Technology, Claude के AI कंटेंट पर लगेगा इनविजिबल वॉटरमार्क: एडिटिंग से नहीं होगा गायब; Anthropic ने समझाया पूरा सिस्टम — INA

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में दिग्गज एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) ने एक बड़ा कदम उठाया गया है। एंथ्रोपिक ने शुक्रवार को एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए इस बात से पर्दा उठाया है कि उसके लोकप्रिय चैटबॉट Claude द्वारा जनरेट किए गए टेक्स्ट में नया वॉटरमार्क सिस्टम कैसे काम करेगा। हाल ही में कंपनी ने यूरोपीय यूनियन के ट्रांसपेरेंसी कोड का पालन करते हुए इस वाटरमार्किंग सिस्टम को लागू करने का एलान किया था। इस फैसले के बाद खबर आई कि कुछ आम यूजर्स वॉटरमार्क से नाराज होकर Claude का सब्सक्रिप्शन छोड़ रहे हैं। कई लोगों के मन में यह सवाल था कि क्या इससे जनरेटेड कंटेंट की क्वालिटी खराब हो जाएगी या फिर इसे चालाकी से छिपाया जा सकेगा। अब कंपनी ने इन सभी शंकाओं का विस्तार से जवाब दिया है।


कैसे काम करता है एआई वॉटरमार्क सिस्टम?


  • एंथ्रोपिक के मुताबिक Claude टेक्स्ट तैयार करते समय उन जगहों पर वॉटरमार्क पैटर्न बना सकता है, जहां एक जैसे अर्थ वाले कई शब्दों में से किसी एक को चुनने की गुंजाइश होती है। उदाहरण के लिए मौसम का वर्णन करते समय ‘ओवरकास्ट’ या ‘ग्रे’ जैसे शब्दों में से चयन किया जा सकता है।

  • यह पैटर्न आम यूजर्स को दिखाई नहीं देगा। लेकिन जिनके पास इसे डिकोड करने की खास चाबी (Key) होगी, वे आसानी से एआई के कंटेंट को पहचान सकेंगे।। कंपनी का दावा है कि इससे Claude के जवाब की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी और वॉटरमार्क वाला टेक्स्ट सामान्य टेक्स्ट जैसा ही दिखाई देगा।

  • इस तकनीक के लिए एंथ्रोपिक असल में गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) द्वारा साल 2024 में पेश किए गए SynthID तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इसके साथ ही, भविष्य में वाटरमार्क का पता लगाने के लिए एक खास एपीआई (API) भी रिलीज किया जाएगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सिस्टम बाजार में मौजूद पैंग्राम (Pangram) जैसी कंपनियों के टूल्स से बिल्कुल अलग है, जो सिर्फ वाक्यों की बनावट या भाषा के तरीके को देखकर एआई पकड़ने का दावा करते हैं।

क्या एडिटिंग के जरिए हटाया जा सकेगा वॉटरमार्क?


  • यूजर्स के बीच यह सवाल सबसे ज्यादा उठ रहा है कि क्या टेक्स्ट को थोड़ा बहुत बदलकर वॉटरमार्क को हटाया जा सकता है। एंथ्रोपिक ने साफ किया है कि हल्की-फुल्की एडिटिंग करने से वॉटरमार्क पूरी तरह खत्म नहीं होगा। हालांकि, अगर कोई यूजर हर एक शब्द को बदलकर टेक्स्ट को पूरी तरह से दोबारा लिख देता है, तो यह सुराग मिट सकता है। लेकिन कंपनी का मानना है कि ऐसी स्थिति में उस लेख को एआई-जनरेटेड कहना ही गलत होगा।

  • वहीं, अगर किसी इंसान ने खुद कोई लेख लिखा है और Claude का इस्तेमाल सिर्फ प्रूफरीडिंग या मामूली सुधार के लिए किया है, तो उस स्थिति में वाटरमार्क के पकड़ में आने की संभावना बेहद कम होगी, क्योंकि ज्यादातर शब्द इंसान ने ही लिखा है।

प्रोग्रामर्स और कोडिंग पर क्या होगा इसका असर?

जो सॉफ्टवेयर डेवलपर्स कोडिंग के लिए Claude का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए यह राहत की खबर है। एंथ्रोपिक ने स्पष्ट किया है कि कंप्यूटर कोड पर इस वाटरमार्क का असर न के बराबर होगा। इसकी वजह यह है कि कोड को सही ढंग से काम करने के लिए सटीक निर्देशों की जरूरत होती है और वहां अलग-अलग शब्दों को चुनने की आजादी नहीं होती। वाटरमार्क का इस्तेमाल केवल कोड के अंदर दिए जाने वाले कमेंट्स जैसे हिस्सों में ही किया जा सकेगा, जिससे असल कोडिंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

फैसले से नाराज यूजर्स ने कैंसिल किए सब्सक्रिप्शन


  • पारदर्शिता के नाम पर उठाए गए इस कदम से हर कोई खुश नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (Reddit) पर यूजर्स इसे अपने खिलाफ एक बड़ी साजिश करार दे रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का तर्क है कि वाटरमार्क का विरोध सिर्फ वही करेगा जिसे झूठ फैलाना हो।

  • बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्स (X) पर दर्जनों यूजर्स ने नाराजगी जताते हुए अपने Claude सब्सक्रिप्शन रद्द करने का दावा किया है। हालांकि, एंथ्रोपिक ने यह भी याद दिलाया है कि आने वाले समय में Claude अकेला ऐसा चैटबॉट नहीं होगा जिसमें वाटरमार्क मिलेगा। बाजार के अन्य प्रमुख एआई डेवलपर्स भी ट्रांसपेरेंसी कोड के तहत अपने मॉडल्स में ऐसा ही वाटरमार्क सिस्टम लागू कर सकते हैं।

Source link

Back to top button