Delhi-Ncr आरोप, गिरफ्तारी फिर बरी… केजरीवाल पर कोर्ट का फैसला और CBI का रिपोर्ट कार्ड- #INA

दिल्ली शराब घोटाले में पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने पूरी तरह से दोषमुक्त कर दिया है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने जैसे ही केजरीवाल को क्लीन चिट दी, सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक इसकी चर्चा शुरू हो गई. सवाल उठे कि क्या केजरीवाल को शराब घोटाले में फंसाया गया था? खुद केजरीवाल मीडिया से बात करने कोर्ट से बाहर आए लेकिन फैसला सुनने के बाद वो इतने भावुक हो गए थे कि उनकी आंखों में आंसू थे और गला रुंध गया था. वे ज्यादा बोल नहीं पाए. तभी उनके साथी मनीष सिसोदिया ने उन्हें किसी तरह संभाला.
अरविंद केजरीवाल ने इसके बाद मीडिया से बात करते हुए सबसे पहले यही कहा, मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है. इन्होंने झूठा केस लगाया. आज ये साबित हो गया कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार है. अब बात करते हैं कि कोर्ट का फैसला कैसे केजरीवाल के लिए राजनीतिक जीवनदान है और कोर्ट ने फैसले में कैसे जांच एजेंसी पर सवाल उठाए?
शुरू से ये दावा कर रही थी आम आदमी पार्टी
शराब घोटाले के मामले में जब मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया गया था, तभी से आम आदमी पार्टी ये कहती आ रही थी कि उनके नेताओं को फंसाया जा रहा है. अब जब कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को बरी किया, तो ये बात साबित भी हुई. खुद कोर्ट ने कहा कि हजारों पन्नों की चार्जशीट में कई खामियां हैं और उसमें लगाए गए आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते.
कोर्ट ने ये भी कहा कि चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो आरोपों की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं. आबकारी नीति के निर्माण में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी. CBI ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, जो ठोस साक्ष्यों के बजाय मात्र अनुमान पर आधारित थी. इतना ही नहीं, कोर्ट ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं कि क्या उन्होंने जानबूझकर इस मामले में किसी को फंसाने की कोशिश की है.
बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया नाम
कोर्ट ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का नाम लेकर विशेष तौर पर कहा कि अरविंद केजरीवाल का नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया. जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है. सिसोदिया पर कोर्ट ने कहा कि उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई.
कोर्ट ने मुख्य आरोपी कुलदीप को भी बरी किया और कहा कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं था. कुल मिलाकर कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को न केवल बरी किया, बल्कि जांच पर सवाल भी उठाए और इस मामले को इन दोनों नेताओं को फंसाने की साजिश का मामला माना.
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की
हालांकि लोअर कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है, यानी मुसीबत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अभी ED का केस जारी है, जबकि कई दूसरे मामलों में भी उनके खिलाफ जांच चल रही है. वहीं, बरी होने के बाद आज अरविंद केजरीवाल पुराने रंग में दिखे. अदालत के फैसले के करीब साढ़े पांच घंटे बाद उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर नुकीले बाण चलाए.
अरविंद केजरीवाल के लिए ये एक भावुक लम्हा है लेकिन इस लम्हे में हो सकता है उन्हें खुद अपने लगाए हुए आरोपों का भी फ्लैश बैक आए. एक दौर था जब अरविंद केजरीवाल हर दूसरे दिन किसी ना किसी पर आरोप लगाते थे और उसके भ्रष्टाचारी होने का दावा करते थे. हालांकि बाद में वो आरोप साबित नहीं हो पाते थे और कई मामलों में उन्हें माफी तक मांगनी पड़ी थी.
बीजेपी पर ये आरोप लग रही कांग्रेस
वैसे कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया थोड़ी बंटी हुई है, बीजेपी रक्षात्मक है, वो सीबीआई का बचाव कर रही है. कांग्रेस बीजेपी पर ही अरविंद केजरीवाल को बचाने का आरोप लग रही है. जबकि समाजवादी पार्टी और TMC जैसे दल अरविंद केजरीवाल के बेदाग होने पर बधाई दे रहे हैं. अब बात करते हैं सीबीआई की, जो कि देश की प्रीमियर जांच एजेंसी है.
