एटा जिले के मकसूदपुर गांव में मंगलवार देर रात उस समय अफरातफरी मच गई, जब पास की सिंचाई नहर से निकलकर करीब 9 फीट लंबा मगरमच्छ आबादी में पहुंच गया। मगरमच्छ को गांव की गलियों में घूमता देख ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम रात करीब दो बजे मौके पर पहुंची और कई घंटे चले अभियान के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू टीम ने विशेष उपकरणों की मदद से मगरमच्छ को बिना किसी नुकसान के काबू में किया। इसके बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छों की आवाजाही बढ़ जाती है और वे कई बार नहरों के रास्ते आबादी वाले इलाकों में पहुंच जाते हैं। वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के निदेशक बैजू राज एम.वी. ने बताया कि मानसून में इस तरह की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि मगरमच्छ दिखने पर उसे परेशान न करें और तुरंत हेल्पलाइन +91-99171 09666 या वन विभाग को सूचना दें।
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मगरमच्छ को मिला है सर्वोच्च कानूनी संरक्षण
मगरमच्छ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति है। संस्था की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि अनुसार बारिश के मौसम में नदियां, नहरें और अन्य जलमार्ग आपस में जुड़ जाने से मगरमच्छ कई बार अपने प्राकृतिक आवास से भटककर गांवों तक पहुंच जाते हैं।
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