Sport : गोल्ड जीतकर अरिहा ने रचा इतिहास… टैलेंट है, सुविधाएं नहीं! एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत को पहली बार एशियन गोल्ड #INA

Ariha Pengambam: फिलीपींस में हुए एशियन गेम्स में मणिपुर की अरिहा पेनगम्बम ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. अरिहा ने एरोबिक जिम्नास्टिक्स की उस कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता… जिसमें इससे पहले भारत कभी मेडल नहीं जीत पाया था. भारत के लिए ये सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं… बल्कि उस खेल की पहचान की शुरुआत है… जिसे देश में बहुत कम लोग जानते हैं. लेकिन अरिहा के लिए गोल्ड मेडल तक का ये सफर कितना चुनौतीपूर्ण था पढ़िए हमारी इस खास रिपोर्ट में… 

गोल्ड मेडल जीतकर रचा इतिहास

फिलीपींस एशियन गेम्स भारत की बेटी अरिहा पेनगम्बम ने ऐसा प्रदर्शन किया कि इतिहास बन गया. एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत को पहली बार एशियन स्तर पर गोल्ड मेडल मिला और ये सिर्फ अरिहा की जीत नहीं थी, बल्कि उस खेल की जीत थी… जिसे भारत में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं और जैसे ही गोल्ड मेडल की घोषणा हुई… अरिहा की मेहनत का सबसे बड़ा ईनाम उनके सामने था.

आसान नहीं था गोल्ड का सफर

अरिहा पेनगम्बम के लिए इस गोल्ड तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था. अरिहा ने बहुत कम उम्र से इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. सिर्फ 10 साल की उम्र में पहला गोल्ड मेडल जीतने वाली अरिहा अब तक 15 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. बड़ा सवाल ये है कि जब भारत के खिलाड़ियों में इतना टैलेंट है… तो आज तक भारत को एरोबिक्स जिमनास्टिक्स की श्रेणी में गोल्ड मेडल क्यों नहीं मिला… जिसका जवाब खुद अरिहा ने दिया… 

आर्थिक तंगी और सुविधा के अभाव में प्रैक्टिस छोड़ देते हैं कई खिलाड़ी

इंडियन टीम के डेलिगेशन हेड इंद्रजीत सिंह राठौड़ के मुताबिक… इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में जिस तरह के फ्लोर और पोडियम पर खिलाड़ी प्रदर्शन करते हैं… भारत में वैसी सुविधाएं बेहद सीमित हैं. जहां इंटरनेशनल स्तर पर वुडन फ्लोरिंग वाले पोडियम पर खिलाड़ी अभ्यास और मुकाबला करते हैं… वहीं भारत में खिलाड़ियों को कई जगह रबर मैट पर ही प्रैक्टिस करनी पड़ती है.

लेकिन अरिहा जैसे और भी बहुत से खिलाड़ी हैं जो आर्थिक तंगी और सही इन्फ्रा ना मिलने के कारण बीच में ही प्रैक्टिस छोड़ देते हैं. खुद अरिहा ने बताया कि उनकी अपनी दो जूनियर खिलाड़ी सिर्फ आर्थिक परेशानी की वजह से एशियन चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं ले सकीं. अरिहा चाहती हैं कि खिलाड़ियों के लिए स्कॉलरशिप और आर्थिक मदद की योजनाएं शुरू हों… ताकि पैसों की कमी किसी खिलाड़ी के सपनों के रास्ते में न आए.

महज 22 साल की उम्र में अरिहा पेनगम्बम ने जो कर दिखाया है वो इतिहास में दर्ज जो चुका है. उनको मिला ये पदक सिर्फ एक गोल्ड मेडल नहीं है. ये उस हौसले की जीत है, जिसने सीमित सुविधाओं के बावजूद देश का नाम रोशन किया. अरिहा ने साबित कर दिया कि अगर जुनून हो, मेहनत हो और मौका मिले… तो भारत के खिलाड़ी किसी भी मंच पर तिरंगा लहरा सकते हैं.

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गोल्ड जीतकर अरिहा ने रचा इतिहास… टैलेंट है, सुविधाएं नहीं! एरोबिक जिम्नास्टिक्स में भारत को पहली बार एशियन गोल्ड





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