UP News: 13 महीने, 126 हियरिंग और फांसी की सजा… मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी – INA

Meerut Blue Drum Murder Case: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम कांड (सौरभ राजपूत हत्याकांड) में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है. दोनों ने मिलकर मुस्कान के पति सौरभ राजपूत की हत्या की थी. सबूत मिटाने के लिए शव के 5 टुकड़े कर नीले ड्रम में भर दिए गए थे और ऊपर से सीमेंट डाल दिया गया था. 3 मार्च 2025 को हुई हत्या से लेकर 14 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाए जाने तक इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए. आइए जानते हैं इस हत्याकांड की पूरी कहानी, जांच, सुनवाई और सजा का पूरा हिसाब…

मेरठ का नीला ड्रम कांड देश के सबसे चर्चित हत्याकांडों में शामिल हो गया था. इस मामले में 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई. फैसला सुनाते हुए मेरठ जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत का जिक्र करते हुए कहा कि, “अधर्म के काम पर सजा देना धर्म होता है. मुस्कान और साहिल ने सौरभ की नृशंस हत्या की है, इसलिए उनकी माफी स्वीकार नहीं होगी.”

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सजा सुनाए जाने से पहले दोनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया था. फैसला सुनकर मुस्कान और साहिल रोने लगे. जज ने मुस्कान से पूछा कि वह अपने पति की हत्या के मामले में दोषी है, ऐसे में क्या सजा चाहती है? मुस्कान ने जवाब दिया कि उसकी बच्चियों का ख्याल रखा जाए. इसके बाद वह चुप हो गई. साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया. फैसले के बाद सौरभ की मां भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया है.

2016 में हुई थी सौरभ और मुस्कान की लव मैरिज

इस हत्याकांड की कहानी करीब 10 साल पहले शुरू हुई थी. साल 2016 में मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने प्रेम विवाह किया था. शादी के तीन साल बाद 2019 में दोनों के घर बेटी का जन्म हुआ. बाद में बेटी अपने नाना-नानी के पास रहने लगी. इसी दौरान मुस्कान की नजदीकियां उसके स्कूल के पुराने सहपाठी साहिल शुक्ला से बढ़ गईं. सौरभ काम के सिलसिले में लंदन चला गया. फरवरी 2025 में वह पत्नी और बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए मेरठ लौटा. बताया जाता है कि 24 फरवरी को घर पहुंचने के बाद उन्हें मुस्कान और साहिल के संबंधों के बारे में पता चला. इसके बाद घर में विवाद होने लगा.

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3 मार्च 2025: खाने में बेहोशी की दवा मिलाकर की हत्या

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मुस्कान और साहिल ने सौरभ को रास्ते से हटाने की साजिश रची. 3 मार्च 2025 की रात मुस्कान ने सौरभ के खाने में बेहोशी की दवा मिला दी. सौरभ के बेहोश होने के बाद साहिल ने उनका हाथ पकड़ा और मुस्कान ने चाकू से कई वार किए. इससे सौरभ की मौत हो गई. हत्या के बाद दोनों शव को बाथरूम में ले गए. वहां शव के पांच टुकड़े किए गए, ताकि उसे छिपाया जा सके.

इसके बाद टुकड़ों को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में भर दिया गया. ड्रम में सीमेंट और रेत डालकर उसे बंद कर दिया गया. कमरे को भी साफ किया गया, ताकि हत्या के निशान मिटाए जा सकें. इस तरह सौरभ की हत्या के बाद शव को नीले ड्रम में छिपाकर मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन घर से आने वाली दुर्गंध ने इस खौफनाक वारदात का राज खोल दिया.

हत्या के बाद शिमला-मनाली घूमने गए मुस्कान और साहिल

हत्या के बाद किसी को शक न हो, इसके लिए मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश के शिमला और मनाली घूमने चले गए. इस दौरान मुस्कान सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करती रही. जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, मुस्कान ने करीब 13 दिनों तक इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए. इससे ऐसा दिखाने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य है. हालांकि, यह कहानी ज्यादा समय तक छिपी नहीं रह सकी.

