World News: इजराइली हमले का असली मास्टरमाइंड कौन? 2 साल पहले बना लिया गया था प्लान! – INA NEWS

World News: इजराइली हमले का असली मास्टरमाइंड कौन? 2 साल पहले बना लिया गया था प्लान! – INA NEWS

ईरान पर इजराइली हमले को पूरी दुनिया ने एक बड़ी सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा. हालांकि इसके पीछे जो असली मास्टरमाइंड था, वो फाइटर जेट नहीं, बल्कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद थी. ऑपरेशन लॉयन राइजिंग की असली ताकत मोसाद का वो प्लान था जो दो साल पहले ही तैयार कर लिया गया था. इसका मकसद था ईरान की परमाणु ताकत को तहस नहस करना, डिफेंस नेटवर्क को ध्वस्त करना और सेना को नेतृत्वविहीन बनाना. इस खुफिया ऑपरेशन की इतनी जबरदस्त तैयारी थी कि ईरानी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी.

मोसाद ने ईरान में तीन अलग-अलग कोवर्ट ऑपरेशन चलाए. पहला डिफेंस नेटवर्क को फेल करना, दूसरा सर्फेस टू एयर मिसाइलों को खत्म करना और तीसरा बैलिस्टिक मिसाइलों को जड़ से खत्म कर देना. इस काम के लिए एजेंट्स ने पहले से ही ईरानी सिस्टम में डिवाइस फिट कर दिए थे. जैसे ही इजराइली फाइटर जेट्स ने हमला शुरू किया. ईरान का पूरा एयर डिफेंस सिस्टम जाम हो गया. मिसाइलें लॉन्च तक नहीं हो सकीं और जो तैयार थीं, वो भी डमी बन गईं.

इंसानी नेटवर्क पर भारी पड़ा मोसाद

मोसाद ने सिर्फ मशीनों को ही नहीं, इंसानी नेटवर्क को भी नेस्तनाबूद किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के 20 टॉप मिलिट्री कमांडर और 6 न्यूक्लियर साइंटिस्ट मारे गए. इनमें IRGC के चीफ हुसैन सलामी, थलसेना प्रमुख मोहम्मद बाघेरी, वायुसेना चीफ आमिर अली हाज़ीज़ादेह और नौसेना प्रमुख तक शामिल थे. साथ ही परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख डॉ. फेरेदौन अब्बासी और मशहूर वैज्ञानिक मोहम्मद मेहदी तेहरांची को भी मार गिराया गया.

इजराइल की मोसाद का मकसद

मोसाद का मकसद था ईरानी सेना को नेतृत्वविहीन बनाना यानी पूरी तरह से अंधा बनाना. साथ ही उसका परमाणु कार्यक्रम ध्वस्त करना. इसके लिए इजराइली एजेंट्स ने न सिर्फ रडार और मिसाइल सिस्टम को तबाह किया, बल्कि टारगेटेड ड्रोन हमलों से कमांडर्स को उनके घर में ही मार दिया. कई वीडियो में साफ दिखाया गया कि एक अपार्टमेंट की सिर्फ एक दीवार ढही हुई है, बाकी इमारत जस की तस है यानि एकदम सटीक हमला.

ईरान अब इस हमले का जवाब देने की बात कर रहा है. IRGC ने एनिमेटेड वीडियो जारी कर इजराइल को खंडहर में बदलने की धमकी दी है. लेकिन हकीकत यह है कि जब हमला हुआ, तब ईरान कुछ नहीं कर सका. मोसाद ने न सिर्फ ईरान के डिफेंस सिस्टम को ठप कर दिया, बल्कि उसके जवाब देने की ताकत भी छीन ली. यही वजह है कि ईरान चाहकर भी कोई प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं दे पाया.

नेतन्याहू के इशारे को समझ न सका ईरान

इस ऑपरेशन से एक दिन पहले ही नेतन्याहू यहूदी पवित्र स्थल वेलिंग वॉल पहुंचे थे. ये एक संकेत था एक बड़े कदम की तैयारी का. और जब ऑपरेशन लॉयन राइजिंग अंजाम तक पहुंचा, तो दुनिया ने देखा कि कैसे मोसाद ने एक बार फिर साबित किया कि वो सिर्फ खुफिया नहीं, बल्कि रणनीति और साइबर वॉर का भी सबसे घातक खिलाड़ी है. इस ऑपरेशन के बाद मोसाद का नाम फिर दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी के तौर पर गूंज उठा है.

-टीवी9 ब्यूरो रिपोर्ट

इजराइली हमले का असली मास्टरमाइंड कौन? 2 साल पहले बना लिया गया था प्लान!

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