भास्कर अपडेट्स:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ठोस आरोप न हों तो, घरेलू हिंसा का केस नहीं, पति के खिलाफ ₹170 करोड़ का दावा खारिज- INA NEWS

सुप्रीम कोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की ओर से पति और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज घरेलू हिंसा का केस रद्द कर दिया। कोर्ट ने महिला के 170 करोड़ रुपए के सोने (120 करोड़ की ज्वेलरी और 50 करोड़ के गोल्ड बिस्किट) के दावे को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर घरेलू हिंसा के केस में परिजनों पर कोई ठोस आरोप न हों, तो मुकदमे को तुरंत खत्म कर देना चाहिए ताकि परिवार को बेवजह न घसीटा जाए। आज की अन्य बड़ी खबरें… पुणे में हॉस्टल के कमरे में संगीत छात्रा का शव फंदे से लटका मिला पुणे जिले के मुलशी तहसील स्थित एक संस्थान के हॉस्टल में 25 वर्षीय संगीत छात्रा का शव फंदे से लटका मिला। मृतक की पहचान इंदौर निवासी रेनुका लिखिते के रूप में हुई है, जो संगीत में पोस्टग्रेजुएशन कर रही थी और बांसुरी वादक थी। पुलिस के मुताबिक, कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। जब वह फोन नहीं उठा रही थीं, तो एक रिश्तेदार हॉस्टल पहुंचा। कमरा अंदर से बंद था, जिसके बाद गैलरी से अंदर जाकर उनका शव मिला। पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दिल्ली कोर्ट ने I-PAC निदेशक विनेश चंदेल को 10 दिन की ED हिरासत में भेजा दिल्ली की एक अदालत ने I-PAC के सह-संस्थापक और निदेशक विनेश चंदेल को 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने कहा कि शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग, फंड डायवर्जन और हवाला लेनदेन में उनकी सक्रिय भूमिका के संकेत मिले हैं। ईडी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के जरिए फंड्स को हवाला चैनलों से इधर-उधर किया गया और जांच के दौरान सबूत मिटाने के लिए ईमेल व वित्तीय रिकॉर्ड डिलीट करने के निर्देश भी दिए गए। अदालत ने 23 अप्रैल तक ईडी कस्टडी मंजूर करते हुए सीसीटीवी निगरानी और हर 48 घंटे में मेडिकल जांच के निर्देश दिए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश- एक-तिहाई सजा काट चुके कैदियों को तुरंत रिहा किया जाए दिल्ली हाईकोर्ट ने विचाराधीन कैदियों के अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस गिरीश कठपालिया की पीठ ने निर्देश दिया है कि जिन कैदियों ने अपने अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम संभावित सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा जेल में बिता लिया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह आदेश दिया। पीठ ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि आरोपी अधिकतम 7 साल की सजा वाले मामले में पहले ही एक-तिहाई से अधिक समय जेल में काट चुका है, जबकि उसका ट्रायल (मुकदमा) अभी शुरू भी नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद पहली बार अपराध करने वाले कई आरोपी लंबे समय से जेलों में बंद हैं, जो कि न्याय प्रणाली की विफलता को दर्शाता है। सुनवाई के दौरान इस मामले में आरोपी पर खुद की गलत पहचान बताकर शिकायतकर्ता और उसकी बेटी से धोखाधड़ी करने का आरोप था। अभियोजन पक्ष ने वॉट्सएप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं बैंक दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की कोशिश की। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को भ्रामक करार दिया।

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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