यूपी – Allahabad High Court : लंबित आपराधिक मुकदमे के आधार पर चरित्र प्रमाणपत्र से इन्कार करना गलत – INA

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर किसी का चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने से इन्कार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक किसी व्यक्ति को सक्षम न्यायालय दोषी करार नहीं देता, तब तक लंबित मुकदमे को उसके चरित्र पर प्रतिकूल टिप्पणी का आधार नहीं बनाया जा सकता।


इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने जालौन निवासी भरत लाल गुप्ता की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही डीएम का आदेश रद्द कर निर्धारित प्रारूप पर तीन सप्ताह के भीतर याची का चरित्र प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया है।

याची के चरित्र प्रमाणपत्र के नवीनीकरण की अर्जी डीएम ने एक नवंबर 2021 को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उसके खिलाफ मारपीट और गालीगलौज के आरोप में 2018 का मुकदमा लंबित है। कोर्ट ने अवतार सिंह के मामले में दिए गए सुप्रीम आदेश का हवाला दिया। कहा कि यदि अभ्यर्थी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की सही जानकारी दी है और कोई तथ्य नहीं छिपाया है तो सक्षम प्राधिकारी को मामले की प्रकृति, गंभीरता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। केवल मुकदमे की लंबित स्थिति आवेदन अस्वीकार करने का आधार नहीं हो सकती। 


Credit By Amar Ujala

Back to top button