World News: अमेरिका, ईरान से समझौता करेगा या हवाई हमला? इन 2 लोगों की सलाह पर फैसला लेंगे ट्रंप – INA NEWS

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. कहा जा रहा है कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी ईरान पर हवाई हमले को लेकर अंतिम फैसला नहीं कर पाए हैं. उनके इस फैसले में दो खास लोगों की अहम भूमिका होगी. विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर. दोनों जिनेवा में होने वाली अहम बातचीत की अगुवाई करेंगे. ट्रंप इस बात पर फैसला करेंगे कि ईरान परमाणु समझौते पर गंभीर है या सिर्फ समय निकाल रहा है.

इस हफ्ते ईरान अपना नया प्रस्ताव देने वाला है. गुरुवार को जिनेवा में बातचीत का आखिरी दौर हो सकता है. अगर समझौता नहीं होता, तो ट्रंप पहले सीमित हवाई हमले पर विचार कर सकते हैं. अगर उससे भी बात नहीं बनी, तो बड़े हमले या यहां तक कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की दिशा में कदम उठाने पर भी विचार किया जा सकता है.

ट्रंप ने सैन्य विकल्पों की जानकारी ली

ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में कई बार सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग ली है. उनके प्रमुख सलाहकारों में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन, चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड शामिल हैं.

उपराष्ट्रपति वेंस ने हमले के पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क रखे हैं, लेकिन उन्होंने जनरल डैन केन से संभावित जोखिमों पर सवाल किए हैं. केन की चिंता यह है कि अमेरिका के पास एंटी-मिसाइल सिस्टम का भंडार सीमित है. पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब जवाबी हमलों को रोकने के लिए 30 पैट्रियट मिसाइलें दागनी पड़ी थीं.

ईरान परमाणु संवर्धन छोड़ने को तैयार नहीं

इस बार ईरान ने और कड़े जवाब की चेतावनी दी है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा है कि वे अमेरिकी युद्धपोत को डुबोने की क्षमता रखते हैं. बातचीत में मतभेद साफ हैं. विटकॉफ ने कहा कि ट्रंप चाहते हैं कि ईरान पूरी तरह परमाणु संवर्धन बंद करे. लेकिन ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कहा कि उनका देश संवर्धन पूरी तरह छोड़ने को तैयार नहीं है.

संभावित सैन्य कार्रवाई को देखते हुए अमेरिका ने 2003 के इराक युद्ध के बाद मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ी हवाई तैनाती की है. अमेरिकी विमानवाहक पोत USS गेराल्ड फोर्ड जल्द ही क्षेत्र में पहुंचेगा. इसके अलावा F-35, F-22 लड़ाकू विमान, बॉम्बर और फ्यूल भरने वाले विमान पहले से तैनात हैं. इससे ट्रंप के पास सीमित हमले से लेकर लंबी एयरस्ट्राइक तक के सभी विकल्प खुले हैं.

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अमेरिका, ईरान से समझौता करेगा या हवाई हमला? इन 2 लोगों की सलाह पर फैसला लेंगे ट्रंप


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