Technology, नई टेक्नोलॉजी बनी मुसीबत: यूके ने एआई और सोशल मीडिया को लेकर दी चेतावनी, युवाओं पर मंडरा रहा कट्टरपंथ का साया — INA

नई टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों की जिंदगी आसान जरूर बना रहे हैं, लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है। ब्रिटेन के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि AI और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब केवल संवाद का माध्यम नहीं रहे, बल्कि आतंकवाद, जासूसी, फर्जी प्रचार और कट्टरपंथ फैलाने के बड़े हथियार बनते जा रहे हैं। उनका मानना है कि इस चुनौती से निपटना केवल पुलिस के बस की बात नहीं है और टेक कंपनियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
दुश्मन देशों से बढ़ रहा खतरा
ब्रिटिश अधिकारियों के मुताबिक, 2025 में ईरान से जुड़े 20 से ज्यादा मामलों की जांच की गई, जिनमें हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर अपराधों की साजिशें शामिल थीं। यह भी जांच की जा रही है कि यहूदी समुदाय से जुड़े कुछ स्थानों पर हुए आगजनी के मामलों का संबंध ईरान से है या नहीं।
वहीं रूस पर ब्रिटेन में लगातार निगरानी अभियान चलाने, लोगों को अपने पक्ष में करने और तोड़फोड़ की घटनाओं को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यूरोप में टेलीग्राम जैसे एप के जरिए लोगों की भर्ती कर आगजनी और तोड़फोड़ कराई गई। लंदन के एक वेयरहाउस में आग लगाने की साजिश में शामिल डायलन अर्ल को कथित तौर पर रूस समर्थित वैगनर ग्रुप (Wagner Group) ने टेलीग्राम के जरिए भर्ती किया था।
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इसी तरह हाल के महीनों में एक पत्रकार पर हमले, प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से जुड़े संपत्ति पर आगजनी और चीन के लिए जासूसी जैसे मामलों में भी अदालतें सजा सुना चुकी हैं।
किशोर भी बन रहे हैं शिकार
विकी इवांस ने बताया कि पुलिस ने ऐसे मामलों में 15 साल तक के किशोरों को भी गिरफ्तार किया है। उनके मुताबिक, इंटरनेट पर मौजूद कट्टरपंथी नेटवर्क युवाओं को खास तौर पर निशाना बना रहे हैं।
लॉरेंस टेलर ने 22 वर्षीय अल्फी कोलमैन का उदाहरण दिया, जिसे एक अंडरकवर एमआई-5 (MI5) अधिकारी से हथियार खरीदने की कोशिश के मामले में 13.5 साल की जेल हुई। जांच में सामने आया कि वह केवल 14 साल की उम्र में ही इंटरनेट के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हो गया था।
उन्होंने 18 वर्षीय एलिना बर्न्स का भी जिक्र किया, जिसे एक अजनबी पर कुल्हाड़ी से हमला करने के मामले में करीब 20 साल की सजा सुनाई गई। जांच में पता चला कि वह भी दक्षिणपंथी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थी।
ऑनलाइन बढ़ रहा कट्टरपंथ
काउंटर टेररिज्म प्रमुख लॉरेंस टेलर के मुताबिक, इस्लामी चरमपंथ अभी भी सबसे बड़ा खतरा है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े मामलों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से अप्रैल में ब्रिटेन का आतंकी खतरा स्तर ‘संतोषजनक’ से बढ़ाकर ‘गंभीर’ कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर नस्लवाद, महिलाओं के खिलाफ नफरत और समलैंगिक विरोधी सामग्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे पहले अस्वीकार्य माने जाने वाले विचार अब सामान्य लगने लगे हैं।
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गेमिंग और सोशल मीडिया के जरिए फैल रहा जहर
अधिकारियों के मुताबिक, चरमपंथी संगठन अब गेमिंग वीडियो, ऐतिहासिक तस्वीरों, संगीत और सोशल मीडिया कंटेंट को मिलाकर युवाओं को आकर्षित करते हैं। कई बार उन्हें वीडियो गेम जैसी हिंसक घटनाओं को असल जिंदगी में दोहराने के लिए उकसाया जाता है।
कुछ ऑनलाइन समूह लोगों के बीच प्रतियोगिता जैसी स्थिति बनाकर साइबर हमले, हिंसा, बाल यौन शोषण और यहां तक कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
टेक कंपनियों की जिम्मेदारी भी जरूरी
विकी इवांस ने कहा कि केवल कानून बनाना काफी नहीं है, क्योंकि सोशल मीडिया तेजी से बदल रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हानिकारक कंटेंट पर रोक लगाने के लिए टेक कंपनियों को भी अधिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उनके मुताबिक, ऑनलाइन कट्टरपंथ की ओर लोगों का झुकाव बहुत तेजी से बढ़ता है और समय रहते कार्रवाई नहीं होने पर इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।