सीजी- कोरबा में दर्दनाक हादसा: भारी वाहन ने तीन गौवंशों को कुचला, दो घायल घंटों तड़पते रहे; व्यवस्था पर उठे सवाल – INA

मदद के लिए भटकते रहे लोग, नहीं मिली त्वरित व्यवस्था
ग्रामीणों और गौसेवकों के अनुसार, हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने घायल मवेशियों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन शासन-प्रशासन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी और ग्राम पंचायत स्तर से अपेक्षित त्वरित व्यवस्था नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि पंचायत प्रतिनिधियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सरपंच और सचिव ने फोन तक रिसीव नहीं किया। वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से कथित तौर पर वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया।
बेलगाम रफ्तार और सड़क पर मवेशी, लगातार हो रहे हादसे
स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात नेशनल हाईवे पर भारी वाहन बेलगाम गति से दौड़ते हैं और रफ्तार पर अंकुश लगाने वाला कोई नहीं है। सड़क पर घूम रहे मवेशियों को हटाने के लिए भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसके कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही दर्री मुख्य मार्ग पर 11 मवेशी भारी वाहन की चपेट में आ गए थे, जिसमें कई की मौत हो गई थी। उस घटना के बाद गौसेवकों ने चक्काजाम कर विरोध जताया था, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी।
घायल पशु घंटों तड़पते रहे, जिम्मेदारी पर सवाल
यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या नेशनल हाईवे पर दुर्घटना के बाद घायल या मृत पशुओं को हटाने की कोई तत्काल व्यवस्था नहीं है? क्या सड़क हादसे के बाद घंटों तक घायल जीव को तड़पते रहने देना व्यवस्था की विफलता नहीं है? क्या ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह गई है?
व्यवस्था ने मुंह मोड़ा तो ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
जब जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटते नजर आए, तब एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों को ही . आना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि जिम्मेदार व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
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एम्बुलेंस और चिकित्सालय की व्यवस्था की मांग
गौसेवकों ने शासन-प्रशासन, एनएचएआई और ग्राम पंचायत से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए तत्काल आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सवाल सिर्फ गौवंश का नहीं है, सवाल सड़क सुरक्षा, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का है। गौसेवकों ने घायल पशु-पक्षियों के लिए एम्बुलेंस और चिकित्सालय की व्यवस्था की मांग की है।