ईरान में अमेरिकी हमला युद्ध अपराध हो सकता है:UN रिपोर्ट में गर्ल्स स्कूल पर हमले का जिक्र; पुतिन के बाद अब ट्रम्प की जवाबदेही पर सवाल- INA NEWS

ईरान पर फरवरी में हुए अमेरिका हमलों को लेकर UN की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सामने आई। UN की स्वतंत्र जांच टीम ने कहा कि उसके पास यह मानने की पर्याप्त वजह है कि मिनाब के गर्ल्स स्कूल और एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले अमेरिकी सेना ने किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध हो सकते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध अपराध के आरोप लगे थे। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 2023 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अब UN की रिपोर्ट के बाद ट्रम्प की किसी तरह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ईरान में अमेरिका के 2 हमलों की UN ने जांच की पहला- मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हमले में 120 बच्चों की मौत मिनाब स्कूल पर हमले के बाद की तस्वीरें… दूसरा- स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले में 22 नागरिक मारे गए UN की रिपोर्ट के बाद अब क्या होगा? रिपोर्ट अभी किसी अदालत का फैसला नहीं है। इसे UN मानवाधिकार परिषद में रखा जाएगा। इसके बाद आगे जांच और कार्रवाई की मांग उठ सकती है। अमेरिका से भी पूछा जा सकता है कि स्कूल को सैन्य ठिकाना क्यों माना गया और हमला करने से पहले खुफिया जानकारी की ठीक से जांच क्यों नहीं हुई। आगे की जांच में पता लगाया जाएगा कि हमले का फैसला किसने लिया और किस जानकारी के आधार पर लिया। अगर किसी अधिकारी की गंभीर गलती या जानबूझकर की गई कार्रवाई सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई या मुकदमा हो सकता है। क्या ट्रम्प भी जिम्मेदार माने जाएंगे? UN की रिपोर्ट में अमेरिकी सेना पर युद्ध अपराध का आरोप है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रम्प भी इसके लिए सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे। इसके लिए यह देखना होगा कि ट्रम्प ने हमले का आदेश दिया था या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी थी या नहीं और उन्हें हमला रोकने की जानकारी या ताकत थी या नहीं। पहले जांच में हमले के लिए जिम्मेदार सैन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आएगी। उसके बाद ही यह देखा जाएगा कि ट्रम्प की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं। ईरान की सरकार पर भी गंभीर आरोप UN की जांच में ईरानी सरकार की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच टीम के मुताबिक, दिसंबर के आखिर में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के दौरान ईरानी अधिकारियों ने गैरकानूनी हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारियां और लोगों को जबरन गायब करने जैसी कार्रवाइयां कीं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए इंटरनेट बंद किया और मौत की सजा का भी इस्तेमाल किया। UN टीम ने कहा कि ईरानी अधिकारियों की कार्रवाई आम नागरिकों के खिलाफ व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थी। जांच के मुताबिक, यह मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकता है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश में टॉर्च की रोशनी में मरीजों का इलाज: 20 साल का सबसे बड़ा बिजली संकट; भारत पहले ही ज्यादा बिजली दे रहा, मदद मुश्किल बांग्लादेश इस समय 20 साल के सबसे गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई इलाकों में रोजाना घंटों कटौती हो रही है। पूरी खबर पढ़ें…
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