यूपी – हाईकोर्ट का अहम फैसला : दैनिक वेतन सेवा को पेंशन से नहीं किया जा सकता बाहर, यूपी सरकार की विशेष अपील खारिज – INA

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कहा है कि नियमितीकरण से पहले की लंबी दैनिक वेतन सेवा को पेंशन योग्य सेवा में जोड़ा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि 22 साल तक लगातार काम करने की सेवा को कैजुअल या अस्थायी नहीं कहा जा सकता। यदि राज्य यह साबित नहीं करता कि कर्मचारी ने 240 दिन की सेवा पूरी नहीं की थी तो उसे पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार की विशेष अपील खारिज करते हुए दिया।




सरकार ने एकल पीठ के मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। मामला नगर पालिका कुशीनगर के कर्मचारी राम प्रसाद यादव से जुड़ा है। वह 31 मार्च 1989 से एक सितंबर 2011 तक दैनिक वेतन पर काम करते रहे और बाद में क्लर्क पद पर नियमित हुए। सेवानिवृत्ति के बाद नगर पालिका ने उनकी पेंशन रोक दी थी। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के प्रेम सिंह फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लंबी सेवा को पेंशन से बाहर करना भेदभावपूर्ण और अतार्किक है। 


Credit By Amar Ujala

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