे, जबकि यह बात पहले से सरकार को मालूम थी. रोहानी की बेटी ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं, उन्होंने इस फैसले को दुखद और चौंकाने वाला बताया.

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने भी कहा है कि कतर का यह कदम धार्मिक आजादी के खिलाफ है. कतर के संविधान में पूजा की आजादी की गारंटी दी गई है. इसके बावजूद बहाई समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है.

ईरान में हालात और भी खराब

ईरान में के बहाई लोगों को बिना किसी वजह के गिरफ्तार किया जा रहा है. उर्मिया में कैहान मगसूदी को जून से जेल में रखा गया है. शिराज में अर्मगान यजदानी की हिरासत बढ़ा दी गई है और रॉक्साना वोजदानी को दो साल के लिए घर में बंद करके रखा गया है.

किर्मान में 64 साल के शहराम फलाह को बिना किसी आरोप के पकड़ा गया. इस्फहान में सरकारी एजेंसियों ने 10 बहाई परिवारों के घरों और दुकानों पर छापे मारे. हमदन में 6 बहाई महिलाओं को मिलाकर 39 साल की सजा दी गई. तेहरान में बहाई कलाकार परिया मरांदीज पर सरकार का विरोध करने और धार्मिक अपमान के आरोप लगाए गए.

शिक्षा में भी भेदभाव

ईरान में बहाई छात्रों को विश्वविद्यालय में एडमिशन नहीं दिया जा रहा. वेबसाइट पर दिखाया गया कि उनका रिजल्ट रिव्यू किया जा रहा है. इससे वे आगे की पढ़ाई नहीं कर सके. पिछले साल भी 129 बहाई छात्रों को इसी तरह बाहर कर दिया गया था. सरकार की एक गुप्त नीति के तहत बहाई धर्म के छात्रों को पढ़ाई से रोका जा रहा है.

मानवाधिकार संगठनों की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय संगठन जैसे यूनाइटेड नेशंस, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि बहाई समुदाय पर इस तरह का अत्याचार धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है. ये घटनाएं दिखाती हैं कि कतर और ईरान में बहाई लोगों को केवल अपने धर्म की वजह से सजा दी जा रही है, जो इंसानियत के खिलाफ है.

कतर से ईरान तक मारे जा रहे बहाई समुदाय की कहानी, क्या है इस्लाम से कनेक्शन?

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