सीता नगर में बजरंग दल का चिकित्सा शिविर और पर्यावरण बचाने की कवायद

नमस्कार। आमतौर पर जब भी किसी संगठन का नाम आता है, तो टीवी और अखबारों की सुर्खियों में अक्सर उनकी राजनीतिक या उग्र छवि ही परोसी जाती है। लेकिन जब वही संगठन गलियों में उतरकर किसी बुजुर्ग का ब्लड प्रेशर नाप रहा हो या तपती धूप में पेड़ लगा रहा हो, तो यह दृश्य थोड़ा ठहरकर देखने वाला होता है। आगरा के सीता नगर में बजरंग दल द्वारा लगाया गया चिकित्सा शिविर इसी बात की गवाही देता है कि समाज से जुड़ने का असली रास्ता नारों से नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर सेवा करने से होकर गुजरता है।
यह कोई अचानक हुआ आयोजन नहीं था। बजरंग दल के विभाग संयोजक योगी ठाकुर के मुताबिक, पूरे देश में हर साल जुलाई के महीने में ‘सेवा सप्ताह’ मनाया जाता है। इसी कड़ी में, रामबाग के विवेकानंद प्रखण्ड के सीता नगर में एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जहां क्षेत्रीय लोगों ने आकर अपनी जांच करवाई। बीपी की मशीनें खुलीं, स्वास्थ्य का हाल पूछा गया और दर्जनों लोगों को मुफ्त परामर्श और दवाइयां दी गईं।
बात सिर्फ इंसानी सेहत तक सीमित नहीं रही। लगातार बढ़ रहे तापमान और झुलसाती गर्मी को देखते हुए, चीनी रोजा के पास कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के तहत वृक्षारोपण भी किया। इस पूरी कवायद में जिला सह मंत्री लवकुश, जिला सह संयोजक नमित चौहान, दुर्गा वाहिनी की जिला संयोजिका पिंकी शर्मा, प्रखण्ड मंत्री जय वर्मा, सुरेश, सरसिज चौहान, ललित, राहुल, लवलेश और अंकुश जैसे तमाम कार्यकर्ता मुस्तैद नजर आए।
इस खबर के निहितार्थ को समझना जरूरी है। जब नदियां प्रदूषित हो रही हैं और तापमान हर साल नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है, तब किसी भी संगठन का पर्यावरण और स्वास्थ्य की तरफ ध्यान जाना एक सकारात्मक पहल है। योगी ठाकुर का यह बयान कि वे नदियों की सफाई और जरूरतमंदों को दवा पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं, यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को समाज की बुनियादी समस्याओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह एक आशावादी तस्वीर है, जहां संगठन की ऊर्जा का इस्तेमाल समाज के निर्माण और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहा है। जब युवा कार्यकर्ता पेड़ लगाने और दवा बांटने के लिए आगे आते हैं, तो यह समाज में एक भरोसा पैदा करता है।
लेकिन जरा रुकिए और सोचिए। क्या हमारे देश का सरकारी स्वास्थ्य ढांचा इतना लाचार हो गया है कि एक आम नागरिक को अपना ब्लड प्रेशर नपवाने और बुनियादी दवाइयों के लिए इन शिविरों की बाट जोहनी पड़ती है? यह बहुत अच्छी बात है कि बजरंग दल ने दवाइयां बांटीं, लेकिन क्या यह सिस्टम की उस नाकामी पर पर्दा नहीं डालता, जहां मोहल्लों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अक्सर या तो बंद मिलते हैं या वहां डॉक्टर नदारद होते हैं?
और एक सवाल पर्यावरण पर भी है—क्या जुलाई के एक हफ्ते में लगाए गए ये पौधे पूरे साल सींचे जाएंगे, या अगली जुलाई तक ये भी हमारे सिस्टम की तरह सूख जाएंगे? नदियों की सफाई का जिम्मा क्या सिर्फ एक ‘सेवा सप्ताह’ में पूरा हो सकता है, जबकि सरकारें करोड़ों का बजट बहाकर भी उन्हें आज तक साफ नहीं कर पाई हैं?
बहरहाल, सीता नगर के जिन दर्जनों लोगों को इस शिविर से राहत मिली है, उनके लिए ये सवाल शायद उतने मायने नहीं रखते। उनके लिए वह दवा जरूरी थी, जो उन्हें समय पर मिल गई। अगर यह सेवा सप्ताह केवल एक रस्म अदायगी नहीं है और यह सेवा का संकल्प साल भर बना रहता है, तो यह समाज के लिए एक बेहद सुखद संकेत है। संगठनों को यह समझना होगा कि उनकी असली ताकत और पहचान विवादों में नहीं, बल्कि ऐसे ही रचनात्मक और जनहितैषी कार्यों में है। उम्मीद की जानी चाहिए कि जो पौधे चीनी रोजा के पास रोपे गए हैं, वे बड़े होकर घनी छांव देंगे और यह सेवा का सिलसिला महज एक हफ्ते तक सिमट कर नहीं रह जाएगा।