इंसान का शरीर धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा:अब 37 डिग्री नहीं रहा सामान्य तापमान, 150 साल में बदल गया इंसानी शरीर- INA NEWS

करीब 150 साल पहले इंसानों के शरीर का औसत तापमान आज के मुकाबले ज्यादा था। तब 37 डिग्री सेल्सियस को सामान्य तापमान का पैमाना माना गया था। अब कई रिसर्च में स्वस्थ व्यक्ति के शरीर का औसत तापमान घटकर करीब 36.4 डिग्री सेल्सियस पाया गया है। BBC की रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिक इसकी वजह समझने की कोशिश कर रहे हैं। क्या पुराने समय में तापमान मापने में गलती होती थी या बेहतर स्वास्थ्य और बदलती जीवनशैली से शरीर का तापमान घटा है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसके पीछे दोनों वजहें हो सकती हैं। 37 डिग्री को सामान्य तापमान किसने माना? 1860 के दशक में जर्मनी के डॉक्टर कार्ल वंडरलिच ने बुखार और शरीर के तापमान पर अध्ययन किया। उन्होंने करीब 15 साल तक 25 हजार मरीजों के तापमान मापा। उन्होंने इससे 10 लाख से ज्यादा रीडिंग जुटाईं। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने स्वस्थ वयस्कों का औसत तापमान 37 डिग्री सेल्सियस यानी 98.6 डिग्री फारेनहाइट बताया। 38 डिग्री से ऊपर के तापमान को बुखार का संकेत माना। उनके पास मरीजों का बड़ा आंकड़ा था। इसी वजह से 37 डिग्री का आंकड़ा सामान्य तापमान का मानक बन गया। आज शरीर का औसत तापमान कम क्यों है? स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की संक्रामक रोग विशेषज्ञ जूली पार्सोनेट की टीम ने अमेरिका के करीब 1.90 लाख लोगों के तापमान से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया। ये आंकड़े 1862 से 2017 के बीच जुटाए गए थे। रिसर्च के मुताबिक, आज अमेरिकी वयस्कों का औसत तापमान करीब 36.39 डिग्री सेल्सियस है। 19वीं सदी की शुरुआत के मुकाबले अमेरिकी पुरुषों का तापमान करीब 0.59 डिग्री कम हुआ है। यह बदलाव सिर्फ विकसित देशों तक सीमित नहीं है। अमेजन के जंगलों में रहने वाले त्सिमाने समुदाय का औसत तापमान 2000 के शुरुआती वर्षों में 37 डिग्री था, जो 2018 तक घटकर 36.5 डिग्री रह गया। इस दौरान उनके रहन-सहन में भी बदलाव आया। शरीर का तापमान घटने की 3 वजहें क्या 150 साल पहले तापमान मापने में गलती हुई थी? एक्सपर्ट्स ने वंडरलिच के समय इस्तेमाल हुए कांच के थर्मामीटर की जांच की। उनके मुताबिक, इस थर्मामीटर की माप आधुनिक उपकरणों से करीब 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकती थी। उस समय पारे वाले थर्मामीटर करीब 30 सेंटीमीटर लंबे होते थे और तापमान मापने में 15 से 20 मिनट लगते थे। वंडरलिच बगल में थर्मामीटर लगाकर तापमान मापते थे, जबकि आज आमतौर पर मुंह से तापमान लिया जाता है। इसलिए पुराने और नए आंकड़ों की सीधी तुलना करना मुश्किल है। वैज्ञानिक पुराने आंकड़ों को सही क्यों मानते हैं? एक्सपर्ट्स 1862 से 1930 के बीच अमेरिकी सैनिकों के तापमान रिकॉर्ड का भी अध्ययन किया। इसमें पहले जन्मे लोगों का औसत तापमान बाद में जन्मे लोगों से ज्यादा मिला। 1971 से 2017 के बीच जुटाए गए दो अन्य आंकड़ों में भी तापमान घटने का यही रुझान दिखा। इससे संकेत मिलता है कि गिरावट की वजह सिर्फ पुराने थर्मामीटर नहीं थे। शरीर का तापमान किन 4 बातों से बदलता है? क्या 37 डिग्री को सामान्य तापमान मानना सही है? नई रिसर्च के बाद 37 डिग्री सेल्सियस को सामान्य तापमान का एकमात्र मानक मानने पर सवाल उठे हैं। कुछ मेडिकल किताबों और चिकित्सा डेटाबेस में भी तापमान के नए औसत आंकड़ों को जगह मिली है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ एक रीडिंग से किसी व्यक्ति की सेहत का फैसला नहीं करना चाहिए। उम्र, दिन का समय और व्यक्ति की सामान्य स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है। शरीर का तापमान हर व्यक्ति में और दिन के अलग-अलग समय पर बदल सकता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें…. G20 में पहली बार मेजबानी हैंडओवर नहीं हुई:ट्रम्प के न आने से नाराज था साउथ अफ्रीका, अमेरिका बोला- यह ठीक नहीं किया साउथ अफ्रीका में 20वां G20 समिट रविवार को बिना औपचारिक हैंडओवर के समाप्त हो गया। साउथ अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने किसी अमेरिकी अधिकारी को गवेल (अध्यक्षता का प्रतीक हथौड़ा) नहीं सौंपा। पूरी खबर पढ़ें…
Source link
यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |