Sport : एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत का पहला एशियाई स्वर्ण, 19 साल की अरिहा पांगाम्बम ने रचा इतिहास #INA

Ariha Pangambam Won Gold In Aerobic Gymnastics: भारत के खेल इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. जिस खेल को देश में क्रिकेट, हॉकी या ओलंपिक जिम्नास्टिक्स के मुकाबले कभी बराबर की पहचान नहीं मिली, उसी एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत की एक युवा खिलाड़ी ने एशिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. अरिहा पांगाम्बम ने एशियाई एरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में वरिष्ठ महिला व्यक्तिगत वर्ग का स्वर्ण पदक जीत लिया है. इस स्पर्धा में एशियाई चैंपियनशिप का स्वर्ण जीतने वाली वह पहली भारतीय हैं.
फिलीपींस में हुए मुकाबले के फाइनल में अरिहा ने 19.100 अंक हासिल किए. उनके प्रदर्शन में कलात्मकता के 8.650, निष्पादन के 7.600 और कठिनाई के 2.850 अंक शामिल रहे. स्कोर से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इस बार भारतीय तिरंगा उस मंच के सबसे ऊपर पहुंचा, जहां इससे पहले इस स्पर्धा में भारत के नाम स्वर्ण नहीं था.
एक स्वर्ण, एक कांस्य… भारत की झोली में दो पदक
भारत के लिए चैंपियनशिप सिर्फ अरिहा के स्वर्ण तक सीमित नहीं रही. वरिष्ठ एयरो स्टेप में भारतीय टीम ने कांस्य पदक भी अपने नाम किया. यानी इस बार एशियाई चैंपियनशिप से भारत के खाते में एक स्वर्ण और एक कांस्य आया है.
एरोबिक जिम्नास्टिक्स में खिलाड़ियों को बेहद तेज गतिविधियों, लचीलेपन, संतुलन, ताकत और तालमेल को एक साथ साधना पड़ता है। कुछ ही सेकंड के प्रदर्शन में छोटी सी गलती भी पूरे अंक बदल सकती है। ऐसे में अरिहा का प्रदर्शन और उसके साथ टीम का कांस्य भारतीय जिम्नास्टिक्स के लिए खास मायने रखता है।
22 YEAR OLD CREATES HISTORY FOR INDIAN AEROBIC GYMNASTICS! 🤯🔥
Manipur’s Ariha Pangambam becomes the first-ever Indian . win Gold in the Senior Women’s Individual event at the Asian Aerobic Gymnastics Championships 🏅
WOOOAH, WELL DONE GIRL!!!! 🇮🇳❤️ pic.twitter.com/WtHKG24d6R
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 7, 2026
“यह सिर्फ एक पदक नहीं, एक नई शुरुआत है”
भारतीय दल के प्रमुख इंद्रजीत सिंह राठौर ने इस उपलब्धि को भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक्स के लिए ऐतिहासिक बताया। हमारा चैनल से साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि वरिष्ठ महिला व्यक्तिगत वर्ग में भारत का पहला स्वर्ण और वरिष्ठ एयरो स्टेप में कांस्य पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है.
राठौर ने अरिहा के प्रदर्शन को खास तौर पर रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने जिस आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ प्रदर्शन किया, वह देश के युवा जिम्नास्टों को प्रेरित कर सकता है. उन्होंने इस सफलता का श्रेय सिर्फ खिलाड़ियों को नहीं, बल्कि प्रशिक्षकों, निर्णायकों और सहयोगी दल की सामूहिक मेहनत को भी दिया. उनका कहना है कि वरिष्ठ एयरो स्टेप में कांस्य ने भी यह दिखाया है कि भारतीय खिलाड़ी अब एशिया के शीर्ष स्तर पर मुकाबला करने की क्षमता रखते हैं.
अरिहा की जीत का मतलब सिर्फ एक स्वर्ण पदक से कहीं ज्यादा
भारत में एरोबिक जिम्नास्टिक्स को लेकर अभी वैसी पहचान नहीं है जैसी दूसरे लोकप्रिय खेलों को हासिल है. ऐसे में अरिहा का एशियाई चैंपियनशिप में सबसे ऊपर पहुंचना इस खेल की ओर नई नजर से देखने की वजह भी बन सकता है. इंद्रजीत सिंह राठौर के मुताबिक, यह उपलब्धि अंतिम पड़ाव नहीं है.
उनके मुताबिक यह एक नई यात्रा की शुरुआत है और उन्हें उम्मीद है कि भारतीय एरोबिक जिम्नास्टिक्स आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करेगी. अरिहा पांगाम्बम के लिए यह एक व्यक्तिगत उपलब्धि जरूर है, लेकिन भारतीय खेल के लिए इसका अर्थ बड़ा है. एशियाई चैंपियनशिप में पहली बार इस वर्ग में स्वर्ण जीतकर उन्होंने यह दिखाया है कि भारतीय खिलाड़ियों की पहुंच सिर्फ पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है. एक नया खेल, एक नया नाम और भारत के खाते में एक ऐतिहासिक स्वर्ण, अरिहा पांगाम्बम ने देश को गर्व करने का एक और मौका दिया है.
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एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत का पहला एशियाई स्वर्ण, 19 साल की अरिहा पांगाम्बम ने रचा इतिहास
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