खबर शहर , यूपी: जिस एनओसी से पास हुआ नक्शा, वो निकली फर्जी! एडीएम कार्यालय के नाम से जारी हुआ था जाली पत्र – INA

महात्मा गांधी रोड स्थित धाकरान चौराहे के पास बेशकीमती नजूल (सरकारी) जमीन पर निर्माण के लिए फर्जी दस्तावेज के सहारे नक्शा पास कराने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इस फर्जीवाड़े में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने के लिए तत्कालीन एडीएम प्रोटोकॉल कार्यालय के नाम से कूटरचित और फर्जी पत्र जारी किया गया था।

अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद हुई जांच में जानकारी सामने आई। इसके बाद आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने रिपोर्ट भेजते हुए पत्र लिखकर जिला प्रशासन को सख्त विधिक व कानूनी कार्रवाई के लिए कहा है। धाकरान स्थित सरकारी जमीन को निजी दर्शाकर उस पर बहुमंजिला निर्माण कराने की नीयत से आगरा विकास प्राधिकरण में नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन की औपचारिकताएं पूरी करने और जमीन पर मालिकाना हक व अनापत्ति सिद्ध करने के लिए एडीएम प्रोटोकॉल कार्यालय से जारी एक एनओसी पत्र संलग्न किया गया।

शुरुआत में एडीए अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस फर्जी एनओसी को सही मानते हुए नक्शा मंजूर कर दिया गया। हालांकि, बाद में फिर से एडीएम प्रोटोकॉल कार्यालय से ही दूसरा पत्र यह कहते हुए जारी किया गया कि संपत्ति सरकारी है और एनओसी नहीं दी जा सकती। हालांकि एडीए के जिम्मेदार अफसरों ने इस पत्र को नजरअंदाज कर नक्शा मंजूर कर दिया। अब नजूल विभाग के अभिलेखों की पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि भूखंड पूरी तरह से सरकारी नजूल भूमि की श्रेणी में दर्ज है। चूंकि, फर्जी दस्तावेज एडीएम प्रोटोकॉल के कार्यालय के नाम से जारी हुआ है। इससे प्राधिकरण सचिव ने प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिकी दर्ज कराने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की संस्तुति भेजी है।

नक्शा पास कराने के खेल में फंस सकते हैं कई

फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी जमीन हड़पने के इस सिंडिकेट पर अब जल्द ही बड़ी प्रशासनिक गाज गिरना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि बिना जांच के नक्शा पास करने में एडीए के कई इंजीनियरों, बाबुओं और अफसरों की गर्दन फंस गई है। इसके अलावा कलेक्ट्रेट के भी कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। दोनों ही महकमे अपने-अपने स्तर से उस दौरान तैनात रहे कर्मियों की सूची तैयार कर रहे हैं।


Credit By Amar Ujala

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