खबर शहर , Agra News: विजय दशमी पर नीलकंठ दर्शन शुभ, किसानों का है मित्र – INA

बाह। विजय दशमी पर नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण वध से पहले नीलकंठ के दर्शन किए थे। भागवताचार्य रामानंद शास्त्री ने बताया कि ब्राह्मण हत्या के पाप से प्रायश्चित के लिए श्रीराम को महादेव ने नीलकंठ रूप में दर्शन दिए थे। यह पक्षी चंबल के बीहड़ों और गांवों में खूब दिखाई देते हैं।
साहित्यकार डॉ. शिव शंकर कटारे ने इस धार्मिक मान्यता की पुष्टि की। बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने नीलकंठ की लहरदार उड़ान का जिक्र किया। बताया कि नीलकंठ की कलाबाजी चंबल आने वाले पर्यटकों को खूब रोमांचित करती है। इसकी घुमावदार उड़ान के कारण इसे इंडियन रोलर भी कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम कोरेशियस बेन्गालेन्सिस है। देसी-विदेशी सैलानी नीलकंठ से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को जानकर अचरज में पड़ जाते हैं। बताया कि नीलकंठ किसानों का मित्र भी है। यह फसलों को कीट मुक्त रखने में सहायता करता है। भृंग, पतंगे, टिड्डियां, झींगुर, ततैया और चींटियां इसके मुख्य भोजन हैं। यह पंख वाले दीमक को भी अपना आहार बनाता है। इसके अतिरिक्त, नीलकंठ छिपकली और सांप जैसे छोटे कशेरुकी जंतुओं का भी शिकार करता है। इस प्रकार, यह किसानों की फसलों को नुकसान से बचाता है।
ऐसे होता है रूप और आकार
नीलकंठ के पंख का फैलाव 65 से 74 सेंटीमीटर तक होता है। इसकी लंबाई 30 से 35 सेंटीमीटर और वजन 160 से 180 ग्राम होता है। गर्दन और गला सफेद धारियों के साथ हल्के बैंगनी-भूरे रंग का होता है। स्तन, पीठ और गर्दन भूरे रंग की होती है, जबकि पेट नीले होते हैं। इसके प्राथमिक पंख हल्के नीले रंग की पट्टी के साथ बैंगनी नीले होते हैं, और पूंछ गहरे नीले व आसमानी नीले रंग की होती है।