देश में जब लोगों को किसी जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं होता है तो वो सीबीआई जांच की मांग करते है, लेकिन इस फैसले में जिस तरह से सीबीआई की जांच पर सवाल उठे हैं वो चिंताजनक है. वैसे CBI की कुल कनविक्शन रेट की बात करें तो 2022 में 74.6% थी और 2024 में 69.1% दर्ज की गई यानी 5% की गिरावट आई है लेकिन ये हर तरह के अपराध का औसत है यानी इसमें भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी और हत्या से लेकर रेप तक के मामले शामिल हैं. नेताओं के खिलाफ सीबीआई की जांच का अलग से कोई आंकड़ा नहीं है.
- अगर कुछ मामलों का जिक्र करें तो 2G Spectrum Case में सीबीआई सजा दिलाने में नाकाम रही
- इस तरह से बोफोर्स घोटाला, कोयला घोटाला और यहां तक कि CWG गेम्स घोटाले में सीबीआई सजा दिलाने में सफल नहीं रही
- इतना ही नहीं, हाईफ्रोफाइल आरूषि तलवार मर्डर केस में भी सबूतों की कमी के कारण आरोपी बरी हुए
- हालांकि चारा घोटाले में लालू यादव और जगन्नाथ मिश्रा जैसे बड़े राजनीतिक नामों को सीबीआई ने सजा दिलवाई है
कोर्ट ने बरी करते हुए दिलचस्प बात कही
दिल्ली की कोर्ट ने केजरीवाल को बरी करते हुए दिलचस्प बात कही कि इस मामले में उन्हें फंसाने की साजिश प्रतीत होती है. ये टिप्पणी इशारा करती है कि देश में भ्रष्टाचार के मामले विरोधियों के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं. इतिहास में कई उदाहरण हैं.
मनमोहन सिंह सरकार पर 2G और कोयला आवंटन जैसे घोटालों के आरोप लगे। सरकार बदनाम हुई, लेकिन बाद में अदालतों में कई आरोप टिक नहीं पाए. पर राजनीतिक छवि पर लगे दाग़ के कारण सत्ता चली गई.
- बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम जैन हवाला कांड में आया तो उन्होंने नैतिकता के आधार पर संसद छोड़ दी. अदालत में दोष सिद्ध नहीं हुआ, मगर उनकी राजनीतिक रफ्तार पर जो ब्रेक लगा, वो फिर कभी पूरी स्पीड नहीं पकड़ पाया.
- इसी कांड की चपेट में शरद यादव और मदन लाल खुराना भी आ गए थे. मदन लाल खुराना को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. बाद में वो बरी हुए लेकिन फिर सीएम नहीं बन पाए. इसे राजनीतिक प्रतिशोध का एक क्लासिक केस माना जाता है.
- 2001 में कारगिल युद्ध के दौरान तब के रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस पर ताबूत घोटाले का आरोप लगा, उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली, लेकिन तब तक उनकी सक्रिय राजनीति खत्म हो चुकी थी.
- इसी तरह तमिलनाडु की सीएम रहीं जयललिता पर तन्सी भूमि घोटाले का आरोप लगा उन्हें मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया, हांलाकि वो फिर से सीएम बनीं.
- राजीव गांधी और बोफोर्स का नाम वर्षों तक साथ-साथ लिया गया. सियासत में आरोप का असर इतना गहरा था कि सत्ता हाथ से फिसल गई. अब अरविंद केजरीवाल पर शराब घोटाले का आरोप लगा. अदालत में फैसला होने से पहले ही एक नैरेटिव सेट हो गया कि भ्रष्टाचार हुआ है, जबकि अदालत का फैसला इसके उलट आया. तो सवाल ये नहीं है कि कौन दोषी है? सवाल ये है कि क्या हमारे लोकतंत्र में भ्रष्टाचार के आरोप लगाना विरोधियों के खिलाफ एक अचूक राजनीतिक हथियार बन चुका है?
रिपोर्ट टीवी9 भारतवर्ष
आरोप, गिरफ्तारी फिर बरी… केजरीवाल पर कोर्ट का फैसला और CBI का रिपोर्ट कार्ड
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