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18 मार्च 2025: नीले ड्रम से हुआ हत्याकांड का खुलासा

18 मार्च 2025 को सौरभ का छोटा भाई राहुल उनके घर पहुंचा. वहां मुस्कान के साथ साहिल भी मौजूद था. राहुल ने जब सौरभ के बारे में पूछा तो मुस्कान कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी. घर से दुर्गंध भी आ रही थी. इसके बाद राहुल के शोर मचाने पर पड़ोसी इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने घर की तलाशी ली तो नीले ड्रम से सौरभ के शव के टुकड़े बरामद हुए. इसके बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया. इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया. हत्या के तरीके और शव को छिपाने की कोशिश के कारण इस मामले को ‘नीला ड्रम कांड’ के नाम से जाना जाने लगा.

126 सुनवाई, 22 गवाह और 13 महीने तक चला ट्रायल

पुलिस की जांच पूरी होने के बाद अदालत में मुकदमा चला. इस मामले में कुल 126 सुनवाई हुईं. अभियोजन पक्ष की ओर से 22 अहम गवाह पेश किए गए. इसके अलावा मामले से जुड़े कई सबूत भी अदालत के सामने रखे गए. इनमें दवा विक्रेता, ड्रम और सीमेंट बेचने वाले दुकानदारों से जुड़ी जानकारी, कैब चालक के बयान और होटल के रिकॉर्ड जैसे साक्ष्य शामिल थे.

इन सबूतों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने हत्या की साजिश और सबूत मिटाने की कोशिश से जुड़ी घटनाओं को अदालत में रखा. 30 सितंबर 2026 को मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ की हत्या और साक्ष्य छिपाने के मामले में दोषी करार दिया. इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई.

कौन हैं फांसी की सजा सुनाने वाले जज?

मुस्कान और साहिल को सजा सुनाने वाले मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा-II का जन्म 2 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के मऊ में हुआ था. उन्होंने बीए, एलएलबी और एलएलएम की पढ़ाई की है. उन्होंने 31 मई 2003 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के रूप में न्यायिक सेवा शुरू की थी. करीब 23 साल के न्यायिक अनुभव के दौरान वह गाजीपुर, अलीगढ़, गोरखपुर, कानपुर और मिर्जापुर समेत कई जिलों में तैनात रहे. नवंबर 2024 में वह मिर्जापुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने. 21 मई 2026 से वह मेरठ में तैनात हैं.

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फांसी की सजा के बाद अब क्या होगा?

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) केके चौबे के मुताबिक, अदालत के फैसले को करीब एक सप्ताह बाद हाई कोर्ट में पुष्टि के लिए भेजे जाने की बात कही गई है. मौत की सजा के मामलों में हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है. हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प भी हो सकता है. इसके अलावा कानून के तहत उपलब्ध अन्य राहतों की मांग की जा सकती है. यदि मौत की सजा अंतिम रूप से बरकरार रहती है तो दोषी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी दाखिल कर सकते हैं.

डीजीसी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में दो से तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है. अपील के दौरान हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट सजा को बदल भी सकता है. दया याचिका पर भी कानून के अनुसार फैसला लिया जाता है. इसलिए फांसी की सजा सुनाए जाने का मतलब यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी.

590 दिन बाद आया फैसला

सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी. इसके बाद 18 मार्च को नीले ड्रम से शव मिलने पर मामले का खुलासा हुआ. जांच, गिरफ्तारी और अदालत में सुनवाई के बाद 30 सितंबर 2026 को दोनों दोषी करार दिए गए और 14 अक्टूबर को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई. करीब 590 दिन के इस घटनाक्रम में हत्या की साजिश, शव को छिपाने की कोशिश, शिमला-मनाली की यात्रा और सोशल मीडिया पोस्ट जैसे कई पहलू सामने आए. अब अदालत के फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है.

13 महीने, 126 हियरिंग और फांसी की सजा… मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड की पूरी कहानी


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