UP News: कातिल बोला- ‘बच्चे मेरी शील्ड हैं…’, ग्रेनेड से दरवाजा उड़ाकर कमांडोज ने मासूमों को कैसे बचाया? आजमगढ़ नरसंहार के वो 7 घंटे – INA

Azamgarh Crime News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुए नरसंहार से इस वक्त पूरा देश सन्न है. शंभूपुर गहजी गांव में हुए नरसंहार और एनकाउंटर का पूरा घटनाक्रम वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) नवीन अरोड़ा ने परत-दर-परत मीडिया के सामने रखा है. अंधविश्वास, तंत्र-पूजा और मानसिक सनक के कारण अपनी पत्नी बबीता और दो पुरोहितों की हत्या करने वाले आरोपी अरविंद सिंह ने अपने ही तीन मासूम बच्चों को ‘ह्यूमन शील्ड’ (मानव ढाल) बना लिया था.
ADG नवीन अरोड़ा के अनुसार, पुलिस ने रिश्तेदारों से लेकर बड़े अधिकारियों तक से उसकी बात कराई, लेकिन आरोपी किसी भी सूरत में सरेंडर करने को तैयार नहीं था. अंततः कमरे के अंदर से गोली चलने पर पुलिस को त्वरित और आक्रामक एक्शन लेना पड़ा.
ADG नवीन अरोड़ा ने पूरे एनकाउंटर की आंखों देखी बताते हुए कहा- ना तो वह खुद बाहर निकलने को तैयार था और ना ही बच्चों को छोड़ने को तैयार था. हमने उसके सारे रिश्तेदारों और पुलिस अधिकारियों से उसकी लगातार बात करवाई. हर बार उसका एक ही टका सा जवाब था कि ‘बच्चे मेरे साथ हैं और यही मेरी शील्ड (ढाल) हैं, इस पर कोई समझौता नहीं होगा… सुबह देखेंगे, अभी आप लोग वापस जाइए.’
उन्होंने आगे बताया कि लगभग 7 घंटे बीत चुके थे. पुलिस टीम ने तय किया कि मकान की कड़ी घेराबंदी करके रखते हैं ताकि वह भागने न पाए. पुलिस अपनी आगे की रणनीति बना ही रही थी कि इसी बीच अचानक कमरे के अंदर से एक फायर (गोली चलने) की आवाज आई.
स्टन ग्रेनेड, टियर गैस और दरवाजा तोड़कर एंट्री
ADG नवीन अरोड़ा के मुताबिक- कमरे के अंदर से एक फायर की आवाज आते ही हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था. एक फायर का सीधा मतलब था कि अंदर बच्चों के साथ कुछ भी अनहोनी हो सकती है. पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस (आंसू गैस) का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर तुरंत अंदर घुसी.
आरोपी ने खाली कर दी बंदूक, बड़ी बेटी को बनाया था ढाल
दरवाजा टूटते ही सनकी आरोपी अरविंद सिंह ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध 4-5 राउंड फायरिंग शुरू कर दी. ADG ने बताया- फायरिंग के दौरान उसने फायरिं कर सारी गोलियां खाली कर दीं. उसके बेटे को पहले से गोली लग चुकी थी. छोटी बेटी घबराहट और हड़बड़ी में उसके हाथ से नीचे गिर गई थी, जबकि बड़ी बेटी को उसने मजबूती से अपने आगे ‘शील्ड’ बनाकर पकड़ रखा था. बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पुलिस की ओर से की गई जवाबी फायरिंग में आरोपी घायल हो गया.
ये भी पढ़ें:भाई की आत्मा, तंत्र-मंत्र और एक सिरफिरे की सनक 5 मौतों का वो रहस्य, जिसके चलते आजमगढ़ में हुआ नरसंहार
एनकाउंटर में 5 मौतें, 2 मासूम बच्चियां सुरक्षित
मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिस ने तीनों बच्चों और घायल आरोपी को बाहर निकाला. आरोपी अरविंद सिंह और उसकी गोली से गंभीर रूप से घायल उसके मासूम बेटे को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान आरोपी पिता और उसके मासूम बेटे दोनों की मौत हो गई. इस तरह अंधविश्वास की बलि चढ़कर इस पूरे कांड में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 5 हो गया.
हालांकि, पुलिस की त्वरित और सूझबूझ भरी कार्रवाई से उसकी दो मासूम बेटियों को सही-सलामत और सुरक्षित बचा लिया गया है. मौके पर एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, फॉरेंसिक टीम और एसओजी (SOG) की टीम साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है.
कातिल बोला- ‘बच्चे मेरी शील्ड हैं…’, ग्रेनेड से दरवाजा उड़ाकर कमांडोज ने मासूमों को कैसे बचाया? आजमगढ़ नरसंहार के वो 7 घंटे
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,