दिल्ली होटल अग्निकांड- गुरुग्राम के CA का पूरा परिवार खत्म:ICU में भर्ती पिता का भी निधन; देखरेख के लिए आए आठ लोग जिंदा जले थे- INA NEWS

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल ‘फ्लोरिश स्टे’ में हुए अग्निकांड में जान गंवाने वाले गुरुग्राम के विवेक अग्रवाल का पूरा परिवार खत्म हो गया। मंगलवार को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती उनके पिता राधेश्याम अग्रवाल (80) ने भी दम तोड़ दिया। राधेश्याम कई दिनों से ICU में वेंटिलेटर पर थे। विवेक अग्रवाल चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) थे। पिता के अस्पताल में भर्ती होने के कारण वह 3 जून को अपनी मां प्रेमलता अग्रवाल, पत्नी तर्जनी अग्रवाल और बेटियों जीविशा व वारिया के साथ होटल में ठहरे थे। राजस्थान से उनके मौसा-मौसी जवरी लाल और कमला तथा मामा अशोक पंसारी भी उनके साथ होटल में मौजूद थे। तड़के होटल में आग लगने से विवेक समेत सभी आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। पहले CA विवेक अग्रवाल के परिवार के बारे में जानिए…. खुद इंश्योरेंस कंपनी में हेड, पत्नी मिसेज इंडिया 2023 रही विवेक अग्रवाल गुरुग्राम के सेक्टर-46 में रहते थे। वह इंश्योरेंस देखो कंपनी में फाइनेंशियल हेड के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल पेशे से इवेंट मैनेजमेंट का काम संभालती थीं। इसके साथ ही वह वंचित बच्चों की मदद के लिए एक एनजीओ भी चलाती थीं। तर्जनी को मॉडलिंग का भी शौक था। अपनी प्रतिभा और खूबसूरती के दम पर उन्होंने वर्ष 2023 में ‘मिसेज इंडिया’ का खिताब जीता था। जीविशा कर रही थीं इंजीनियरिंग, वारिया 11वीं की छात्रा थीं बड़ी बेटी जीविशा अग्रवाल बेंगलुरु में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही थीं। वह सेकेंड सेमेस्टर की छात्रा थीं। वहीं छोटी बेटी वारिया अग्रवाल 11वीं कक्षा में पढ़ती थीं। परिवार में जीविशा और वारिया को प्यार से ‘एंजल’ और ‘पर्ल’ कहकर पुकारा जाता था। 2 जून को होटल में कमरे लिए थे विवेक ने अपने बीमार पिता राधेश्याम अग्रवाल को साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया था। बेंगलुरु में बीटेक कर रही उसकी बड़ी बेटी जीविशा को दादा के बीमार होने का पता चला तो वो फ्लाइट पकड़कर सीधे दिल्ली आ गई। 2 जून को पूरा परिवार अस्पताल के पास ही स्थित मालवीय नगर के एक होटल में रुके थे। इन्होंने दो कमरे बुक किए थे। राजस्थान से मौसा-मौसी और मामा भी आए राधेश्याम अग्रवाल की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही राजस्थान के अजमेर से विवेक के मौसा, रिटायर्ड बैंक अधिकारी जवरी लाल अग्रवाल (70), और मौसी कमला अग्रवाल (68) दिल्ली पहुंच गए। उनके साथ विवेक के मामा तथा किशनगढ़ की लक्ष्मीनारायण कॉलोनी निवासी मार्बल कारोबारी अशोक पंसारी भी आए थे। तीनों ने भी मालवीय नगर स्थित उसी होटल में कमरा बुक करा लिया, जहां विवेक और उनका परिवार ठहरा हुआ था। मामा के बेटे को किया था आखिरी कॉल सुबह ब्रेकफास्ट के समय होटल में आग लग गई थी। आग की लपटों और धुएं के गुबार के बीच जब बचने का कोई रास्ता नहीं बचा, तो कमरे के भीतर से विवेक अग्रवाल ने बदहवास हालत में अपने मामा के बेटे को फोन मिलाया। उन्होंने रोते हुए कहा, “हम चारों तरफ से भीषण आग में फंस गए हैं, दम घुट रहा है… बस हमारी बेटियों को कैसे भी करके बचा लो”। जब तक उसका भाई दिल्ली के कोटला से आया, तब तक पूरा परिवार आग की चपेट में आ चुका था। यह विवेक की जिंदगी की आखिरी कॉल साबित हुई।

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यह पोस्ट सबसे पहले भस्कर डॉट कोम पर प्रकाशित हुआ हमने भस्कर डॉट कोम के सोंजन्य से आरएसएस फीड से इसको रिपब्लिश करा है |

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