Technology, Meta AI Data Centre: 8 लाख घरों की बिजली खा जाएगा AI, जानिए मार्क जुकरबर्ग के मेगा प्रोजेक्ट की इनसाइड स्टोरी — INA

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की अंधी दौड़ में दुनिया की तमाम बड़ी टेक कंपनियां बेहिसाब पैसा झोंक रही हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि जिस एआई को हम चंद सेकंड में अपने सवाल हल करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, उसकी सांसें चलाने के लिए कितनी बिजली और पानी की बलि चढ़ती है? अब मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग एक ऐसा कदम उठाने जा रहे हैं, जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों और पर्यावरण प्रेमियों की गहरी चिंता में डाल दिया है। 

कनाडा में बनेगा Meta का पहला डेटा सेंटर

मेटा कनाडा में अपना अब तक का सबसे विशाल डेटा सेंटर स्थापित करने जा रहा है, जिस पर लगभग 760 अरब रुपये (9.17 अरब डॉलर) का भारी-भरकम खर्च आएगा। हैरानी की बात यह है कि इस इकलौते डेटा सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए इतनी बिजली की आवश्यकता होगी, जिससे आसानी से 8 लाख घरों को रोशन किया जा सकता है।

अल्बर्टा को क्यों चुना?

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत स्थित स्टर्जन काउंटी में बनने जा रहा यह मेटा का पहला कनाडाई और दुनिया भर में 33वां डेटा सेंटर होगा। इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत 1 गीगावाट बिजली क्षमता के साथ होगी। हालांकि, भविष्य में एआई की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए इसे 1.8 गीगावाट तक बढ़ाया जा सकेगा। दरअसल, मेटा अपने ‘लामा’ (Llama) जैसे अत्याधुनिक एआई मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रख रहा है। जुकरबर्ग ने इस प्रोजेक्ट के लिए अल्बर्टा को ही क्यों चुना, इसके पीछे एक बहुत ही सधी हुई व्यापारिक रणनीति है।

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इस इलाके में प्राकृतिक गैस के प्रचुर भंडार मौजूद हैं, जिससे बिजली उत्पादन बेहद सस्ता हो जाता है। इसके साथ ही, वहां की ठंडी जलवायु डेटा सेंटर के विशाल सर्वर रूम्स को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने में मदद करेगी, जिससे कूलिंग का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, अल्बर्टा की सरकार भी बड़ी टेक कंपनियों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की रियायतें दे रही है।

8 लाख घरों जितनी बिजली की जरूरत

इस मेगा प्रोजेक्ट में सबसे बड़ा सवाल बिजली की बेतहाशा खपत को लेकर उठ रहा है। डेटा सेंटर की सबसे बड़ी चर्चा इसकी बिजली खपत को लेकर है। अनुमान है कि यह अकेला प्रोजेक्ट करीब 8 लाख घरों के बराबर बिजली इस्तेमाल करेगा। Meta का कहना है कि वह मौजूदा पावर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालेगी। इसके लिए कंपनी ने पेंबिना पाइपलाइन के साथ साझेदारी की है, जो नया नेचुरल गैस पावर प्लांट लगाएगी। तब तक कैपिटल पावर कंपनी 250 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराएगी।

पर्यावरण पर क्या असर होगा?

AI डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। Meta का दावा है कि यहां क्लोज्ड लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम लगाया जाएगा, जो पानी को दोबारा इस्तेमाल करेगा। कंपनी के मुताबिक इस सुविधा में एक सामान्य गोल्फ कोर्स से भी कम पानी खर्च होगा। साथ ही Meta ने क्लीन और रिन्यूएबल एनर्जी में निवेश बढ़ाने की भी बात कही है।

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पर्यावरणविदों ने उठाए सवाल

मेटा के इन तमाम आश्वासनों के बावजूद, पर्यावरण से जुड़े संगठन इस प्रोजेक्ट के सख्त खिलाफ खड़े हैं। ग्रीनपीस कनाडा के कीथ स्टीवर्ट ने चेतावनी दी है कि जब तक एआई के इस्तेमाल और विस्तार पर कड़े मानवाधिकार और पर्यावरणीय कानून लागू नहीं हो जाते, तब तक ऐसे विशाल डेटा सेंटर्स के निर्माण पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

यह चिंता निराधार भी नहीं है, क्योंकि इसी दौड़ में शामिल अमेजन जैसी कंपनियों ने साल 2025 में अपने डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए लगभग 2.5 अरब गैलन पानी का इस्तेमाल किया था। यह आंकड़े साफ तौर पर इशारा कर रहे हैं कि एआई की दुनिया बाहर से जितनी सुनहरी और भविष्यवादी नजर आ रही है, अंदर से वह हमारी धरती और पर्यावरण के लिए उतनी ही बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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