खबर शहर , संभल हिंसा के सौ गुनहगार: पत्थरबाजों और दंगाइयों के चेहरे पुलिस के किए उजागर, पोस्टर में दिख रहा है करतूत – INA

संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक हिंसा में शामिल 100 पत्थरबाजों के पोस्टर जारी किए गए हैं। इन पोस्टरों में ज्यादातर उपद्रवी पत्थर लिए और मुंह बांधे हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस ने बुधवार को बताया कि वीडियो, सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज की जांच जारी है।


4 महिलाएं समेत 27 गिरफ्तार 

पुलिस अब तक 27 उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है, जिनमें 4 महिलाएं शामिल हैं। एक महिला का पोस्टर भी जारी किया गया है, जो छत से पत्थर फेंकते हुए नजर आ रही है। यह महिला दीपासराय इलाके की है, जो सपा सांसद जियाउरर्हमान बर्क के निवास के पास का क्षेत्र है।


एडीजी बोले- जिनके हाथ में पत्थर दिखे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा

एडीजी बरेली जोन रमित शर्मा ने लोकनिर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में शांति समिति की बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्दोषों को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन जिनके हाथों में पत्थर दिखे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।


उलमा ने दिया अमन का भरोसा

एडीजी ने शहर के उलमा और जिम्मेदार लोगों से मुलाकात की। उन्होंने अपील की कि अपने क्षेत्रों में लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करें। उलमा ने आश्वासन दिया कि वे अमन का पैगाम फैलाएंगे और जनजीवन सामान्य करने में सहयोग करेंगे।


व्यापारियों को दुकानें खोलने के लिए प्रेरित किया जाएगा

एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि एडीजी ने उन व्यापारियों से संपर्क करने को कहा है, जिन्होंने बवाल के डर से अपनी दुकानें बंद कर रखी हैं। प्रयास किया जाएगा कि जल्द ही बाजार सामान्य रूप से खुल जाएं।


सुनियोजित हिंसा की जांच जारी

पुलिस ने खुलासा किया है कि पत्थरबाजों ने पहले सीसीटीवी कैमरे तोड़े और फिर हिंसा की। 11 वीडियो जारी किए गए हैं, जिनमें उपद्रवी कैमरों को नुकसान पहुंचाते और पत्थर फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं। सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज की मदद से पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है।


याचिका लगाने वाले वकील जैन बोले, मिलने लगी है धमकी

संभल हिंसा के मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता और याचिकाकर्ता विष्णु शंकर जैन ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, संभल के सपा सांसद, सपा के मीडिया सेल और ज्ञानवापी मस्जिद समिति के सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जैन ने कहा, “इन लोगों ने झूठा प्रचार किया है कि मैं जय श्री राम के नारे लगाते हुए भीड़ के साथ वहां पहुंचा, जिससे दंगा भड़का।


यह पूरी तरह से झूठा आरोप है। जैन ने अपनी सफाई में कहा कि वह सर्वे के दौरान प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ थे। सर्वे खत्म होने के बाद पुलिस ने उन्हें एक ऐसे रास्ते से वापस भेजा, जो हिंदू आबादी वाले क्षेत्र से गुजरता था। इस दौरान कुछ लोग नारेबाजी कर रहे थे।


उन्होंने स्पष्ट किया, “मैंने कोई नारा नहीं लगाया, लेकिन मुझे देखकर लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।” जैन ने दावा किया कि इस गलत जानकारी के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “इन धमकियों के लिए अखिलेश यादव, ओवैसी, सपा के मीडिया सेल, संभल के सपा सांसद और ज्ञानवापी मस्जिद समिति के सचिव जिम्मेदार हैं।”
 

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Credit By Amar Ujala

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