द्वारका में बनेगा अत्याधुनिक डॉग शेल्टर:एलजी ने रखी आधारशिला, कहा- पीपीपी मॉडल से बनेगा शेल्टर- INA NEWS

दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टी.एस. संधू ने मंगलवार को द्वारका सेक्टर-29 में अत्याधुनिक डॉग शेल्टर की आधारशिला रखी। इस मौके पर सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, विधायक कैलाश गहलोत, एमसीडी के मेयर प्रवेश वाही, आयुक्त संजीव खिरवार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। करीब 6,050 वर्गमीटर में बनने वाला यह शेल्टर आवारा कुत्तों के लिए आश्रय, इलाज, देखभाल और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। एलजी ने कहा परियोजना का निर्माण जीएमआर वरलक्ष्मी फाउंडेशन द्वारा अपनी सीएसआर पहल के तहत कराया जाएगा और इस पर एमसीडी का कोई खर्च नहीं आएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शेल्टर के संचालन में पशु चिकित्सकों, पशु कल्याण संगठनों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), डॉग लवर्स और अन्य विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इसका संचालन वैज्ञानिक और मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप हो। हालांकि, इस परियोजना को लेकर पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है। पशु प्रेमी राशिम शर्मा का कहना है कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या 8 से 10 लाख के बीच आंकी जाती है। ऐसे में डॉग डिटेंशन सेंटर बनाने के बजाय पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्रों और 24 घंटे संचालित पशु अस्पतालों का विस्तार अधिक प्रभावी कदम होगा। उनका दावा है कि सीमित संख्या में कुत्तों को शेल्टर में रखने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। पशु अधिकार कार्यकर्ता निमिषा भगत ने भी परियोजना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह पहल इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े विवादों के बाद की गई है। उनका कहना है कि एबीसी नियम, 2023 के तहत स्वस्थ सामुदायिक कुत्तों को उनके मूल स्थान से स्थायी रूप से हटाना नियमों की भावना के अनुरूप नहीं माना जाता। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि बड़ी संख्या में कुत्तों को एक स्थान पर रखा जाता है तो संक्रामक पशु रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। उनका सुझाव है कि आश्रय केंद्रों के साथ-साथ नसबंदी, टीकाकरण और समुदाय आधारित प्रबंधन को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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