UP News: Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव की रोशनी… मतलब माटी के मजदूरों का सम्मान – INA

‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’. अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाली यह वैदिक प्रार्थना सनातन चिंतन का मूल स्वर है. यह प्रकाश जब किसी साधनहीन के आंगन में आत्मनिर्भरता का उजाला बनकर उतरता है, तब उसकी आभा कई गुना बढ़ जाती है. इस वर्ष अयोध्या में सरयू के तट पर जब 30 लाख दीप जगमगाएंगे, तो यह केवल त्रेतायुग की स्मृतियों का उत्सव भर नहीं होगा. यह उन हाथों के सम्मान का पर्व भी होगा, जिन्होंने मिट्टी को आकार देकर इस प्रकाश को संभव बनाया है.
इस आयोजन के लिए 33 लाख दीयों का आदेश दिया जाना यह बताता है कि दीपोत्सव धार्मिक परंपरा से आगे बढ़ गया है. यह उन ‘माटी के पुजारियों’ के लिए अवसरों का विस्तृत आकाश बन गया है, जिनके चाक की गति आधुनिकता की दौड़ में मंद पड़ने लगी थी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सांस्कृतिक गौरव और सुशासन के मेल से जो मॉडल उभरा है, उसमें आस्था रोजगार से जुड़ी है और विकास की किरणें समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुंच रही हैं.
पुश्तैनी हुनर की धड़कन
पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय की अवधारणा का मूल यह है कि आर्थिक योजनाओं की कसौटी समाज के शिखर पर बैठे व्यक्ति की समृद्धि नहीं, बल्कि सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की दशा होनी चाहिए. अयोध्या का दीपोत्सव इसी विचार को धरातल पर उतारता दिखता है. मिट्टी का एक छोटा दीया केवल जल, माटी और अग्नि का मेल नहीं होता. उसमें कुम्हार का पसीना है, उसके परिवार की आशाएं हैं और पुश्तैनी हुनर की धड़कन है.
एक दशक पहले तक यह हुनर दम तोड़ता दिखाई दे रहा था. तब की सरकारों ने भी इन शिल्पियों के बारे में सोचने की जहमत नहीं उठाई. जिन हाथों में मिट्टी से सोना गढ़ने का कौशल था, वे मजबूरी में काम की तलाश में महानगरों की ओर निकल पड़े. माटी के पुजारी अकुशल मजदूरों के रूप में सड़कों पर दिखाई देने लगे थे.
सुधीर जे. कुमार, एडिटर, वाइल्ड लाइफ टुडे
मुख्यमंत्री योगी आदित्य़नाथ ने सत्ता में आते ही पारंपरिक हुनर की ओर अपना ध्यान केंद्रित किया. एक जिला-एक उत्पाद के रूप में उन्होंने पहला कदम आगे बढ़ाया और दीपोत्सव के विराट स्वरूप ने इस पलायन को रोक दिया. जो युवा गांव और माटी छोड़कर गए थे, उनमें से अधिकांश आज अपनी जड़ों की ओर लौट चुके हैं. हर वर्ष लाखों दीयों की मांग ने ठहरे हुए चाकों को नई गति दी है. इसे केवल रोजगार का सृजन कहना अधूरा होगा. यह परिवारों को बिखरने से बचाने, श्रम को सम्मान दिलाने और एक पूरी पीढ़ी को अपने हुनर पर गर्व करने का अवसर देने की मानवीय पहल है. जब बेटा पिता के साथ चाक पर बैठता है और दोनों की कमाई एक ही आंगन में लौटती है, तब संस्कृति और अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी मिट जाती है.
माटी और अग्नि का मेल नहीं, कुम्हार का पसीना भी
दीपोत्सव के आयोजन की एक बड़ी खूबी इसका विकेंद्रीकरण है. इतनी बड़ी संख्या में दीये किसी एक जिले के कुम्हार नहीं बना सकते थे, इसलिए अयोध्या के दीपोत्सव का लाभ अवध और पूर्वांचल से लेकर प्रदेश के अनेक जिलों तक फैला है. गोंडा, बस्ती, गोरखपुर और आजमगढ़ से लेकर बुंदेलखंड तक की माटी अयोध्या की ओर चल पड़ी है. अलग-अलग जिलों के कुम्हार हफ्तों पहले से दीये गढ़कर भेज रहे हैं. ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का यह सजीव उदाहरण है, जहां एक स्थानीय उत्पाद बड़े सांस्कृतिक आयोजन के सहारे विश्व मंच पर दिखाई देने लगता है. जब आर्थिक अवसर इस तरह बंटते हैं, तो उनका लाभ कुछ गिने-चुने हाथों में सिमटकर नहीं रहता. वह नीचे तक पहुंचता है और उसका सीधा हिस्सा उस शिल्पकार को मिलता है, जो अपने श्रम से माटी को रूप देता है. योगी सरकार में यही अंत्योदय का साकार रूप है.
