बांग्लादेश- टैगोर की तस्वीर पर कालिख पोती:पोस्टर लगाकर लिखा- मुस्लिम विरोधियों की यहां कोई जगह नहीं; ढाका यूनिवर्सिटी बनाने का विरोध करने के आरोप- INA NEWS

बांग्लादेश में कवि रवींद्रनाथ टैगोर की तस्वीर पर कालिख पोती गई। घटना आज खुलना रेलवे स्टेशन के पास हुई। टैगोर की तस्वीर के पास कुछ पोस्टर भी लगाए गए, जिनमें लिखा था कि मुस्लिम विरोधी टैगोर की यहां कोई जगह नहीं है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी टैगोर पर ढाका यूनिवर्सिटी की स्थापना का विरोध करने का आरोप भी लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री रहमान के दौरे से पहले हुई यह घटना प्रधानमंत्री तारिक रहमान खुलना शहर में दौरे पर आने वाले हैं। इसके चलते ही स्थानीय प्रशासन ने रेलवे स्टेशन की दीवार पर ये चित्र बनवाए थे। टैगोर के अलावा फकीर लालन शाह, काजी नजरुल इस्लाम, कलाकार एसएम सुल्तान और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान समेत कई जानी-मानी हस्तियों के चित्र थे। दीवार पर सुंदरबन, 60 गुंबद वाली मस्जिद और जूट उद्योग से जुड़े चित्र भी बनाए गए थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने टैगोर की तस्वीर पर ही कालिख पोती। टैगोर पर मुस्लिम विरोधी होने के आरोप क्यों लगे? पहली वजह- 1905 में बंगाल का विभाजन ब्रिटिश सरकार ने 1905 में बंगाल को दो हिस्सों में बांट दिया था। पूर्वी बंगाल में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, जबकि पश्चिमी बंगाल में हिंदू आबादी ज्यादा थी। टैगोर ने इस विभाजन का विरोध किया था। उन्होंने बंगाल के लोगों को एकजुट करने के लिए राखी बंधवाने जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और ‘आमार सोनार बांग्ला’ गीत लिखा। लेकिन पूर्वी बंगाल के कई मुसलमानों को इस आंदोलन से फायदा होता नहीं दिख रहा था। उन्हें उम्मीद थी कि नए प्रांत से उन्हें प्रशासन और शिक्षा में ज्यादा अवसर मिलेंगे। इसलिए कुछ मुस्लिम नेताओं ने विभाजन का समर्थन किया। टैगोर के विरोध को बाद में कुछ लोगों ने मुसलमानों के राजनीतिक हितों के विरोध के रूप में पेश किया। जबकि उनका विरोध बंगाल को धर्म के आधार पर बांटने के खिलाफ था। दूसरी वजह- ढाका यूनिवर्सिटी का विरोध करने का आरोप टैगोर पर यह भी आरोप लगाया जाता है कि उन्होंने 1912 में ढाका यूनिवर्सिटी खोलने का विरोध किया था। आलोचकों का कहना है कि टैगोर को डर था कि ढाका में नई यूनिवर्सिटी बनने से कोलकाता का शैक्षणिक प्रभाव कम हो जाएगा। 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया था। इसके तहत पूर्वी बंगाल और असम को मिलाकर अलग प्रांत बनाया गया था। पूर्वी बंगाल में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी। इसके बाद जब ढाका यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव आया, तो कोलकाता के कुछ नेताओं को लगा कि इससे बंगाल का एक और बंटवारा हो जाएगा। उनका तर्क था कि अलग यूनिवर्सिटी बनने से बंगाल के हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी बढ़ सकती है। हालांकि टैगोर के ढाका यूनिवर्सिटी का विरोध करने के समर्थन में कोई एतिहासिक सबूत नहीं हैं। इतिहासकारों ने भी इसे गलत बताया है। 18 महीने में टैगोर की विरासत पर 3 हमले अप्रैल 2025, कुमरखाली, कुश्तिया: टैगोर की एक दीवार पर बनी तस्वीर पर काली स्याही पोत दी गई। इससे उनका चेहरा और नीचे लिखा नाम खराब हो गया। जून 2025, शाहजादपुर, सिराजगंज: टैगोर के पुश्तैनी घर ‘रबींद्र कचहरीबाड़ी’ पर भीड़ ने हमला किया। ऑडिटोरियम, दरवाजों और खिड़कियों को नुकसान पहुंचाया गया। अक्टूबर 2026, ढाका: बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी के बाहर दीवार पर बनी टैगोर की तस्वीर पर काली स्याही पोतने की कोशिश की गई। ————————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में भारतीयों के साथ दिवाली मनाई: ओवल ऑफिस में दीया जलाया, हनुमान चालीसा भेंट की गई; ‘जुग-जुग जिओ’ का आशीर्वाद मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने भारतीय मूल के अधिकारियों और कारोबारियों के साथ ओवल ऑफिस में दीया जलाया। इस दौरान उन्हें हनुमान चालीसा की एक प्रति भी भेंट की गई। पूरी खबर पढ़ें…

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