Sport : Explainer: एक देश, 6 टीमें! जानिए दिलीप ट्रॉफी के जोनल चक्रव्यूह में कैसे बंटते हैं भारत के 28 राज्य #INA

Duleep Trophy: दिलीप ट्रॉफी भारत के सबसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंटों में से एक है. इसमें कुल 6 जोनल टीमें खेलती हैं. बीसीसीआई द्वारा इसे इसके पारंपरिक जोनल फॉर्मेट (Zonal Format) में आयोजित किया जाता है. इस टूर्नामेंट को सिंगल-एलिमिनेशन नॉकआउट फॉर्मेट के तहत खेला जाता है. इसमें पिछले सीजन की विजेता और उपविजेता टीमों को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिलती है, जबकि बाकी बची 4 टीमें आपस में क्वार्टर फाइनल मैच खेलती हैं. तो चलिए, इस आर्टिकल में जानते हैं कि दिलीप ट्रॉफी में हिस्सा लेने वाली टीमें तय कैसे होती हैं? साथ ही, एक जोनल टीम में कितने राज्य शामिल होते हैं?
दिलीप ट्रॉफी में कैसे होता है टीमों का गठन?
दिलीप ट्रॉफी में भारत के अलग-अलग इलाकों के आधार पर 6 जोनल टीमें खेलती हैं. इनमें सेंट्रल जोन, ईस्ट जोन, नॉर्थ जोन, नॉर्थ ईस्ट जोन, साउथ जोन और वेस्ट जोन शामिल हैं. हर जोन की अपनी एक चयन समिति होती है, जिसमें उस इलाके के अलग-अलग राज्य क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधि होते हैं. उदाहरण के लिए, वेस्ट जोन की टीम चुनने के लिए मुंबई, महाराष्ट्र, बड़ौदा, गुजरात और सौराष्ट्र के सिलेक्टर्स एक साथ आते हैं. ये समितियां हर साल जुलाई के आखिर या अगस्त की शुरुआत में बैठक करती हैं और टूर्नामेंट के लिए 15 मुख्य खिलाड़ियों के साथ-साथ कुछ स्टैंडबाय खिलाड़ियों का चयन करती हैं. बीसीसीआई प्रत्येक जोन के लिए एक राज्य संघ को ‘होस्ट या कनवर्टर एसोसिएशन’ नियुक्त करता है. उस राज्य का सचिव जोनल चयन समिति की बैठक बुलाता है और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है.
दिलीप ट्रॉफी में 6 जोनल टीमों का गठन भौगोलिक आधार पर भारत के कुल 28 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और प्रतिष्ठित खेल बोर्ड (जैसे रेलवे और सेना) की कुल 38 रणजी टीमों को मिलाकर किया जाता है. दिलीप ट्रॉफी में राज्यों को भौगोलिक स्थिति के आधार पर इस तरह विभाजित किया गया है:
| जोन (Zone) | शामिल राज्य और क्रिकेट एसोसिएशन (रणजी टीमें) | कुल टीमें |
|---|---|---|
| 1. नॉर्थ जोन | दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ और सर्विसेज (सेना) | 7 |
| 2. साउथ जोन | कर्नाटक, तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश, हैदराबाद, केरल, गोवा और पुदुचेरी | 7 |
| 3. वेस्ट जोन | मुंबई, महाराष्ट्र, बड़ौदा, गुजरात और सौराष्ट्र | 5 |
| 4. सेंट्रल जोन | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, विदर्भ और रेलवे | 7 |
| 5. ईस्ट जोन | बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा, असम और त्रिपुरा | 6 |
| 6. नॉर्थ ईस्ट जोन | अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम | 6 |
| कुल योग | पूरे भारत के राज्यों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व | 38 रणजी टीमें |
रणजी परफॉरमेंस कोटा:
जोनल चयन के दौरान, हर राज्य के चयनकर्ता अपने यहां के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों (जैसे पिछले रणजी सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले) का नाम टेबल पर रखते हैं. आपसी सहमति और आंकड़ों की तुलना के बाद, सबसे बेहतरीन 15 खिलाड़ियों को जोनल टीम के स्क्वाड में शामिल किया जाता है.
टूर्नामेंट का फॉर्मेट और शेड्यूल कैसे तय होता है?
