खबर शहर , Agra News: ऋण-जमा अनुपात 72.70% पहुंचा, लेकिन 14 बैंक कर्ज बांटने में पिछड़े – INA

आगरा। जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ऋण-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) 0.54 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 72.70% पर पहुंच गया है। इसके बावजूद जिले में संचालित 30 प्रमुख बैंकों में से 14 बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 60 प्रतिशत न्यूनतम मानक को हासिल करने में पिछड़ गए हैं। कम सीडी रेशियो वाले बैंकों को प्राथमिकता क्षेत्र में साख वितरण (क्रेडिट फ्लो) बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। बैंकों से कहा गया है कि वे मुद्रा योजना, स्व-सहायता समूहों, वेयरहाउसिंग और स्थानीय व्यापारियों को खुदरा (रिटेल) ऋण देने में तेजी लाएं, ताकि जिले का आर्थिक विकास प्रभावित न हो।

जून 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, जिले की 564 बैंक शाखाओं में कुल 70,650.51 करोड़ रुपये की जमा राशि के मुकाबले केवल 51,363.02 करोड़ रुपये का ऋण बांटा गया। 16 बैंकों का प्रदर्शन मानक से बेहतर रहा, वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 46.62%, इंडियन बैंक 46.52% और यूनियन बैंक 48.95% जैसे प्रमुख सार्वजनिक बैंक लक्ष्य से काफी पीछे हैं।

बैंकों का रिपोर्ट कार्ड (आंकड़े करोड़ रुपये में)

बैंक का नाम कुल शाखाएं कुल जमा कुल ऋण सीडी रेशियो (जून 2026)

-स्टेट बैंक ऑफ इंडिया | 71 | 14,305.17 | 6,668.58 | 46.62%

-केनरा बैंक | 98 | 9,895.94 | 7,260.97 | 73.37% |

-पंजाब नेशनल बैंक | 52 | 7,226.35 | 5,585.34 | 77.29% |

-बैंक ऑफ बड़ौदा | 26 | 5,679.10 | 4,343.42 | 76.48% |

-एचडीएफसी बैंक | 25 | 6,144.35 | 5,428.68 | 88.35% |

– आइसीआइसीआई बैंक | 12 | 3,046.92 | 4,215.25 | 138.34% |

| कुल योग (सभी 30 बैंक) | 564 | 70,650.51 | 51,363.02 | 72.70% |

बड़े सरकारी बैंकों का रवैया सुस्त

एसबीआई, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक और यूको बैंक समेत 14 बैंक 60% मानक से नीचे हैं। एसबीआई के पास सर्वाधिक 14,305.17 करोड़ रुपये की जमा राशि है, लेकिन उसने महज 6,668.58 करोड़ रुपये का लोन जारी किया है। इन बैंकों को साख सीमा बढ़ाने और लंबित लोन आवेदनों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुद्रा और खुदरा ऋण से भरपाई की कवायद

सीडी रेशियो सुधारने के लिए जिला स्तर पर विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। सीडीओ प्रतिभा सिंह ने कहा कि इसके तहत छोटे उद्यमियों, रेहड़ी-पटरी वालों और व्यापारियों को प्राथमिकता पर मुद्रा लोन दिया जाएगा। साथ ही कृषि उत्पाद भंडारण के लिए वेयरहाउस फाइनेंसिंग और महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय मदद देकर साख वितरण में तेजी लाई जाएगी।

अनुपात सुधरने से ऋण वितरण होता आसान

वित्तीय विशेषज्ञ सीए अनिल वर्मा के अनुसार, ऋण-जमा अनुपात यह दर्शाता है कि जमा पूंजी का कितना हिस्सा स्थानीय विकास के लिए कर्ज के रूप में दिया जा रहा है। सीडी रेशियो 60% से कम होने का अर्थ है कि बैंक स्थानीय स्तर पर ऋण बांटने में हिचक रहे हैं। अनुपात सुधरने से आम जनता को होम लोन, कार लोन, कारोबार और शिक्षा लोन आसानी से मिलेंगे, जिससे बाजार में नकदी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।


Credit By Amar Ujala

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