World News: चांद पर 2030 तक परमाणु रिएक्टर बनाने की तैयारी क्यों हो रही है? – INA NEWS


अगले 5 साल में यानी 2030 तक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा चांद पर एक न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने की तैयारी में है. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, नासा के एक्टिंग चीफ और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन के अधिकारी सीन डफी ने एजेंसी को ये काम तेजी से करने के निर्देश दिए हैं. इसका मकसद चांद पर इंसानों के लिए स्थायी बेस बनाना है.
सीन डफी ने नासा को एक चिट्ठी में इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा और मार्स मिशन के लिहाज से बेहद जरूरी बताया है. इसके साथ ही उन्होंने प्राइवेट कंपनियों से ऐसे न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए प्रस्ताव मांगे हैं जो कम से कम 100 किलोवॉट बिजली पैदा कर सके.
चांद पर न्यूक्लियर प्लांट बनाने की इतनी जल्दी क्यों
नासा के मुताबिक, चीन और रूस भी चांद पर न्यूक्लियर बेस बनाने की तैयारी में हैं. रिपोर्ट में ये आशंका जताई गई है कि ये देश चांद पर किसी खास इलाके को लेकर कीप आउट जोन घोषित कर सकते हैं, यानी वहां किसी और देश की एंट्री बैन कर सकते हैं. अभी हाल ही में चीन और रूस ने एलान किया है कि वे मिलकर 2035 तक चांद पर एक ऑटोमैटिक न्यूक्लियर पावर स्टेशन बनाएंगे.
चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर क्यों जरूरी?
BBC की एक खबर के मुताबिक चांद पर एक दिन धरती के हिसाब से करीब 28 दिन का होता है जिसमें 14 दिन तक सूरज की रोशनी रहती है और फिर 14 दिन अंधेरा. ऐसे में सोलर पावर पर लगातार निर्भर रहना संभव नहीं है. न्यूक्लियर रिएक्टर एक ऐसा विकल्प है जिससे 24×7 बिजली मिल सकती है, जो चांद पर इंसानी बस्ती बसाने और उसे चलाने के लिए जरूरी है.
पहले भी हो चुकी है ऐसी तैयारी
ये विचार नया नहीं है. 2022 में नासा ने तीन कंपनियों को $5 मिलियन के कॉन्ट्रैक्ट दिए थे ताकि वे चांद के लिए न्यूक्लियर रिएक्टर का डिजाइन तैयार करें. अब ट्रंप प्रशासन के अंतरिम नियुक्त प्रमुख डफी ने इस प्रोजेक्ट को और तेज करने का आदेश दिया है. जानकारों का मानना है कि अगर अच्छी खासी फंडिंग मिले तो 2030 तक चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर पहुंचाना तकनीकी रूप से संभव है.
चांद पर 2030 तक परमाणु रिएक्टर बनाने की तैयारी क्यों हो रही है?
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