बीसीसीआई द्वारा दिलीप ट्रॉफी का आयोजन अपने घरेलू सीजन की शुरुआत में, आमतौर पर अगस्त-सितंबर के महीनों में, एक शॉर्ट नॉकआउट फॉर्मेट में किया जाता है. इस टूर्नामेंट में सभी मुकाबले 4-दिवसीय फॉर्मेट के रूप में खेले जाते हैं, जबकि इसका फाइनल मैच 5 दिनों का होता है. टूर्नामेंट के नियमों के अनुसार, पिछले सीजन की विजेता और उपविजेता टीमों को सीधे सेमीफाइनल में जगह मिलती है, जबकि बाकी बची 4 टीमें आपस में क्वार्टर फाइनल मैच खेलकर सेमीफाइनल का टिकट पक्का करती हैं. वर्तमान में इन मैचों के आयोजन के लिए बेंगलुरु स्थित ‘बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ जैसी हाई-टेक जगहों को चुना जाता है, ताकि सभी खिलाड़ियों को खेलने के लिए समान पिचें और बेहतरीन आधुनिक सुविधाएं मिल सकें.
दिलीप ट्रॉफी में समय-समय पर होता रहा कई प्रयोग
दिलीप ट्रॉफी के इतिहास में बीसीसीआई ने समय-समय पर इसके फॉर्मेट के साथ कई बड़े प्रयोग किए हैं. खेल के स्तर को सुधारने और टीम इंडिया के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाएं खोजने के लिए इस टूर्नामेंट के पहचान में लगातार बदलाव देखे गए हैं.
पारंपरिक जोनल प्रारूप (1961 से): शुरुआत से ही यह टूर्नामेंट भारत के 5 अलग-अलग इलाकों (जोन) के बीच खेला जाता रहा है. बाद में इसमें ‘नॉर्थ ईस्ट जोन’ भी शामिल हो गया, जिससे कुल 6 टीमें हो गईं, इस सिस्टम से खेलने पर खिलाड़ियों में अपने क्षेत्र या इलाके की तरफ से खेलने का एक अलग ही गर्व रहता है.
इंडिया रेड, ब्लू और ग्रीन (2016-2019): कुछ सालों के लिए बीसीसीआई ने जोन वाला सिस्टम बंद कर दिया था. इसकी जगह देश के सबसे अच्छे खिलाड़ियों को छांटकर तीन टीमें बनाई गईं, इंडिया रेड, इंडिया ब्लू और इंडिया ग्रीन. इन टीमों के बीच रात में डे-नाइट और पिंक बॉल से मैच कराने का एक नया प्रयोग किया गया था.
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इंडिया ए, बी, सी और डी प्रारूप (2024-25): इस सीजन में भारतीय टीम के लगातार टेस्ट मैचों को देखते हुए सिलेक्टर्स ने एक नया तरीका अपनाया. उन्होंने देश के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों को मिलाकर टीम A, B, C और D कुल चार टीमें बनाईं. ऐसा इसलिए किया गया ताकि इन टीमों के आपस में मैच कराकर सीनियर भारतीय टेस्ट टीम के लिए नए और मजबूत बैकअप खिलाड़ी खोजे जा सकें.
जोनल सिस्टम की वापसी (2025-26 से): बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के सिर्फ खुद के निजी खेल पर ध्यान देने के बजाय पूरे घरेलू क्रिकेट के स्तर को बेहतर बनाने और अपने जोन के लिए खेलने के गर्व को बढ़ाने का फैसला किया. इसलिए उन्होंने पुराना तरीका ही फिर से चालू कर दिया, जिसमें देश की वही पारंपरिक 6 जोनल टीमें आपस में खेलती हैं. आसान शब्दों में कहें तो, दिलीप ट्रॉफी के लिए खिलाड़ियों का चुनाव पूरी तरह से उनके खेल, शानदार रिकॉर्ड, फिटनेस और भारतीय क्रिकेट टीम की जरूरतों को देखकर किया जाता है. इसका असली मकसद भारत की नेशनल टेस्ट क्रिकेट टीम को हमेशा मजबूत बनाए रखना है.
दिलीप ट्रॉफी 2026 के पहले सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की टीम ने सेंट्रल जोन को हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है. ईशान किशन की कप्तानी में ईस्ट जोन ने फाइनल में अपनी जगह बनाई है. यह मुकाबला 30 अगस्त से 1 सितंबर तक खेला गया और 3 दिनों में ही मैच का रिजल्ट आ गया.
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