World News: जेलेंस्की की कुर्सी पर क्यों मंडरा रहा है खतरा? भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे यूक्रेनी – INA NEWS

World News: जेलेंस्की की कुर्सी पर क्यों मंडरा रहा है खतरा? भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे यूक्रेनी – INA NEWS

यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य शहरों में इन दिनों हजारों लोग सड़कों पर हैं. हाथों में तख्तियां, नारों की गूंज और चेहरे पर नाराजगी साफ दिखती है. वजह? यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की ओर से लाया गया एक नया कानून, जिसने देश की भ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

22 जुलाई को संसद में तेजी से पास किए गए इस कानून को जेलेंस्की ने उसी दिन मंजूरी भी दे दी. इसके बाद ही देशभर में विरोध शुरू हो गया. आइए जानते हैं ये विवादित कानून है क्या, किन वजहों से जनता जेलेंस्की से नाराज है?

क्या है ये विवादित कानून

नए कानून के तहत यूक्रेन की नेशनल एंटी करप्शन ब्यूरो और स्पेशल एंटी करप्शन प्रॉसीक्यूटर ऑफिस को अभ सीधे अटॉर्नी जनरल के अधीन कर दिया गया है. ये वही पद है जिस पर नियुक्ति खुद राष्ट्रपति करते हैं. यानी अब इन एजेंसियों की स्वतंत्रता खतरे में हैं और यही बात जनता को रास नहीं आ रही है.

जेलेंस्की का क्या तर्क है? जनता क्यों नाराज

राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना है कि ये कदम रूस की अंदरूनी घुसपैठ को रोकने के लिए जरूरी था. उनका दावा है किभ्रष्टाचार विरोधी संस्थाओं में रूसी एजेंटों की मौजूदगी ने खतरा बढ़ा दिया है. मगर आलोचकों की राय अलग है. उनका मानना है कि कानून की आड़ में जेलेंस्की अपने करीबी साथियों के खिलाफ चल रही जांचों को रोकना चाहते हैं. खासकर पूर्व प्रधानमंत्री ओलेक्सी चेनिर्शोव जैसे नामों का जिक्र आ रहा है, जिन पर भ्रष्ट्राचार के आरोप हैं.

क्या जेलेंस्की की कुर्सी पर खतरा?

राष्ट्रपति की पार्टी ‘सर्वेंट ऑफ द पीपल’ को संसद में बहुमत है और युद्धकाल के चलते चुनावों पर भी रोक है. इसलिए सत्ता फिलहाल सुरक्षित लगती है. लेकिन जनता का विश्वास हिलता है, तो उसकी भरपाई आसान नहीं होती. एक सर्वे के मुताबिक जेलेंस्की की लोकप्रियता 65 फीसदी है जो पहले के मुकाबले कम जरूर हुई है पर अभी भी मजबूत मानी जाती है. शायद इसी कारण, जनता के गुस्से को देखते हुए जेलेंस्की ने तुरंत कानून में बदलाव का वादा भी कर दिया है.

भ्रष्टाचार से पूर्व राष्ट्रपति की कुर्सी छिन गई थी

यूक्रेन के इतिहास में भ्रष्टाचार हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. यही वजह थी कि 2013-14 में आंदोलन हुआ था, जिसने विक्टर यानुकोविच को सत्ता से बेदखल कर दिया था. अब जब यूक्रेन यूरोपियन यूनियन और नाटो जैसी संस्थाओं का हिस्सा बनने की कोशिश कर रहा है, तो भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई भी खबर देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है. यही कारण है कि यूरोपीय नेता भी इस मुद्दे पर जेलेंस्की से जवाब मांग रहे हैं.

जेलेंस्की की कुर्सी पर क्यों मंडरा रहा है खतरा? भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे यूक्रेनी

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