खबर शहर , Agra: कम्युनिटी मॉडल से चमके पार्क, स्थानीय लोगों ने खुद संभाली हरियाली और रखरखाव की जिम्मेदारी – INA

कई साल तक घर के सामने के पार्क में हरियाली और विकास के लिए नगर निगम, एडीए और प्रशासन के चक्कर काटे। मांग अनसुनी हुई तो सरकार के भरोसे न बैठकर खुद ही जिम्मेदारी संभाली और कम्युनिटी माॅडल की मिसाल बन गए। शहर में पर्यावरण के प्रहरियों ने सरकारी विभागों पर निर्भर रहने के उलट जनभागीदारी से पार्कों की सूरत बदल दी। सूने पड़े पार्कों को संवार कर उनकी रौनक बढ़ा दी। अब हर सुबह और शाम हजारों लोग पार्क में सैर, खेलकूद और कसरत के लिए आते हैं। संवारने के साथ इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी क्षेत्र के लोग उठा रहे हैं।

जयपुर हाउस, रामलीला पार्क

शहर में यह पार्क जनभागीदारी की ऐसी मिसाल है, जिसने आसपास की कॉलोनियों के लोगों को प्रेरित किया है। कभी इस मैदान पर रामलीला का मंचन होता था, लेकिन बाद में यहां जयपुर हाउस आवासीय वेलफेयर सोसायटी ने कॉलोनी के लोगों के साथ मिलकर इस पार्क को संवारने का जिम्मा उठाया। आरएसएस के विजय गोयल ने लोगों के सहयोग से पार्क में हरियाली विकसित की और बच्चों के लिए झूले और बेंच आदि लगवाईं। स्थानीय निवासियों की कमेटी पूरी तरह से इस पार्क के संचालन और देख-रेख का काम संभाल रही है। सोसायटी के अध्यक्ष अनिल वर्मा ने बताया कि पार्क के चारों ओर वॉकवे बनाया गया है, जहां सुबह-शाम को सैर कर सकते हैं। जैव विविधता के केंद्र के रूप में यहां हर प्रजाति के पौधे लगाए गए। सुरक्षा के लिए दो गार्ड तैनात किए गए हैं और सीसीटीवी से निगरानी रखी गई है। यहां फूल पत्ती तोड़ने पर जुर्माना है और हर परिवार सालाना दो हजार रुपये का शुल्क देता है। प्रवेश के लिए कार्ड की व्यवस्था की गई है ताकि अराजकतत्व दूर रहें।

जनक पार्क, वाणिज्य कर कार्यालय

एक ऐसी जगह, जहां कभी दुर्गंध और कचरा था, उसे स्थानीय लोगों ने बदलकर रख दिया। वाणिज्य कर कार्यालय, जयपुर हाउस के पास जनक पार्क महज पांच साल में क्षेत्र के लोगों ने संवार दिया। स्थानीय लोगों ने पार्क में फुलवारी और पौधे लगाए और बाउंडरी के बाद यहां प्रवेश की सीमित व्यवस्था कर दी। चारों ओर वॉकवे बनाकर बाउंडरी के किनारे रंग-बिरंगे फूलों वाले पौधे लगाए गए हैं, जो इस पार्क को अनूठा बनाते हैं। इस पार्क की देखरेख कर रहे संजय गोयल ने बताया कि कोविड के दौरान जब सब कुछ बंद था, तब इस पार्क को संवारने की मुहिम शुरू की गई। क्षेत्र के लोगों ने श्रमदान करके यहां की सूरत बदली है। इसका संचालन भी समाज के लोग ही करते हैं। बेंच, फुलवारी, लाइट, रखरखाव, पानी आदि का पूरा खर्च कमेटी ही उठाती है।

 


Credit By Amar Ujala

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