खबर शहर , विश्व गिद्ध संरक्षण दिवस : लुप्तप्राय सफेद गिद्धों से आबाद हुई चंबल – INA

बाह। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में सफेद गिद्ध संकटग्रस्त श्रेणी में दर्ज हैं। अच्छी खबर ये है कि दुनिया में लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे सफेद गिद्धों से चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज आबाद है। नदी किनारे के गांवों के लोगों को संरक्षण के प्रति जागरूक किए जाने से चंबल में सफेद गिद्धों की मौजूदगी बढ़ी है।

बाह के रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि राजस्थान से सटे रेहा से लेकर इटावा से लगे उदयपुर खुर्द तक सफेद गिद्धों की मौजूदगी सुखद अहसास कराती है। जागरुकता एवं संरक्षण के प्रयासों से विलुप्त हुए सफेद गिद्ध अपना कुनबा बढ़ा रहे हैं। पिछले साल गणना में 29 गिद्ध मिले थे। इनका वैज्ञानिक नाम नियोफ्रॉन पर्कनोप्टेरस है। पतली चोंच वाले सफेद गिद्ध की लंबाई 55 से 70 सेमी, वजन 1.50 से 2.50 किग्रा, पंख फैलाव 150 से 175 सेमी होता है। चेहरे की त्वचा पीली नारंगी सी होती है। उन्होंने बताया कि मरे हुए पशुओं के मांस से लेकर नदी के जैविक अपशिष्ट, छोटे स्तनधारी का आहार करने वाले सफेद गिद्ध चंबल की सफाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रजनन सीजन मई-जून में चंबल के कगारों, चट्टानों के ढलानों, गुफाओं में घोंसला बनाकर अंडे दिए थे, जिनसे निकले चूजे बड़े हो गए हैं।

डाइक्लोफिनेक इंजेक्शन लगे पशुओं का मांस खाने से संकट में पड़े गिद्ध

– पशुओं को दर्द और सूजनरोधी इंजेक्शन डाइक्लोफिनेक दिया जाता है। ऐसे मृत पशुओं के मांस खाने से गिद्धों के गुर्दे प्रभावित होने के साथ जान चली जाती है। वर्ष 2006 में डाइक्लोफिनेक को प्रतिबंधित किया गया है। रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि नदी किनारे के ग्रामीणों को प्रतिबंधित इंजेक्शन के इस्तेमाल के दुष्प्रभाव बताए गए। रेहा के प्रधान अजय कौशिक, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि जागरूकता अभियान से ग्रामीणों की सोच और मानसिकता बदली है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया डाइक्लोफिनेक के इस्तेमाल वाले पशुओं के मांस को खाने से गिद्धों की मौत का अंदेशा होने की वजह से इंजेक्शन प्रतिबंधित किया गया है। प्रतिबंधित दवाओं को लेकर पशु पालकों को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है।


Credit By Amar Ujala

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