यह गर्व की बात है कि अयोध्या का दीपोत्सव गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है. यह उपलब्धि केवल शासन, प्रशासन या पर्यटन विभाग की नहीं है. इस कीर्तिमान का सबसे सच्चा हिस्सेदार वह गुमनाम कुम्हार है, जिसके गढ़े दीये सरयू के घाटों को आलोकित करते हैं. यह उस सम्मान की स्वीकृति है, जिसकी प्रतीक्षा माटी के इन पुजारियों ने पीढ़ियों तक की. एक समय कुम्हारों को सामाजिक ढांचे के हाशिये पर देखा जाता था. आज वे विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजन के सीधे भागीदार हैं. जब वे टेलीविजन के परदे पर या अखबार के पन्नों में अपने बनाए दीयों से सजे घाट देखते हैं, तो उनके भीतर जो गर्व जागता है, उसे किसी आर्थिक पैमाने पर नहीं तौला जा सकता. यही आत्मगौरव प्रदेश की नई सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना की नींव है.
रोजगार और उद्यमशीलता का माध्यम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि की विशेषता यह है कि उन्होंने धर्म और संस्कृति को केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रखा, उसे रोजगार और उद्यमशीलता का माध्यम बना दिया. जब नीतियां सही नीयत से बनती हैं, तो उनका असर समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है. माटी कला बोर्ड के गठन और कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने से इस पारंपरिक पेशे में नई ऊर्जा आई है. 33 लाख दीयों के आदेश ने कुम्हारों को सुनिश्चित बाजार दिया है, बिचौलियों की भूमिका घटाई है और उनके श्रम को उचित मूल्य दिलाने का रास्ता खोला है. इससे एक ऐसा चक्र बन रहा है, जिसमें आस्था से पर्यटन बढ़ता है, पर्यटन से स्थानीय व्यापार को गति मिलती है, और व्यापार से सबसे अंतिम व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार आता है.
आधुनिक युवा अपनी जड़ों से जुड़ रहा
प्रदेश के कुम्हारों और माटी के शिल्पकारों के लिए यह उन्हीं अच्छे दिनों के आने का समय है. सिर्फ माटी के दीयों तक उनका हुनर सीमित नहीं रह गया है. माटी की अन्य कलाकृतियां, मूर्तियां और शोपीस अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं. ट्रेड शो का हिस्सा बन रहे हैं और सबसे खास बात यह कि वर्तमान पीढ़ी अपनी माटी से बनी कलाकृतियों को आत्मगौरव के साथ घरों में ले जा रही है. आधुनिक युवा अपनी जड़ों से जुड़ रहा है. यह वह पहलू है जो सीधे तौर पर दिखाई भले न दे, लेकिन इसका अहसास किया जा सकता है. कितने ही शहरों में कुल्हड़ की चाय युवाओं की पहली पसंद बन चुकी है, जो माटी कला के हुनर से जुड़े लोगों की आर्थिकी तक पहुंचती है.
अयोध्या का दीपोत्सव वस्तुतः एक महायज्ञ है. उसमें जलने वाला तेल भले भौतिक हो, पर उसकी लौ से जो प्रकाश फैल रहा है, वह उत्तर प्रदेश के स्वावलंबी, समावेशी और समृद्ध भविष्य का मार्ग दिखा रहा है. यह उत्सव माटी का है, माटी से जुड़े मनुष्य का है और उसकी अदम्य जिजीविषा का है. इस दीपावली जब सरयू के घाट लाखों दीपों से दमकें, तो उस दमक के पीछे चाक पर घूमते उन माटी सने हाथों को भी याद करिएगा, जिनके बिना यह प्रकाश संभव ही नहीं था. (लेखक के निजी विचार हैं)
Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में दीपोत्सव की रोशनी… मतलब माटी के मजदूरों का सम्मान
Copyright Disclaimer :-Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for “fair use” for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing., educational or personal use tips the balance in favor of fair use.
Credit By :-This post was first published on https://www.tv9hindi.com/, we have published it via RSS feed courtesy of Source link,