खबर शहर , ब्रज का बतरस: साहब के उड़े तोते, नेताजी की न बची कुर्सी, इश्क का स्टेयरिंग…हंसी से लोटपोट कर देगा कुटाई कांड – INA

साहब के तोतेपढ़े-लिखों के चुनाव में दिनभर साहेबान निष्पक्षता का चोला ओढ़े सुकून से घूमते रहे, मानो मतदान नहीं कोई पिकनिक चल रही हो। गिनती के शुरुआती दौर तक सब अमन-चैन था, पर जैसे ही दूसरे राउंड में सत्ताधारी खेमे की जमीन खिसकती दिखी, राजधानी से दबाव के तार खिंच गए। शाम ढलते ही दफ्तरों के सन्नाटे को चीरते हुए जैसे ही साहब लोगों के फोन घनघनाए, अफसरों की रंगत ही उड़ गई। जो साहब दिनभर कायदे-कानून की दुहाई दे रहे थे, फोन पर लखनऊ का पारा भांपते ही उनके तोते एक झटके में फुर्र हो गए।