खबर शहर , UP: आगरा किले के सामने तीन घंटे तक जला कचरा, सैलानी हुए परेशान; काले धुएं से सांस लेना मुश्किल – INA

आगरा मन:कामेश्वर मेट्रो स्टेशन से सटे और आगरा किले के सामने मौजूद रक्षा संपदा विभाग की जमीन पर फेंके गए प्लास्टिक कचरे में बुधवार को किसी ने आग लगा दी। दोपहर 12:30 बजे लगाई गई आग से करीब तीन घंटे तक प्लास्टिक कचरा धू-धू कर जलता रहा। इससे आगरा किले को देखने आए सैकड़ों सैलानी काले धुएं के कारण सांस लेने में मुश्किलों का सामना करते रहे। गेट पर मौजूद लोग तत्काल अंदर पहुंचे। मैदान में महीनों से जमा प्लास्टिक कचरे की इस आग से निकला धुआं पुरानी मंडी और बिजलीघर चौराहे से भी नजर आता रहा।
शहर में 800 मीट्रिक टन कचरा हर दिन निकलता है, जिसमें से 550 से 600 मीट्रिक टन ही कुबेरपुर लैंडफिल साइट पहुंच पाता है। खाली मैदानों और प्लॉटों में जमा कचरा हर दिन आग लगाकर निस्तारित किया जा रहा है। बुधवार को शाहजहां पार्क, आगरा किला और मन:कामेश्वर मेट्रो स्टेशन के पास रक्षा संपदा विभाग की खाली जमीन पर पड़े कचरे में आग लगा दी गई। यहां 2 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कचरा पड़ा हुआ है और इसके पास से ही पानी, गैस और अन्य लाइनें निकल रही हैं। बिजलीघर के व्यापारी श्याम भोजवानी ने बताया कि किले के सामने पुलिस बूथ है और शाहजहां पार्क के सामने ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है, लेकिन तीन घंटे तक कचरा जलता देखकर भी किसी ने आग बुझाने के इंतजाम नहीं कराए। लोगों को सांस लेने में काफी मुश्किल रही।
खेरिया मोड़ पर कचरा जलाने पर 5 हजार का जुर्माना
आगरा। हर दिन प्लास्टिक कचरे को आग लगाकर निस्तारित किया जा रहा है। बुधवार को लोहामंडी जोन स्थित खेरिया मोड़ के निकट मैदान में कूड़ा जला दिया गया। प्लास्टिक कचरा जलाने के कारण काला धुआं उठा तो लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यहां 20 से ज्यादा अस्पताल हैं, जिनमें से ज्यादातर बालरोग विशेषज्ञों के अस्पताल और क्लीनिक हैं, जिस समय कचरे में आग लगाई गई और काला धुआं उठा, उस दौरान अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे हुए थे, जिन्हें काले धुएं के गुबार उठने से सांस लेने में दिक्कत हुई। शिकायत मिलने पर नगर निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर राघवेंद्र सिंह पहुंचे, जिन्होंने मौके पर ही रामू कुमार को कचरा जलाते हुए पकड़ लिया। उससे 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर वसूला गया।
कचरा जलाने से सांस की बीमारी
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्लास्टिक कचरा जलाने से इसमें से घातक गैसें निकलती हैं जो सांस के रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हैं। खासकर बच्चों, बुजुर्गों को प्लास्टिक कचरे के जलाने से निकलने वाली गैसें कई बीमारियों को जन्म देती हैं। कार्बन कणों, पीएम-2.5, सल्फर डाइक्साइड आदि गैसें अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। सीने में जकड़न बढ़ जाती है। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहते हैं तो सीओपीडी, ह्रदय संबंधी रोग, स्ट्रोक, कैंसर आदि बीमारियों के होने की आशंका रहती है। यह आंखों, त्वचा और फेंफड़ों के रोगों को बढ़ाती हैं।
नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि सूखा कचरा खासकर प्लास्टिक कचरा निगम को दें। इसे जलाएं नहीं। इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। कचरा जलाने वालों पर लोग निगरानी रखें और फोटो खींचकर भेजें, निगम उन पर जुर्माना और सख्त कार्रवाई करेगा।