Delhi-Ncr सेलिना जेटली के भाई की UAE से रिहाई की राह होगी आसान! कोर्ट ने MEA को दिया ये निर्देश- #INA

सेलिना के भाई मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश.
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई रिटायर्ड मेजर विक्रांत जेटली की यूनाइटेड अरब अमीरात में हिरासत को लेकर विदेश मंत्रालय को एक आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि वह एक दुबई फर्म को विक्रांत जेटली की कानूनी पैरवी करने के लिए अधिकृत करने का आदेश जारी करे. जस्टिस पुरुषइंद्र कुमार कौरव की कोर्ट ने मामले पर सुनवाई की. कोर्ट ने कहा, अगर विदेश मंत्रालय को आदेश जारी करने में कोई दिक्कत आती है तो एक हलफनामा दाखिल कर जानकारी दें. कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 10 फरवरी को करेगी.
सुनवाई के दौर सरकारी वकील अर्णव मित्तल ने कोर्ट को बताया कि अबू धाबी में दूतावास के अधिकारियों ने 21 जनवरी को विक्रांत जेटली से मुलाकात की और उन्हें स्थानीय वकीलों और लॉ फर्मों के बारे में बताया, जिनका खर्च उन्हीं को उठाना था. एक फर्म, M/s खालिद अलमरी, प्रो बोनो ( बिना फीस लिए ) आधार पर कानूनी पैरवी करने को तैयार है लेकिन विक्रांत जेटली ने कहा कि वकील को रखने का फैसला उनकी पत्नी चारू जेटली लेंगी, न कि याचिकाकर्ता (सेलिना जेटली).
विक्रांत अपनी पत्नी से बात नहीं करना चाहता
सेलिना जेटली की तरफ से पेश हुए एडवोकेट राघव कैकर ने कहा कि विक्रांत अपनी पत्नी से बात नहीं करना चाहता. वह कह रहा है कि उसे तुरंत पैरवी चाहिए. वह 18 महीनों से अंडरट्रायल है. कैकर ने कहा कि हमारी प्रार्थना है कि यह फर्म प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है. कोर्ट बस विदेश मंत्रालय (MEA) को फर्म को अपॉइंटमेंट लेटर देने का निर्देश दे और वह दुबई में सब कुछ संभाल लेगी.
कोर्ट ने पूछा कि चारु जेटली (विक्रांत की पत्नी) कहां हैं? वह आपका साथ क्यों नहीं दे रही हैं? पत्नी सहमति क्यों नहीं दे रही है? सेलिना के वकील ने कहा, मुझे नहीं पता. उसने हमें नहीं बताया कि उसे हिरासत में लिया गया है. राखी के आस-पास जब हमने संपर्क किया, तब हमें पता चला. उसकी जमानत याचिका फाइल करनी है. दुबई में आरोप तय होने के बाद आप बेल के लिए अप्लाई नहीं कर सकते. फर्म ने बेल एप्लीकेशन तैयार कर ली है, उन्हें मिनिस्ट्री से लेटर चाहिए.
अधिकारियों ने काउंसलर एक्सेस में मुलाकात की
कोर्ट दर्ज किया कि अबू धाबी में भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने 21 जनवरी को काउंसलर एक्सेस में मुलाकात की. स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारियों ने विक्रांत जेटली को स्थानीय मान्यता प्राप्त लॉ फर्मों, वकीलों के बारे में बताया जिन्हें खर्च के आधार पर अरेंज किया जा सकता है. एक लॉ फर्म ने सुझाव दिया और उसके पार्टनर ने बिना फीस के केस लड़ने के लिए वॉलंटियर किया.
बताया गया है कि विक्रांत ने बताया कि फैसला उनकी पत्नी चारू जेटली लेंगी. प्रो बोनो आधार पर कोई रुकावट नहीं है कि उन्हें M/s खालिद अलमारी द्वारा रिप्रेजेंट करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती. सिर्फ़ इस वजह से कि फर्म का एंगेजमेंट पत्नी की सहमति से होगा, यह कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार, विदेश मंत्रालय को फर्म के पक्ष में उचित आदेश जारी करने दें, जिससे उन्हें दुबई और अबू धाबी में सभी कामों के लिए विक्रांत जेटली को रिप्रेजेंट करने का अधिकार मिल सके.
इसमें कोई रुकावट नहीं आएगी
अगर ऊपर दिए गए निर्देश पर कार्रवाई न करने का कोई नियम है, तो उसे अगली तारीख पर एफिडेफिट के ज़रिए रिकॉर्ड पर लाया जाए. कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान दिया जा सकता है कि किसी को भी कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा क्योंकि फर्म प्रो बोनो पैरवी करेगी. इसमें कोई रुकावट नहीं आएगी. वैसे भी किसी को कोई कानूनी खर्च नहीं उठाना पड़ेगा. सच तो यह है कि उसे रिप्रेजेंट किया जाना चाहिए. पत्नी या मां के न होने पर भी कोई बिना रिप्रेजेंटेशन के नहीं रह सकता. सिर्फ़ यही वजह नहीं होनी चाहिए.
बता दें कि अभिनेत्री सेलिना जेटली ने अपने भाई विक्रांत जेटली को UAE में हिरासत में लिए जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और दावा किया था कि उनके भाई को हिरासत में एक साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है. मगर, परिवार को विक्रांत जेटली की स्थिति को लेकर सही जानकारी नहीं दी गई है. याचिका में सेलिना जेटली ने कोर्ट से मांग मांग की थी कि वो विदेश मंत्रालय (MEA) को उनके भाई की रिहाई में मदद के लिए पर्याप्त कानूनी, मेडिकल और नियमित कांसुलर की पहुंच उपलब्ध कराने का निर्देश दें.
सेलिना जेटली के भाई की UAE से रिहाई की राह होगी आसान! कोर्ट ने MEA को दिया ये निर्देश
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