World News: क्यों पड़ी अमेरिका को परमाणु परीक्षण की जरूरत, कब तक हो सकता है धमाका? – INA NEWS


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि उन्होंने पेंटागन को तुरंत परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू करने का आदेश दिया है. अगर यह परीक्षण होता है, तो यह लगभग 33 साल बाद अमेरिका का पहला परमाणु परीक्षण होगा, क्योंकि पिछली बार अमेरिका ने 1992 में परमाणु हथियार का परीक्षण किया था.
इस परीक्षण की जरूरत क्यों है?
ट्रंप का कहना है कि रूस और चीन जैसे देश अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं, इसलिए अमेरिका को भी बराबरी के आधार पर ऐसा करना चाहिए, हालांकि 1990 के दशक के बाद अमेरिका, रूस और चीन में से किसी भी देश ने परमाणु हथियारों का परीक्षण नहीं किया है. चीन ने 1996 में परीक्षण किया था.
ट्रंप के बयान से ये साफ नहीं हुआ है कि वह परमाणु हथियारों की टेस्टिंग की बात कर रहे हैं या न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम हथियारों की बात कर रहे हैं. अमेरिका ने हाल ही में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल का टेस्ट किया है. सितंबर में US नेवी ने सबमरीन से ट्राइडेंट मिसाइल लॉन्चिंग के 4 परीक्षण किये थे.
कब तक परमाणु परीक्षण होगा?
अभी तक ये भी साफ नहीं हुआ है कि अमेरिका कितनी जल्दी परीक्षण कर सकता है. अगस्त में आई कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति के आदेश के बाद अमेरिका को न्यूक्लियर टेस्ट करने में 24 से 36 महीने लगेंगे. इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी और भारी खर्च की जरूरत होगी.
रूस और चीन के हालिया परमाणु परीक्षण
रूस ने हाल ही में परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बुरेवेस्तनिक क्रूज मिसाइल और टॉरपीडो पोसीडॉन का परीक्षण किया है. पोसीडॉन समुद्र में हजारों किलोमीटर तक जा सकता है और बड़े तटीय क्षेत्रों को तबाह कर सकता है. चीन ने सितंबर में बीजिंग में हुई मिलिट्री परेड में पहली बार अपने न्यूक्लियर ट्रायड सिस्टम का प्रदर्शन किया था. यह ऐसा सिस्टम है जमीन, समुद्र और हवा से परमाणु-सक्षम मिसाइलें दाग सकता है.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, रूस के पास सबसे ज्यादा करीब 5,500 और अमेरिका के पास लगभग 5000 परमाणु हथियार हैं. दुनिया के कुल परमाणु हथियारों का 90% सिर्फ इन्हीं दो देशों के पास है. पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास 1,000 परमाणु हथियार है.
क्या इससे नई आर्म्स रेस शुरू होगी?
ट्रंप ने वैश्विक मंचों पर खुद को शांति दूत के तौर पर पेश किया है. इसी आधार पर उन्होंने नोबेल पीस प्राइज की डिमांड भी रखी थी. वे शक्ति के माध्यम से शांति की नीति पर जोर दे रहे हैं. यानी मजबूत सैन्य ताकत के जरिए दुनिया में शांति बनाए रखना. ट्रंप से गुरुवार को पूछा गया कि क्या दुनिया अब ज्यादा खतरनाक परमाणु माहौल में प्रवेश कर रही है, तो उन्होंने कहा कि उनका मकसद तनाव कम करना है.
ट्रंप ने कहा कि वह दुनिया में परमाणु निरस्त्रीकरण देखना चाहता हूं. ट्रंप ने बताया कि अमेरिका रूस से इस मामले पर बातचीत कर रहा है और अगर समझौता होता है, तो इसमें चीन को भी शामिल किया जाएगा. इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका भी अपने परमाणु परीक्षण रोकने के वादे पर कायम रहेगा. अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरस्त्रीकरण और अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाएगा.
अमेरिका ने अब तक कितने परीक्षण किए हैं.
अमेरिका ने अब तक 1,054 परमाणु परीक्षण किए हैं, जिनमें 216 वायुमंडलीय, कुछ पानी के नीचे और 815 भूमिगत परीक्षण शामिल हैं. आखिरी परमाणु परीक्षण 23 सितंबर 1992 को हुआ था.
पहला परमाणु परीक्षण 16 जुलाई 1945 को न्यू मेक्सिको के अलामोर्डो में किया गया था. इसे ट्रिनिटी टेस्ट नाम दिया गया था. इस परीक्षण में प्लूटोनियम बम को 100 फीट ऊंचे टावर पर लगाकर सुबह 5:30 बजे विस्फोट किया गया. इससे 18.6 किलोटन ऊर्जा निकली. विस्फोट की आवाज बादल के गरजने जैसी थी. इस दौरान 40,000 फीट ऊंचाई तक मशरूम के आकार का धुआं उठा.
अमेरिका ने कौन सी परमाणु संधि की है
अमेरिका कई अंतरराष्ट्रीय परमाणु संधियों का हिस्सा है. NPT (नॉन प्रॉलिफरेशन ट्रीटी), जिस पर 191 देशों ने हस्ताक्षर किया है. कंप्रिहेंसिवन्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (1996), जिसे 183 देशों ने साइन किया, लेकिन अमेरिकी सीनेट ने इसे मंजूरी नहीं दी.
अगर अमेरिका ने सच में परमाणु परीक्षण शुरू कर दिया, तो रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान जैसे देश भी ऐसा कर सकते हैं. इससे दशकों से चला आ रहा वैश्विक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संतुलन टूट सकता है.
क्यों पड़ी अमेरिका को परमाणु परीक्षण की जरूरत, कब तक हो सकता है धमाका?
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