यूपी – हाथरस सत्संग हादसा: कांस्टेबल शिल्पी की गवाही, सेवादारों ने कहा था पुलिस की जरूरत नहीं, हम संभाल लेंगे – INA

हाथरस जनपद की तहसील सिकंदराराऊ के गांव फुलरई मुगलगढ़ी में दो साल पहले हुए सत्संग हादसे में बृहस्पतिवार को एडीजे एफटीसी कोर्ट प्रथम में कांस्टेबल शिल्पी की गवाही हुई। उन्होंने अदालत को बताया कि वहां वर्दी, सिर पर टोपी और हाथों में डंडे लिए भोले बाबा के सेवादार तैनात थे। सेवादारों ने पुलिसकर्मियों से स्पष्ट कहा कि यहां पुलिस की कोई जरूरत नहीं है, हम व्यवस्था खुद संभाल लेंगे।

इस पर पुलिसकर्मियों ने जवाब दिया था कि वे उच्च अधिकारियों के आदेश पर अपनी ड्यूटी करने आए हैं। शिल्पी ने बताया कि वह हाथरस महिला थाने में तैनात थीं। उनकी ड्यूटी फुलरई मुगलगढ़ी में आयोजित सत्संग में लगी थी। हादसे वाले दिन 2 जुलाई 2024 की सुबह करीब 8 बजे ही ड्यूटी पर पहुंच गई थीं।

चरण रज लेने के दौरान धक्का-मुक्की से बिगड़े हालात 

गवाह शिल्पी ने अदालत को बताया कि दोपहर करीब दो बजे भोले बाबा सत्संग स्थल से रवाना होने लगे तभी श्रद्धालुओं में बाबा के पैर छूने और चरणरज (मिट्टी) लेने की अंधी होड़ मच गई। देखते ही देखते भारी भीड़ एकत्र हो गई और भगदड़ की स्थिति बन गई। इसी दौरान व्यवस्था संभाल रहे बाबा के सेवादारों की ओर से धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे भगदड़ में नीचे गिरे लोग कुचलने लगे। उमस और कीचड़ के कारण हादसा और भयावह हो गया। इस हादसे में 121 लोगों की मौत हुई थी। आयोजकों की लापरवाही मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई थी। मामले में अगली सुनवाई 3 सितंबर को होगी।

शिल्पी भी हुई थी भगदड़ का शिकार

महिला कांस्टेबल ने अदालत को बताया कि इस भगदड़ की चपेट में आकर वह खुद भी गिर पड़ी थीं। इस दौरान लोगों की भीड़ उनको रौंदते हुए भाग रही थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें सरकारी गाड़ी से तत्काल हाथरस के बागला जिला अस्पताल पहुंचाया गया। उनके साथ तीन अन्य पुलिसकर्मी और सात आम नागरिक भी घायल अवस्था में अस्पताल लाए गए थे। बाद में सरकार की ओर से उन्हें 50 हजार रुपये का मुआवजा भी दिया गया था।


Credit By Amar Ujala

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