स्कॉटलैंड-वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड ने ब्रिटेन से आजादी मांगी:अलग होने पर पहली बार तीनों नेताओं की मीटिंग, कहा- लंदन हमें नहीं रोक सकता- INA NEWS

स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड को ब्रिटेन से अलग करने की मांग करने वाली पार्टियों के नेता पहली बार एक साथ बैठे। वेल्स की राजधानी कार्डिफ में हुई इस बैठक में उन्होंने कहा कि इन देशों के लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है। तीनों नेताओं ने ब्रिटेन की संसद वेस्टमिंस्टर से कहा कि वह लोगों को आजादी के लिए लोकतांत्रिक तरीके से फैसला करने से नहीं रोक सकती। तीनों पार्टियां चाहती हैं कि उनके क्षेत्रों को ब्रिटेन से ज्यादा अधिकार मिलें और आगे चलकर वे अलग देश बन सकें। हालांकि, आजादी के लिए जनमत संग्रह कब और किस तरह कराया जाए, इसे लेकर तीनों पार्टियों की राय अलग-अलग है। समझौते में कही गईं 8 अहम बातें ब्रिटेन से अलग होना इतना आसान क्यों नहीं? यूनाइटेड किंगडम चार हिस्सों से बना है- इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड की अपनी संसद और सरकारें हैं। उन्हें कई मामलों में अपने फैसले लेने की ताकत मिली हुई है। लेकिन रक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मुद्दे अभी भी लंदन की सरकार के पास हैं। यह व्यवस्था अमेरिका या जर्मनी जैसी नहीं है, जहां केंद्र और राज्यों के अधिकार संविधान में साफ-साफ बांटे गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि इन चारों में से कोई भी हिस्सा अपने दम पर ब्रिटेन से अलग होने का फैसला नहीं कर सकता। स्कॉटलैंड में पहले हो चुका है आजादी पर जनमत संग्रह स्कॉटलैंड में ब्रिटेन से अलग होने को लेकर 2014 में जनमत संग्रह हो चुका है। यह जनमत संग्रह वेस्टमिंस्टर की मंजूरी के बाद कराया गया था। इसमें लोगों से पूछा गया था कि क्या स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से अलग होकर स्वतंत्र देश बनना चाहिए। नतीजे में 55% लोगों ने आजादी के खिलाफ और 45% ने इसके पक्ष में वोट दिया था। वेल्स में स्थिति अलग है। वहां की संसद सेनेड अपने दम पर आजादी के लिए जनमत संग्रह नहीं करा सकती। नॉर्दर्न आयरलैंड के लिए नियम कुछ अलग हैं। 1998 के गुड फ्राइडे समझौते के तहत अगर ब्रिटेन के नॉर्दर्न आयरलैंड सचिव को लगता है कि वहां बहुमत लोग आयरलैंड के साथ जुड़ने के पक्ष में वोट कर सकते हैं, तो ब्रिटिश सरकार को जनमत संग्रह कराना होगा। आजादी के समर्थन में कितने लोग हैं? हाल के कुछ सर्वे बताते हैं कि तीनों जगह ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था बदलने की मांग को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, तीनों जगह स्थिति अलग-अलग है। लेकिन इन आंकड़ों को तीनों जगह एक जैसा नहीं देखा जा सकता। जैसे वेल्स की प्लेड कमरी पार्टी ने चुनाव में आजादी के मुद्दे पर ज्यादा जोर नहीं दिया था। वहीं, स्कॉटलैंड में आजादी का मुद्दा काफी बड़ा है, जबकि नॉर्दर्न आयरलैंड में इसके पीछे की राजनीतिक स्थिति अलग है। ऐसे में कार्डिफ की बैठक अहम है। पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड की आजादी समर्थक पार्टियां एक साथ आई हैं और ब्रिटेन के भविष्य को लेकर अपनी बात रखी है। तीनों पार्टियों का कहना है कि अपने भविष्य का फैसला करने का हक आखिरकार इन देशों के लोगों के पास होना चाहिए। ———————— ब्रिटेन से अलग हो सकते हैं स्कॉटलैंड-वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड:कल नेताओं की मीटिंग, आजादी के फैसले पर जनमत संग्रह संभव
UK के एकजुट रहने पर फिर सवाल उठ रहे हैं। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के नेता सोमवार को वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मिलने वाले हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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