नेपाल में दबिश, नेबुआ में लीपापोती! अब वर्दी पर उठे बड़े सवाल

🔴बिना अनुमति सीमा पार करने वाले दरोगा-सिपाही और अज्ञात में दर्ज मुकदमे ने खड़े किए सवाल पे सवाल

कुशीनगर। जिले के नेबुआ नौरंगिया पुलिस द्वारा पडोसी राष्ट्र नेपाल से चोरी की बाइक के साथ कथित आरोपी को पकड़कर लाए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस मामले में पुलिस बाइक के साथ आरोपी को पकडकर भारत लायी उसी मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पूरी कहानी ही बदल दी। अब पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं। सबसे बड़ा सवाल उन दरोगा और सिपाही की भूमिका पर उठ रहा है, जिनके बारे में चर्चा है कि वे अन्तर्राष्ट्रीय सीमा लांघकर नेपाल पहुंचे थे। यदि ऐसा है,तो क्या उन्होंने सक्षम अधिकारियों की अनुमति ली थी? और यदि नहीं, तो क्या यह विभागीय नियमों का उल्लंघन नहीं है ? ऐसे में सवाल यह है कि दरोगा और सिपाही पर अब तक क्या कार्रवाई हुई ? 

कहना ना होगा कि नेपाल में कथित आरोपी तक पहुंचने के लिए सीमा पार करने वाली नेबुआ नौरंगिया पुलिस अब खुद कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। सबब यह है कि मामले में बाइक बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी की चर्चाएं पूरे क्षेत्र में हो रहीं, बावजूद इसके इस मामले में नेबुआ नौरंगिया पुलिस ने कहानी का किरदार ही बदल दिया। मतलब यह है कि आरोपी एफआईआर रजिस्टर से गायब हो गया और मुकदमा अज्ञात के खिलाफ दर्ज हो गया। अब सवाल सिर्फ बाइक चोरी का नहीं, बल्कि उन दरोगा और सिपाही की जवाबदेही का भी है, जिन्होंने नियमों को दरकिनार कर नेपाल की धरती पर कदम रखा। सवाल यह है कि यदि आरोपी नेपाल में चोरी की बाइक के साथ पकड़ा गया था, तो फिर मुकदमा अज्ञात के खिलाफ क्यों दर्ज हुआ? और यदि आरोपी पकड़ा ही नहीं गया था, तो सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों में नेपाल पुलिस, नेबुआ पुलिस और बरामद बाइक का पूरा घटनाक्रम क्या बया कर रहा है। पीड़ित गोविंद गुप्ता का आरोप है कि बाइक चोरी होने के बाद जब पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही, तब परिजनों ने खुद नेपाल पहुंचकर चोरी की बाइक और कथित आरोपी को पकड़ा। सूचना पर नेबुआ नौरंगिया पुलिस भी नेपाल पहुंची और नेपाल पुलिस से बातचीत के बाद आरोपी व बाइक को भारत लेकर लाई। लेकिन थाने पहुंचते-पहुंचते पूरा खेल बदल गया।

🔴सीमा पार पकड़ा चोर, सीमा के इस पार बदल गई फाइल!

पीड़ित का आरोप है कि युगान्धर टाइम्स व लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्रों द्वारा इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद नेबुआ नौरंगिया पुलिस शुक्रवार की देर रात घर पहुंचकर पहले से तैयार तहरीर पर हस्ताक्षर कराए। तहरीर में न तो आरोपी का नाम था और न ही नेपाल में हुई बाइक बरामदगी का कोई जिक्र। अगले दिन पुलिस द्वारा अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर प्रेस नोट जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी का स्थान भी थाना क्षेत्र मे दिखाया गया है।यानी वीडियो कुछ और कहानी कह रहे हैं और सरकारी कागज कुछ और।

🔴वीडियो बनाम प्रेस नोट, कौन बोल रहा सच?

अब इस पूरे मामले में पुलिस के सामने कई असहज सवाल खड़े हैं, नेपाल में पकड़ा गया व्यक्ति आखिर कौन था? यदि वह आरोपी नहीं था तो पुलिस उसे भारत लेकर क्यों आई? यदि वही आरोपी था तो उसका नाम मुकदमे से कैसे व क्यो गायब हो गया? गिरफ्तारी नेपाल से हुई या थाना क्षेत्र से ? क्या पुलिस रिकॉर्ड में कहानी बदलने की कोशिश की गई? ऐसे तमाम सवाल है जो नेबुआ नौरंगिया पुलिस के लिए गले की फाॅस बन गयी है। 

🔴तस्वीरें कुछ और कह रही हैं, कागजात कुछ और!

क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में एक व्यक्ति पुलिसकर्मियों के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है और उसके पास बरामद बाइक भी नजर आ रही है। जबकि दो व्यक्ति सादे ड्रेस मे सोफा पर बैठकर मोबाइल मे कुछ निहार रहे है जिनकी पहचान नेबुआ नौरंगिया थाने के एक दरोगा व सिपाही के रूप मे बतायी जा रही है वही सामने कुर्सी पर नेपाल पुलिस बैठी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब बाइक चोर को नेबुआ नौरंगिया पुलिस नेपाल से पकड कर भारत लेकर आयी है तो  फिर मुकदमा अज्ञात के खिलाफ क्यों दर्ज किया गया? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

🔴नेपाल जाने की अनुमति थी या नहीं?

पूरे मामले में एक और अहम सवाल नेपाल पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों को लेकर उठ रहा है। चर्चा है कि पुलिस टीम नेपाल गई थी और वहां आरोपी से पूछताछ भी की , जैसा कि वायरल वीडियो व फोटो मे साफ दिख रहा है तो क्या उन पुलिसकर्मियों ने इसके लिए विभागीय अनुमति ली थी?यदि अनुमति नहीं थी तो यह अपने आप में जांच का विषय है।

🔴साक्ष्य होने का दावा, जांच की मांग तेज

पीड़ित का कहना है कि उसके पास नेपाल में आरोपी के पकड़े जाने से लेकर भारत लाने तक के वीडियो और फोटो सुरक्षित हैं। पीड़ित ने मुख्यमंत्री, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और पुलिस अधीक्षक को शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। विधि विशेषज्ञो का कहना है कि यह मामला अब सिर्फ एक बाइक चोरी तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि क्या पुलिस रिकॉर्ड में घटनाओं का स्वरूप बदला गया? क्या किसी को बचाने या किसी तथ्य को छिपाने की कोशिश की गयी? और सबसे अहम सवाल यदि पीड़ित के दावे सही हैं, तो थाने पहुंचते ही आरोपी आखिर “अज्ञात” कैसे बन गया ? सच चाहे जो भी हो, लेकिन वायरल वीडियो और पुलिस की आधिकारिक कहानी मे तमाम झोल है।, जो निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा।

🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य 

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