Tach – बिना SIM और Mobile Data के फोन पर चलेगा TV? जानें भारत की D2M टेक्नोलॉजी क्या है और कैसे करेगी काम

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आपके फोन में इंटरनेट या मोबाइल डेटा न हो, फिर भी आप लाइव टीवी, न्यूज या दूसरे ब्रॉडकास्ट कंटेंट देख सकें? भारत में Direct-to-Mobile यानी D2M टेक्नोलॉजी इसी दिशा में काम कर रही है. हालांकि, यह सुविधा अभी आम स्मार्टफोन यूजर्स के लिए शुरू नहीं हुई है.

सितंबर 2026 तक प्रसार भारती इसके कमर्शियल रोलआउट की तैयारी में है और अक्टूबर में इसके लिए RFP जारी होने की उम्मीद जताई गई है.

क्या है D2M टेक्नोलॉजी?

D2M का पूरा नाम Direct-to-Mobile है. इसमें मोबाइल नेटवर्क या Wi-Fi के बजाय टेरेस्ट्रियल ब्रॉडकास्ट नेटवर्क के जरिए वीडियो, ऑडियो और डेटा सीधे ऐसे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जाता है, जो D2M को सपोर्ट करते हों.

सरकार के मुताबिक, D2M SIM कार्ड या मोबाइल डेटा पर निर्भर नहीं करता. इसका इस्तेमाल मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा, न्यूज और आपातकालीन अलर्ट पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है.

भारत में इस तकनीक पर प्रसार भारती और IIT कानपुर लंबे समय से काम कर रहे हैं. IIT कानपुर ने D2M के कई प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट और टेस्ट किए हैं. 2025 में दिल्ली और बेंगलुरु में इसके ट्रायल किए गए थे, जबकि 2026 में भी तकनीक की टेस्टिंग और वैलिडेशन जारी रही.

बिना इंटरनेट Live TV कैसे चलेगा?

D2M में कंटेंट को हर यूजर के लिए अलग-अलग इंटरनेट स्ट्रीम के रूप में भेजने के बजाय ब्रॉडकास्ट सिग्नल के जरिए एक साथ कई डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है.

यही वजह है कि अगर एक ही समय में लाखों लोग कोई लाइव मैच या न्यूज ब्रॉडकास्ट देख रहे हों, तो हर यूजर के लिए अलग मोबाइल डेटा स्ट्रीम की जरूरत नहीं होगी. इससे मोबाइल नेटवर्क पर वीडियो ट्रैफिक का दबाव कम करने की संभावना है.

D2M से क्या फायदे हो सकते हैं?

-मोबाइल डेटा पर निर्भरता कम हो सकती है

लाइव टीवी और दूसरे ब्रॉडकास्ट कंटेंट को मोबाइल डेटा की जगह ब्रॉडकास्ट नेटवर्क से पहुंचाया जा सकता है. इससे खासकर बड़े लाइव इवेंट के दौरान मोबाइल नेटवर्क पर डेटा लोड कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि इससे 4G/5G की स्पीड ‘कई गुना’ बढ़ जाएगी या कॉल ड्रॉप की समस्या खत्म हो जाएगी.

-Emergency Alert और Education में मदद

D2M का एक अहम इस्तेमाल आपदा या आपातकाल के समय हो सकता है. सरकारी जानकारी के मुताबिक, इस तकनीक के जरिए आपातकालीन संदेश, न्यूज और शैक्षणिक कंटेंट मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाया जा सकता है.

-बिना मोबाइल डेटा कंटेंट देखने की सुविधा

D2M का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि compatible डिवाइस पर ब्रॉडकास्ट कंटेंट देखने के लिए मोबाइल डेटा कनेक्शन जरूरी नहीं होगा. इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह का ऑनलाइन कंटेंट मुफ्त हो जाएगा. कौन-सा कंटेंट फ्री होगा और कौन-सा पेड, यह भविष्य के कमर्शियल मॉडल पर निर्भर करेगा.

क्या मौजूदा स्मार्टफोन में चलेगा?

यहीं सबसे बड़ी शर्त है. हर मौजूदा स्मार्टफोन D2M सपोर्ट नहीं करता.

D2M रिसीव करने के लिए फोन में जरूरी हार्डवेयर और सपोर्टेड ब्रॉडकास्ट स्टैंडर्ड होना चाहिए. IIT कानपुर की रोडमैप रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा डिवाइसों में D2M सपोर्ट के लिए अलग रिसीवर हार्डवेयर, एंटीना और दूसरे कंपोनेंट की जरूरत पड़ सकती है.

भारत में D2M-सक्षम फोन तैयार करने की दिशा में इंडस्ट्री ने पहले भी काम किया है. 2025 में HMD Global ने IIT कानपुर से जुड़े FreeStream Technologies और Tejas Networks के साथ D2M फोन पर काम करने की योजना बताई थी.

क्या D2M के लिए SIM या इंटरनेट जरूरी होगा?

मोबाइल डेटा कनेक्शन जरूरी नहीं होगा. सरकार ने भी D2M को SIM कार्ड और मोबाइल डेटा से स्वतंत्र ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी के तौर पर बताया है. हालांकि, फोन को D2M-compatible होना जरूरी होगा.

क्या D2M Netflix या OTT की जगह लेगा?

पूरी तरह नहीं.

OTT प्लेटफॉर्म इंटरनेट के जरिए ऑन-डिमांड कंटेंट उपलब्ध कराते हैं. वहीं D2M का सबसे बड़ा फायदा ब्रॉडकास्ट कंटेंट में है, जहां एक ही कंटेंट को बड़ी संख्या में लोगों तक एक साथ पहुंचाया जा सकता है.

इसलिए D2M को OTT का सीधा विकल्प कहने के बजाय एक अलग कंटेंट डिलीवरी सिस्टम के रूप में देखना ज्यादा सही होगा.

क्या D2M भारत में शुरू हो चुका है?

अभी इसे आम यूजर्स के लिए देशभर में कमर्शियल सर्विस के तौर पर लॉन्च नहीं किया गया है. लेकिन प्रोजेक्ट अब ट्रायल और टेस्टिंग से आगे बढ़कर कमर्शियल रोलआउट की तैयारी के चरण में पहुंच चुका है.

प्रसार भारती अक्टूबर 2026 में D2M के कमर्शियल रोलआउट के लिए RFP जारी करने की तैयारी कर रहा है. इसका मतलब है कि प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन पूरे देश में D2M कब से उपलब्ध होगा, इसकी अंतिम तारीख अभी तय नहीं मानी जानी चाहिए.

D2M भारत में टीवी और वीडियो कंटेंट पहुंचाने का एक नया तरीका बन सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि compatible डिवाइस पर लाइव ब्रॉडकास्ट के लिए मोबाइल डेटा या Wi-Fi की जरूरत नहीं होगी. लेकिन अभी इसे हर फोन पर चलने वाली सुविधा समझना सही नहीं है. इसके लिए D2M-compatible हार्डवेयर, ब्रॉडकास्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल रोलआउट की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है.


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