Technology, देश में 5 साल में बनेंगे 39 लाख करोड़ के मोबाइल फोन: हजारों लोगों को मिलेगी नौकरी; क्या है सरकार का नया प्लान? – India’s Mobile Manufacturing, 39 Lakh Crore Production Target 5 Years, 60k Jobs — INA

सार
Mobile Manufacturing India:
भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी योजना की आधिकारिक घोषणा की है। केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश में 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही, उत्पादन बढ़ाने वाली कंपनियों को वित्तीय इंसेंटिव (लाभांश) भी दिया जाएगा।आइए जानते हैं कि इस योजना के तहत केंद्र सरकार कंपनियों को कितना इंसेंटिव देगी और इस पूरे मास्टरप्लान की क्या डिटेल्स हैं।

India Mobile Production:
भारत को ग्लोबल मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये के मेगा प्लान का एलान किया है। केंद्रीय सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अगले पांच वर्षों में देश में 39 लाख करोड़ के मोबाइल फोन उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इस दौरान सरकार का उद्देश्य मोबाइल उत्पादन को अभी के स्तर से दोगुना करना है। इसके लिए 62,500 करोड़ की योजना लाई गई है, जिससे करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
₹39 Lakh Crore Mobile Production:कितना है उत्पादन लक्ष्य?
सरकार की नई विनिर्माण योजना में अगले पांच वर्षों में देश में मोबाइल का उत्पादन बढ़ाकर 39 लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देश में मोबाइल उत्पादन को पांच साल में दोगुना किया जाएगा।
यह योजना भारत में मोबाइल फोन के निर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
क्या है सरकार का पूरा प्लान?
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली इस योजना का कुल आकार 62,500 करोड़ है। अब सरकार अनुमान लगा रही है कि इससे करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। क्योंकि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कारोबार और कंपनियों को बड़े स्तर पर विस्तार का अवसर देना भी है।
किन कंपनियों को मिलेगा योजना का फायदा?
- इस योजना में शामिल होने के लिए कंपनियों के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी रखी गई हैं। जैसे की 51 फीसदी भारतीय हिस्सेदारी और कम से कम एक हजार करोड़ का सालाना टर्नओवर रखने वाली कंपनियां ही इस योजना का हिस्सा बन सकती हैं।
- इसके अलावा कंपनियों के लिए पांच हजार करोड़ की बिक्री का लक्ष्य भी तय किया गया है। वहीं, नए ब्रांड के लिए यह दस हजार करोड़ का टर्नओवर निर्धारित किया गया है।
कब तक लागू रहेगी यह स्कीम
- सरकार के लक्ष्य को देखते हुए यह योजना मार्च 2031 तक लागू रहेगी। इतना ही नहीं इसके तहत पात्र कंपनियों को उनके प्रदर्शन और बिक्री के आधार पर इंसेंटिव दिया जाएगा।
- इंसेंटिव की दर 2.25 फीसदी से पांच फीसदी के बीच होगी। इसकी गणना संबंधित वित्त वर्ष में कंपनी की कुल बिक्री को निर्धारित इंसेंटिव रेट से गुणा करके की जाएगी।
- इतना ही नही इस योजना में भारतीय कंपनियों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन, रिसर्च और डेवलपमेंट यानी आर एंड डी पर भी खास जोर दिया गया है।
- भारतीय कंपनियों को प्रोडक्ट डिजाइन, शोध और विकास के लिए तीन फीसदी का अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। इससे देश में सिर्फ मोबाइल की असेंबली करने के बजाय डिजाइन और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में भारत का कौन सा स्थान है?
मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग यानी की उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इस मामले में चीन पहले स्थान पर है। सरकार के अनुसार भारत पहले ही मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में तेजी से . बढ़ चुका है।
नई योजना के जरिए सरकार इसी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है। उत्पादन बढ़ने के साथ देश से मोबाइल फोन के निर्यात और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी बढ़ोतरी की उम्मीद है।