Delhi-Ncr 12 जस का तस, 7 में संशोधन और 2 के बदले नाम… दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के नामकरण पर सियासत तेज- #INA

दिल्ली की मुख्यमंत्री और राज्य नाम प्राधिकरण (एसएनए) की चेयरमैन रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली मेट्रो के कुछ पुराने और प्रस्तावित स्टेशनों के नामों में बदलाव किया गया है. प्रस्तावित 21 स्टेशनों के नामों की समीक्षा के बाद 12 नाम जस का तस रखने, 7 में संशोधन करने और 2 स्टेशनों के नाम पूरी तरह बदलने का निर्णय लिया गया है. यह समीक्षा दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के आधार पर की गई.

12 नाम जस का तस

मजलिस पार्क, भलस्वा, हैदरपुर बादली मोड़, दीपाली चौक, यमुना विहार, भजनपुरा, खजूरी खास, सूरघाट, झड़ौदा माजरा, बुराड़ी, पुष्पांजलि और मौजपुर-बाबरपुर के नाम पहले जैसे ही रहेंगे.

7 स्टेशनों के नामों में संशोधन

  1. उत्तरी पीतमपुरा-प्रशांत विहार (पहले: प्रशांत विहार)
  2. जगतपुर-वजीराबाद (पहले: जगतपुर)
  3. नानक प्याऊ-डेरावल नगर (पहले: डेरावल नगर)
  4. खानपुर-वायुसैनाबाद (पहले: खानपुर)
  5. नानकसर-सोनिया विहार (पहले: सोनिया विहार)
  6. राम मंदिर मयूर विहार (पहले: मयूर विहार पॉकेट-1)
  7. मंगोलपुर कलां-वेस्ट एन्क्लेव (पहले: वेस्ट एन्क्लेव)

2 स्टेशनों के नाम बदले

  • हैदरपुर गांव (पहले: नॉर्थ पीतमपुरा)
  • मधुबन चौक (पीतमपुरा) इस स्टेशन का नाम पूरी तरह बदलकर क्षेत्र की स्थानीय पहचान के अनुरूप रखा गया.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नाम बदलते समय स्थानीय पहचान, ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सिफारिशों को ध्यान में रखा गया है.

नामकरण पर सियासी विवाद

इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आरोप लगाया कि पिछले 24 वर्षों से मेट्रो कॉरिडोर और स्टेशनों के नाम तय करने का अधिकार मेट्रो प्राधिकरण के पास था, जिसे सरकार ने अपने अधीन कर मेट्रो की स्वायत्तता खत्म करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नाम बदलने की राजनीति कर रही है.

उनका आरोप है कि एक लाख करोड़ रुपये के बजट में से 58 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं किए गए और बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने के बजाय नाम बदलने पर जोर दिया जा रहा है. देवेन्द्र यादव ने यह भी कहा कि मेट्रो स्टेशनों के नामों में बदलाव से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को भ्रम और असुविधा हो सकती है. साथ ही मेट्रो स्टाफ के सिस्टम और घोषणाओं में बदलाव करना भी चुनौतीपूर्ण होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही नाम बदलने की राजनीति कर रहे हैं और दिल्ली में सड़कों, योजनाओं और स्कूलों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है.

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि स्थानीय पहचान को मजबूत करने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, नामों में संशोधन से यात्रियों को इलाके की सही पहचान समझने में मदद मिलेगी. फिलहाल, नाम बदलने के फैसले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. जहां सरकार इसे स्थानीय भावना से जुड़ा निर्णय बता रही है, वहीं विपक्ष इसे नाम बदलने की राजनीति करार दे रहा है.

12 जस का तस, 7 में संशोधन और 2 के बदले नाम… दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों के नामकरण पर सियासत तेज


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