World News: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए सऊदी क्यों बन रहा ‘बिचौलिया’? – INA NEWS

World News: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए सऊदी क्यों बन रहा ‘बिचौलिया’? – INA NEWS

22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते एक बार फिर नाजुक मोड़ पर हैं. भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकियों को ज़िम्मेदार ठहराया और 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में एयरस्ट्राइक की. जवाब में 9 मई को पाकिस्तान ने भारत के कई नागरिक इलाकों पर ड्रोन हमले किए, जिन्हें भारत ने नाकाम कर दिया.

इस ताज़ा तनातनी ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पश्चिम एशिया को भी बेचैन कर दिया है. खाड़ी देश, खासकर सऊदी अरब, दोनों परमाणु शक्तियों के बीच इस बढ़ते तनाव को कम करने में जुट गए हैं. सवाल उठता है कि सऊदी आखिर क्यों इस झगड़े में ‘बिचौलिया’ बनने की कोशिश कर रहा है?

भारत-पाक के बीच दौड़ते सऊदी मंत्री, अचानक क्यों हुए एक्टिव?

8 मई को सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री अदेल अल-जुबैर अचानक भारत पहुंचे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की. अगले ही दिन वे इस्लामाबाद रवाना हो गए. सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनका दौरा भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने और संवाद की कोशिशों का हिस्सा था. सिर्फ सऊदी ही नहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची भी इसी हफ्ते दिल्ली और इस्लामाबाद गए. यह दिखाता है कि पश्चिम एशिया के देश दक्षिण एशिया में संभावित युद्ध को लेकर कितने गंभीर हैं.

भारत और पाकिस्तान दोनों से गहरे रिश्ते

सऊदी अरब की दिलचस्पी भारत-पाकिस्तान के मामलों में महज सामरिक नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आर्थिक और रणनीतिक हितों से है. भारत में सऊदी अरब का बड़ा निवेश है. दोनों देशों के बीच 2023-24 में 43 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार हुआ, जिसमें भारत ने 11.56 अरब डॉलर का निर्यात किया जबकि 31.42 अरब डॉलर का आयात किया. सऊदी अरब भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का एक अहम स्रोत है. भारत अपनी 14% कच्चे तेल की जरूरत सऊदी से पूरी करता है. वहीं, पाकिस्तान अपनी 30% जरूरत सऊदी से पूरी करता है.

पाकिस्तान पर सऊदी की पकड़

पाकिस्तान के साथ सऊदी व्यापार कम है, लेकिन वहां उसकी पकड़ कहीं ज्यादा मज़बूत है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कई बार आर्थिक संकट से उबारा है. 3 अरब डॉलर की सहायता राशि हो या तेल भुगतान में 1.2 अरब डॉलर की देरी की छूट. सऊदी का हाथ लगातार पाकिस्तान की पीठ पर रहा है. इतना ही नहीं, पाकिस्तान के कई अहम प्रोजेक्ट जैसे नीलम-झेलम हाइड्रोपावर और इस्लामाबाद की फेमस फैसल मस्जिद भी सऊदी फंडिंग से बनी हैं. भविष्य में ग्वादर पोर्ट पर रिफाइनरी लगाने के लिए भी सऊदी अरब ने 10 अरब डॉलर का वादा किया है, जो CPEC में उसकी बड़ी एंट्री होगी.

सऊदी को क्यों डर है आतंकवाद से?

पाकिस्तान पर सऊदी की चिंता सिर्फ आर्थिक नहीं है. सऊदी जानता है कि पाकिस्तान में पनप रहे कट्टरपंथी संगठन उसके लिए भी खतरा हैं. तालिबान की अफगानिस्तान में वापसी और पहले के अनुभवों से खाड़ी देशों ने सीखा है कि सिर्फ पैसे से नहीं, नीति से भी कट्टरपंथ पर काबू पाना जरूरी है. यही वजह है कि सऊदी अब धार्मिक सहिष्णुता, आतंकरोधी साझेदारी और सामाजिक सुधारों को तवज्जो दे रहा है। भारत के साथ उसकी बढ़ती सुरक्षा और खुफिया साझेदारी इसी दिशा में एक कदम है.

पहले भी मध्यस्थता की कोशिश कर चुका है सऊदी

न्यू योर्क टाइम्स की एक खबर के मुताबिक 2019 में जब भारत ने कश्मीर में आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान के भीतर एयरस्ट्राइक की, तब हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे. लेकिन ऐसे समय में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने संकट को शांत करने में अहम भूमिका निभाई. UAE के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायेद खुद इस्लामाबाद और नई दिल्ली पहुंचे, जबकि सऊदी अरब ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को एक ही महीने के भीतर मेहमान बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक इसके दो साल बाद, भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर लंबे समय से उपेक्षित संघर्षविराम का पालन करने का संयुक्त बयान जारी किया. इस अहम समझौते के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी थी. दरअसल, दुबई में UAE ने चुपचाप भारत और पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों के बीच बातचीत करवाई, जिससे यह बर्फ पिघलनी शुरू हुई.

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए सऊदी क्यों बन रहा ‘बिचौलिया’?

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