खबर शहर , साइलेंट किलर बन रहा एनीमिया: महिलाएं थकान- कमजोरी को न समझें मामूली, गर्भावस्था में बढ़ जाता है खतरा – INA

आगरा मंडल में एनीमिया (खून की कमी) स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। थकान, सांस फूलना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ना जैसी समस्याओं को लोग अक्सर सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह साइलेंट किलर का रूप ले चुका है जो आधी आबादी को अपनी चपेट में ले रहा है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, आगरा मंडल के जिलों में स्थिति बेहद गंभीर है। आगरा जिले में 15-49 वर्ष की 59.4% महिलाएं और 61.8% गर्भवती महिलाएं इससे पीड़ित हैं। मथुरा में 63.0% महिलाएं, मैनपुरी में 57.8% महिलाएं, फिरोजाबाद में 57.1% महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। जिला महिला चिकित्सालय की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. आशु ने बताया कि एनीमिया केवल आयरन की कमी से नहीं, बल्कि फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 और विटामिन-ए के अभाव से भी होता है। गर्भावस्था के दौरान यह स्थिति प्रसव पश्चात अत्यधिक रक्तस्राव, मातृ मृत्यु, समय से पहले प्रसव और कम वजन वाले शिशु के जन्म का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।

खानपान पर रखे विशेष ध्यान

जिला अस्पताल की डायटीशियन ललितेश शर्मा ने एनीमिया से बचने के लिए खानपान से जुड़े जरूरी सुझाव दिए हैं। पालक, मेथी, सरसों, चना, राजमा, बाजरा, ज्वार, गुड़, तिल और खजूर का नियमित सेवन करें। नींबू, आंवला, संतरा, अमरूद और टमाटर खाने से शरीर में आयरन का अवशोषण तीन गुना तक बढ़ जाता है। भोजन के तुरंत बाद चाय-कॉफी न लें, इनमें मौजूद टैनिन और फाइटेट्स आयरन के अवशोषण को रोकते हैं। इसके अलावा, दूध और कैल्शियम को सीधे आयरन युक्त भोजन के साथ न लें।

जागरूकता और देखभाल से संवरी सेहत-

– गर्भावस्था के पांचवें महीने में हीमोग्लोबिन 7.9 ग्राम था। स्वास्थ्यकर्मियों की काउंसिलिंग, उचित आहार और आयरन की गोलियों के नियमित सेवन से आठवें महीने में हीमोग्लोबिन बढ़कर 10 ग्राम हो गया। – आयशा, निवासी बोदला

– हीमोग्लोबिन केवल 8 ग्राम था। सही इलाज, पौष्टिक आहार और नियमित दवाओं की मदद से प्रसव के समय हीमोग्लोबिन 12 ग्राम हुआ और उन्होंने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। – मनोरमा, निवासी बोदला

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत नियमित आयरन की गोलियां बांटने के साथ गंभीर मामलों में आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। हालांकि, पोषण युक्त आहार के प्रति जागरूकता की कमी और कम उम्र में विवाह जैसी सामाजिक चुनौतियां इस पर लगाम कसने में बड़ी बाधा बनी हुई हैं।

 


Credit By Amar Ujala

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