Crime – माफिया से विधायक-सांसद तक… बाहुबली अतीक अहमद की कहानी, ‘धुरंधर-2’ में फिर जिंदा हुआ किरदार- #INA

आदित्य धर की ‘धुरंधर-2’ रिलीज के पहले दिन ही तहलका मचा रही है. फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके किरदारों की भी खूब चर्चा हो रही है. इन्हीं में से एक किरदार है ‘आतिफ अहमद’ का, जिसे कभी उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन, सांसद और विधायक रहे अतीक अहमद से जोड़ा जा रहा है. करीब 3 साल पहले प्रयागराज में ही अतीक अहमद और उसके भाई असरफ अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या से पहले अतीक गुजरात के साबरमती जेल में बंद था, जबकि उसका भाई असरफ बरेली सेंट्रल जेल में बंद था. आइए जानते हैं अतीक अहमद के बुलंदियों पर पहुंचने से लेकर अंत तक का सफर…

प्रयागराज (तब इलाहाबाद) के चाकिया मोहल्ले में फिरोज अहमद का परिवार रहता था, जो तांगा चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते थे. फिरोज का बेटा अतीक अहमद हाईस्कूल में फेल हो गया था. इसके बाद पढ़ाई-लिखाई से उसका मन हट गया, वजह उसे जल्द से जल्द अमीर बनना था. इसके लिए अतीक ने शार्ट कट लिया. वह रंगदारी वसूलने लगा. महज 17 साल की उम्र में 1979 में अतीक के सिर हत्या का पहला आरोप लगा. उस समय पुराने शहर में चांद बाबा का दौर था. पुलिस और नेता दोनों चांद बाबा के खौफ को खत्म करना चाहते थे. लिहाजा अतीक अहमद को पुलिस और नेताओं का साथ मिला और उसने चांद बाबा की ही हत्या कर दी.

100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे

यहीं से अतीक के वर्चस्व की कहानी शुरू हुई, जो 44 साल तक हत्या, रंगदारी, किडनैपिंग, धमकी और जमीनों पर कब्जे के बल पर चलती रही. अतीक ने जुर्म का एक पूरा साम्राज्य खड़ा कर दिया. उसके पास गुर्गों की एक पूरी फौज थी, जो अतीक के एक इशारे पर कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहती थी. जिस पुलिस और सफेद पोशों ने अतीक को बढ़ावा दिया, वही उससे खौफ खाने लगे. प्रयागराज और आसपास के जिलों में अतीक अहमद का खौफ साफ दिखता था. अतीक की नजर हमेशा जमीनों पर रहती थी. जो जमीन अतीक को पसंद आ गई, मजाल है कब्जेदार उसे पा पाए. या तो वह सीधे-सीधे अतीक को औने-पौने दाम पर जमीन दे दे, नहीं तो इस दुनिया से चल बसे. यही वजह रही कि धीरे-धीरे अतीक के ऊपर 100 से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हो गए.

Atif Ahmed

प्रयागराज से ही सांसद-विधायक रहा

अतीक अहमद पहली बार 1989 में प्रयागराज की पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बना. उसके बाद वह पांच बार और विधायक बना. अतीक 2004 में प्रयागराज की ही फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुना गया. सांसद चुने जाने के बाद जिस पश्चिम विधानसभा सीट से वह विधायक था, वो सीट खाली हो गई. इस सीट पर उपचुनाव होना था. इसलिए अतीक ने अपने छोटे भाई असरफ अहमद को मैदान में उतारा. इसी बीच बसपा ने कभी अतीक के चेले रहे राजू पाल को टिकट दे दिया. राजू पाल ने अतीक के भाई असरफ को चुनाव हरा दिया. ये हार अतीक पचा नहीं पाया.

विधायक राजू पाल हत्याकांड में आया नाम

25 जनवरी 2005 को अतीक अहमद के गुर्गों ने प्रयागराज में दिनदहाड़े विधायक राजू पाल की गोली मारकर हत्या कर दी. इस हत्याकांड से यूपी में भूचाल आ गया. इस सनसनीखेज हत्याकांड में सीधे तौर पर अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का नाम सामने आया. राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने धूमनगंज थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. मुकदमे में अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ समेत कई अन्य गुर्गों को नामजद किया गया. धीरे-धीरे यही मुकदमा अतीक के अंत की वजह बन गया.

गुजरात की साबरमती जेल में बंद था

2009 में सांसद पद से हटने के बाद धीरे-धीरे अतीक अहमद राजनीतिक हासिए पर चला गया. कुछ चुनावों में निर्दलीय मैदान में उतरा, लेकिन सफलता नहीं मिली. वक्त गुजरता गया और साल आया 2017. यूपी में बीजेपी की सरकार बनी. योगी आदित्यानाथ मुख्यमंत्री बने. धीरे-धीरे माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू हुआ. इसमें अतीक अहमद का नंबर भी आया. अतीक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. कुछ दिन उसे यूपी की कुछ जेलों में रखा गया, फिर गुजरात की साबरमती जेल भेज दिया गया.

उमेश पाल की हत्या के बाद निशाने पर आया

प्रयागराज पुलिस ने अतीक अहमद के गुनाहों के पन्ने पलटने शुरू किए. कोर्ट में मुकदमों की पैरवी तेजी से होने लगी. राजू पाल की हत्या के केस की सुनवाई भी चल रही थी. इस केस में मुख्य गवाह था उमेश पाल. उमेश पाल खुद वकील था और घूमनगंज इलाके में रहता था. 24 फरवरी 2023 को अतीक अहमद के बेटे असद अहमद और कुछ गुर्गों ने उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी. उमेश पाल की हत्या उसके घर के पास की गई. इसका CCTV फुटेज भी सामने आया था.

बेटा असद पुलिस एनकाउंटर में मारा गया

उमेश पाल की हत्या के बाद एक बार फिर यूपी में तूफान आ गया.कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया. सीएम योगी खुद एक्टिव हुए. धीरे-धीरे कर उमेश पाल की हत्या के आरोपी एनकाउंटर में ढेर किए जाने लगे. इसमें अतीक अहमद का बेटा असद भी शामिल था. झांसी में पुलिस ने असद को एनकाउंटर में मार गिराया. उमेश पाल की हत्या में पूछताछ के लिए यूपी पुलिस अतीक अहमद को साबरमती जेल से लेकर प्रयागराज लेकर पहुंची.

2023 को हुई थी अतीक अहमद की हत्या

15 अप्रैल 2023 को जब पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रुटीन चेकअप के लिए जेल से अस्पताल ले जा रही थी तो तीन युवकों ने दोनों भाइयों के ऊपर गोलियां बरसा दीं. ये तीन युवक- लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी पत्रकारों की भीड़ में शामिल थे. गोलियों से छलनी अतीक अहमद और उसके भाई ने दम तोड़ दिया. पूरे देश ने दोनों भाइयों की इस मौत को लाइव देखा.

धुरंधर-2 का ‘आतिफ अहमद’ कौन?

धुरंधर-2 में अतीक अहमद के किरदार को ‘आतिफ अहमद’ नाम दिया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि पाकिस्तान से आने वाली नकली नोटों की खेप को उत्तर प्रदेश के चुनावों में खपाने का जिम्मा ‘आतिफ अहमद’ के पास था. हालांकि नकली नोटों की यह खेप उत्तर प्रदेश में उतर पाती, उससे पहले ही एजेंसियों ने ‘आतिफ अहमद’ को मरवा दिया.

माफिया से विधायक-सांसद तक… बाहुबली अतीक अहमद की कहानी, ‘धुरंधर-2’ में फिर जिंदा हुआ किरदार


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