World News: अमेरिका-सऊदी को छोड़ पुतिन को क्यों साधने में जुटे हैं सीरिया के अल-शरा? – INA NEWS

World News: अमेरिका-सऊदी को छोड़ पुतिन को क्यों साधने में जुटे हैं सीरिया के अल-शरा? – INA NEWS

सीरिया में नई सरकार बनने के बाद देश की विदेश नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल शरा अब न तो अमेरिका से और न ही सऊदी अरब से मदद मांग रहे हैं बल्कि इस बार संकट से निकलने के लिए उन्होंने सीधे रूस का रुख किया है.

रूसी अखबार कोमर्सांत की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अगस्त को मॉस्को में सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शबैानी ने वहां रह रहे सीरियाई समुदाय से मुलाकात की. इसी दौरान उन्होंने खुलासा किया कि दमिश्क ने रूस से इजराइल की सीमा के पास पहले जैसी सैन्य पुलिस गश्त फिर से शुरू करने की मांग की है.

आखिर रूस से क्यों मदद मांग रहा सीरिया?

सीरिया का मानना है कि गोलान हाइट्स के बफर जोन में रूसी सैन्य पुलिस की वापसी इजराइली दखलअंदाजी को काफी हद तक रोक सकती है. नई सरकार को भरोसा है कि रूस न केवल सीमाई इलाकों में स्थिरता बनाए रखेगा बल्कि सीरिया और इजराइल के बीच संपर्क के रास्ते भी खुला रखेगा. ये कदम सीरिया के लिए सिर्फ सुरक्षा का नहीं बल्कि कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने का भी तरीका माना जा रहा है.

बशर अल असद के पतन के बाद हटी रूसी सेना

रिपोर्ट में बताया गया है कि कई सालों तक रूसी सैन्य पुलिस इस बफर जोन में मौजूद रही थी. उनका काम वहां पर संघर्ष रोकना और अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत स्थिति को स्थिर बनाए रखना था. लेकिन करीब नौ महीने पहले, जब पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार गिर गई, तब रूस ने इन क्षेत्रों से अपनी सैन्य पुलिस हटा ली. इसके बाद से ही सीमा क्षेत्रों में इजराइली गतिविधियां बढ़ने लगीं, जिससे सीरिया की नई सरकार की चिंता और बढ़ गई.

लगातार चल रही है दोनों देश के बीच बातचीत

अब नई सरकार और रूस के बीच लगातार बातचीत हो रही है, जिसमें तार्टूस और लताकिया जैसे रणनीतिक ठिकानों पर रूसी मौजूदगी को लेकर भी चर्चा शामिल है. यह वार्ता सिर्फ सीमाई सुरक्षा पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसका मकसद रूस को सीरिया में एक दीर्घकालिक साझेदार के रूप में बनाए रखना भी है.

इजराइल को सीरिया का संदेश

कोमर्सांत की रिपोर्ट के अनुसार, इस मांग से सीरिया ने इज़राइल को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सीरियाई जमीन पर उसका लगातार मौजूद रहना नई सरकार को मंजूर नहीं है. हालांकि, रूस के साथ समझौते की गुंजाइश है, क्योंकि नई सरकार उसे क्षेत्रीय स्थिरता और शक्ति संतुलन के लिए अहम मानती है.

अमेरिका-सऊदी को छोड़ पुतिन को क्यों साधने में जुटे हैं सीरिया के अल-शरा?

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