देहरादून में जिलाधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायत, कई अनियमितताओं के आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

देहरादून।सविन बंसल, जिलाधिकारी देहरादून के खिलाफ राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा गया है, जिसमें उन पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं, नियमों की अनदेखी और पद के दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जिलाधिकारी द्वारा लिए गए कई निर्णय शासन के नियमों के विपरीत हैं और बार-बार अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पत्र में कहा गया है कि—

प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:

1. प्रोटोकॉल में लापरवाही:
उच्च पदस्थ संवैधानिक पदाधिकारियों के प्रोटोकॉल में कथित रूप से अनियमितता और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है।

2. बिना टेंडर कार्य कराना:
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के माध्यम से शहरी क्षेत्रों में बिना विधिवत टेंडर प्रक्रिया के कार्य कराए जाने की बात कही गई है, जिससे नियमों की अनदेखी और पक्षपात के संकेत मिलते हैं।

3. नए भवन के बावजूद पुराने में खर्च:
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत नया कलेक्ट्रेट भवन तैयार होने के बावजूद पुराने भवन में करोड़ों रुपये के निर्माण और साज-सज्जा कार्य कराए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। इसे सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़ा गया है।

4. होमगार्ड और सरकारी वाहन का उपयोग:
होमगार्ड जवानों को प्रोटोकॉल से हटकर उपयोग करने और सरकारी वाहन के आवंटन में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।

5. महिला अधिकारी के उत्पीड़न का आरोप:
एक महिला अधिकारी द्वारा पूर्व में भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए उत्पीड़न संबंधी आरोपों की भी जांच की मांग की गई है।

6. सेवानिवृत्त अधिकारी की भूमिका:
एक सेवानिवृत्त अधिकारी को कथित रूप से बिना शासन की स्वीकृति के महत्वपूर्ण कार्यों में संलिप्त रखने और सरकारी संसाधनों के उपयोग की अनुमति देने पर भी आपत्ति दर्ज की गई है।

7. महत्वपूर्ण पदों पर विवादित तैनाती:
ऐसे कर्मचारियों को अहम जिम्मेदारियां देने का आरोप है जिनकी कार्यशैली पर पूर्व में सवाल उठते रहे हैं, जबकि ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों का बार-बार तबादला किया गया।

8. प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी:
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई फैसले गोपनीय तरीके से लिए गए और मीडिया में अपने पक्ष में खबरें प्रकाशित कराकर वास्तविक मुद्दों को दबाने का प्रयास किया गया।

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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