खबर शहर , गड्ढे में फंसी एंबुलेंस: गर्भ में ही मर गया नवजात, अब स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच; सीएमओ ने तलब की है रिपोर्ट – INA

सिस्टम की सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही ने 2 सितंबर को गढ़वार गांव के एक अजन्मे की जिंदगी छीन ली थी। सड़क के गड्ढे में एंबुलेंस फंसने से प्रसूता निधि समय से अस्पताल नहीं पहुंच सकी थी। गर्भ में ही नवजात की मौत हो गई थी। डॉक्टरों के प्रयास के बाद महिला की जान बच सकी थी। सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने जैतपुर अधीक्षक डॉ. दीपक यादव से नवजात की मौत की रिपोर्ट तलब की है।

सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि बाह में निजी अस्पताल में प्रसूता को ले जाने में आशा की भूमिका की भी जांच हो रही है। परिजन ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में प्रसव ऑपरेशन से होने की बात कही थी। आरोप ये भी है कि एंबुलेंस चालक ने जैतपुर सीएचसी पर छोड़ने के बाद बाहर ले जाने के लिए दूसरी एंबुलेंस को कॉल करने के लिए बोला था। तब बाह के निजी अस्पताल में ले गए थे।

बता दें कि नवजात की मौत का मामला तब सामने आया था, जब गांव के भानु प्रताप सिंह, विभूत नरायन सिंह, रिक्की सिंह, अमित कुमार, हरेंद्र सिंह आदि शनिवार को समाधान दिवस में शिकायत करने पहुंचे। शिकायत में कहा था कि 2 सितंबर की रात गढ़वार गांव प्रवेंद्र की पत्नी निधि को प्रसव पीड़ा हुई। रात 1 बजे परिजन ने कॉल कर एंबुलेंस बुलाई थी। कुछ देर में ही पहुंची एंबुलेंस गांव के मुख्य मार्ग पर बने गड्ढे में फंस गई थी। ग्रामीणों ने ट्रैक्टर की मदद से करीब दो घंटे तक मशक्कत कर एंबुलेंस को बाहर निकाला था। इसके बाद परिजन प्रसूता को लेकर करीब साढ़े तीन बजे निजी अस्पताल पहुंचे। परिजन को डॉक्टर ने बताया कि प्रसव में देरी के कारण नवजात की मौत हो गई।

जैतपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. दीपक यादव ने बताया कि नवजात की मौत की जांच हो रही है। सीएचसी से लेकर आशा की भूमिका की छानबीन की जा रही है। एंबुलेंस अस्पताल के नियंत्रण में नहीं है। जांच के बाद कार्रवाई के लिए सीएमओ को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

 


Credit By Amar Ujala

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